West Bengal : कोलकाता से सटे मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा क्षेत्र में हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. बीते दो दिनों से जारी हिंसा के बाद इलाके में पुलिस की लगातार गश्त जारी है. स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सुरक्षा बल सतर्क हैं, वहीं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है.
विपक्षी दलों, खासकर भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब बेलडांगा पिछले कई दिनों से अशांत है, तब बहरामपुर से तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान सार्वजनिक रूप से नजर क्यों नहीं आए. इसी बीच यह चर्चा भी सामने आई कि भगदड़ जैसी स्थिति के दौरान यूसुफ पठान को आखिरी बार बेलडांगा में देखा गया था.
तृणमूल की सफाई, अभिषेक बनर्जी ने दी जानकारी
सांसद की मौजूदगी या गैरमौजूदगी को लेकर उठ रहे सवालों पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यूसुफ पठान हिंसा में मारे गए प्रवासी मजदूर अलाउद्दीन शेख के घर गए थे. उन्होंने मृतक के परिजनों से मुलाकात की और भरोसा दिलाया कि पार्टी इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़ी है.
अभिषेक बनर्जी ने यह भी बताया कि अलाउद्दीन शेख के परिवार को हरसंभव सहायता दिलाने के लिए प्रशासन प्रयासरत है. इसमें आर्थिक मदद के साथ-साथ मृतक की पत्नी के लिए रोजगार की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई है.
रोड शो में गैरहाजिरी पर भी आया बयान
हाल ही में बहरामपुर में हुए तृणमूल कांग्रेस के रोड शो में यूसुफ पठान की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठे. इस पर अभिषेक बनर्जी ने बताया कि यूसुफ ने उनसे फोन पर बात की थी और बेलडांगा जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन उसी दिन पहले से तय रैली कार्यक्रम के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका.
अभिषेक ने कहा कि पार्टी के सभी सांसद और विधायक पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं और सरकार की ओर से सहयोग में कोई कमी नहीं होगी.
बेलडांगा में मौजूद रहने का यूसुफ का दावा
इस बीच बेलडांगा में यूसुफ पठान की मौजूदगी को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि उन्होंने मृतक के परिजनों से बातचीत के दौरान वित्तीय सहायता और नौकरी से जुड़ी बातों पर भी चर्चा की थी. स्थानीय विधायक के साथ बेलडांगा पहुंचे यूसुफ पठान ने मीडिया से बातचीत में घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक केवल अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि उस राज्य के विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में इस तरह की घटनाएं समाज के लिए नुकसानदेह हैं. हालांकि, यूसुफ पठान ने इस बात को स्वीकार नहीं किया कि वे घटनास्थल पर देर से पहुंचे थे. उनका कहना था कि वे लगातार इलाके में मौजूद थे और जनप्रतिनिधि हमेशा जमीनी स्तर पर लोगों के बीच रहते हैं.
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