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Uttarkashi Cloudburst : मंजर ऐसा कि रूह कांप जाए, 10 मिनट में पहुंचे सेना के 150 जवान, बचाई 20 लोगों की जान

Uttarkashi Cloudburst : उत्तरकाशी के धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने से मची भीषण तबाही ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया. सेना ने मौके पर पहुंचकर 20 लोगों की जान बचाई.

Uttarkashi Cloudburst: उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार दोपहर बादल फटने से मची तबाही ने केदारनाथ और ऋषिगंगा आपदा की डरावनी यादें फिर से ताजा कर दीं. मिनटों में आया ऐसा सैलाब, जिसमें मकान, होटल, हेलीपैड सब बह गए. सेना के जवान 10 मिनट में मौके पर पहुंचे और 20 लोगों को बचा लिया. लेकिन तब तक कई लोग बाढ़ में समा चुके थे.

प्रत्यक्षदर्शी बोला- ऐसी तबाही जिंदगी में नहीं देखी

मुखबा गांव निवासी प्रत्यक्षदर्शी सुभाष चंद्र सेमवाल ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी. उन्होंने बताया कि जब वे आराम कर रहे थे, तभी तेज आवाज के साथ पानी और पत्थरों का बहाव शुरू हुआ. जैसे ही उन्होंने खीरगंगा से आता सैलाब देखा, उन्होंने तुरंत लोगों को सतर्क करने के लिए सीटियां बजाईं और चिल्लाकर धराली बाजार के लोगों को भागने को कहा.

बाढ़ का रौद्र रूप, कुछ ही पल में सबकुछ समा गया

चश्मदीदों के मुताबिक, बहुत से लोग होटल और दुकानों से बाहर भागे, लेकिन बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि कई लोग बच नहीं सके. तेज धारा ने सबकुछ बहा दिया. इस भीषण प्राकृतिक आपदा में सेना का कैंप और रेस्क्यू टीम का एक हिस्सा भी प्रभावित हुआ है.

ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर मंदीप ढिल्लों ने बताया कि भूस्खलन और बादल फटने की घटना से राहत-बचाव कार्यों में भी दिक्कतें आईं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हर्षिल में नदी किनारे बना हेलीपैड भी बह गया.

10 मिनट में पहुंची सेना, 20 लोगों की जान बचाई

धराली में सेना का हर्षिल कैंप महज चार किलोमीटर दूर है. जैसे ही आपदा की खबर मिली, सेना के करीब 150 जवान 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया. जवानों ने रस्सियों के सहारे 20 लोगों को खींचकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हर ओर मलबा और तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है. सेना ने धराली के आसपास लोगों को फिलहाल दूर रहने की चेतावनी दी है.

SDRF भी जुटी राहत कार्य में

एसडीआरएफ की 50 जवानों की विशेषज्ञ टीम भी आधुनिक उपकरणों के साथ राहत और बचाव कार्यों में लगी हुई है. स्थानीय प्रशासन, सेना और आपदा प्रबंधन टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं. लेकिन पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना रही है.

2013 की केदारनाथ और 2021 की ऋषिगंगा आपदा की याद ताजा

धराली गांव की तबाही ने 2013 की केदारनाथ त्रासदी और 2021 की ऋषिगंगा आपदा की खौफनाक तस्वीरें फिर जिंदा कर दी हैं. गंगोत्री धाम की घाटी में कुछ ही पलों में खीरगंगा नदी का उफान इतना घातक हो गया कि बड़े-बड़े होटल, मकान और सड़कें तक उसके आगे टिक नहीं पाए.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
HelloCities24 से शुरुआत के दिनों से ही जुड़ी हैं. डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव है. राजनीतिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रामीण पत्रकारिता में गहरी रुचि रखती हैं.
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