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क्याें बिगड़ी लालू परिवार की एकता? आदर्श बेटी रोहिणी ने परिवार से क्यों बनाई दूरी; वजहों पर उठे सवाल

Lalu Family Dispute : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं बदले, बल्कि लालू परिवार की अंदरूनी तकरार को भी सतह पर ला दिया है. परिवार की प्रिय बेटी और किडनी दान कर चर्चित हुई रोहिणी आचार्य अब खुलकर निशाना साध रही हैं.

Lalu Family Dispute : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राजनीतिक मैदान के साथ-साथ लालू परिवार की अंदरूनी स्थिति को भी झकझोर दिया है. राजद की करारी हार के बाद रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक रूप से तेजस्वी यादव और उनके करीबी सलाहकारों को निशाना बनाकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. परिवार की दूसरी पीढ़ी के बीच बढ़ती दूरी अब साफ दिखाई देने लगी है और इसे लेकर पूरे बिहार की राजनीति में चर्चा तेज है.

लालू परिवार में बढ़ती दूरियों की शुरुआत

बिहार में इस बार चुनावी नतीजे चौंकाने वाले रहे. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, एनडीए को रिकॉर्ड 202 सीटें मिलीं और दूसरी तरफ राजद अपने इतिहास के सबसे कमजोर दौर में पहुंच गई.
लेकिन हार से ज्यादा ध्यान खींचा—परिवार की फूट ने.

लालू परिवार

सदस्यसंबंधमुख्य जानकारी / परिचय
लालू प्रसाद यादवपिताराष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री
राबड़ी देवीमाताबिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री
नामसंबंधमुख्य जानकारी
तेज प्रताप यादवबेटा (बड़ा)पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, विधायक, राजनीति में सक्रिय
तेजस्वी यादवबेटा (छोटा)बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री, RJD नेता, CM उम्मीदवार
नामसंबंधमुख्य जानकारी
मीसा भारतीबड़ी बेटीराज्यसभा सांसद
रोहिणी आचार्यबेटीसामाजिक कार्यकर्ता, राजनीति में सक्रिय भूमिका, पति समरेश सिंह
चंदा यादवबेटीनिजी जीवन में, राजनीति से दूर, पति विक्रम सिंह
रागिनी यादवबेटीनिजी जीवन में, राजनीति से दूर, पति राहुल यादव
हेमा यादवबेटीनिजी जीवन में, राजनीति से दूर, पति विनीत यादव
अनुष्का यादवबेटीनिजी जीवन में, राजनीति से दूर, पति चिरंजीवी राव
राजलक्ष्मी यादवसबसे छोटी बेटीसमाजवादी पार्टी नेता तेज प्रताप सिंह की पत्नी

तेजप्रताप पहले ही पार्टी छोड़कर अलग राह पकड़ चुके थे, लेकिन इस बार रोहिणी आचार्य के आरोप कहीं ज्यादा सख्त और सीधे थे. उनका कहना है कि टिकट बांटने में मनमानी, परिवार की अनदेखी और बाहरी सलाहकारों का दखल पार्टी को कमजोर करने वाली असली वजह बनी.

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क्यों नाराज हैं रोहिणी आचार्य?

लालू प्रसाद यादव के नौ बच्चों में दूसरे नंबर की रोहिणी आचार्य परिवार में हमेशा सम्मानजनक स्थिति रखती हैं. किडनी देकर पिता की जान बचाने के बाद वे “आदर्श बेटी” के रूप में जानी जाती हैं.
रोहिणी चाहती थीं कि उन्हें विधानसभा चुनाव 2025 में पार्टी का टिकट मिले, लेकिन तेजस्वी नेतृत्व ने यह मौका नहीं दिया.

उनका आरोप है कि पार्टी की दुर्दशा की असली वजह वही लोग हैं जिन्होंने टिकट बंटवारे को अपनी निजी रणनीति और निष्ठाओं के आधार पर तय किया.
इसलिए जब चुनाव में करारी हार मिली, तो वे चाहती थीं कि तेजस्वी जिम्मेदारी लें और परिवार में संवाद स्थापित करें.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ और रोहिणी का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा.

वे कहती हैं कि परिवार की बेटियों को हक नहीं दिया जा रहा, जबकि तेजस्वी और उनके दो सलाहकार संगठन और परिवार को अपने मुताबिक चलाना चाहते हैं.

कौन है संजय यादव, जिस पर आरोपों की बौछार हुई?

संजय यादव लंबे समय से तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद सलाहकार माने जाते हैं.
हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले संजय ने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स किया.
आईपीएल के दौरान तेजस्वी से उनकी दोस्ती हुई और फिर 2012 में उन्होंने सीधे राजद जॉइन कर ली.

धीरे-धीरे पार्टी में उनका प्रभाव इतना बढ़ा कि तेजस्वी तक पहुंचना बिना संजय के लगभग असंभव माना जाता है.
राज्यसभा 2024 में भेजे जाने के बाद उनकी ताकत और बढ़ गई.

लेकिन पार्टी के भीतर यह आरोप भी लगते रहे कि वे परिवार के असहमत सदस्यों को साइडलाइन करते हैं और फैसलों पर अत्यधिक पकड़ बनाते जा रहे हैं.
इसी पृष्ठभूमि में रोहिणी ने भी उन पर कटाक्ष किया.

रमीज कौन है, और उसका नाम क्यों उछला?

रमीज नेमत खान, तेजस्वी के बचपन और क्रिकेट के दिनों के मित्र हैं.
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से जुड़े रमीज पूर्व सांसद रिजवान जहीर खान के दामाद हैं.
आज की तारीख में वे तेजस्वी के कार्यक्रमों, राजनीतिक कैलेंडर और कई अहम फैसलों के प्रमुख संचालनकर्ता माने जाते हैं.

परिवार में उनकी छवि उतनी सकारात्मक नहीं है. खासकर बेटियां और तेजप्रताप, रमीज के प्रभाव से नाराज बताए जाते हैं.
रोहिणी के बयानों में उनका नाम आने के बाद यह सवाल गहराया कि क्या वे भी राजनीतिक रणनीति में परिवार की राय को कमजोर कर रहे थे.

लालू परिवार के अंदर असली विवाद क्या है?

लालू प्रसाद यादव अब उम्रदराज हो चुके हैं और कानूनी मामलों से घिरे हैं.
पार्टी की कमान उन्होंने तेजस्वी को सौंप दी है, लेकिन परिवार के कई सदस्य—खासतौर पर मीसा भारती, तेजप्रताप और अब रोहिणी—मानते हैं कि उन्हें भी राजनीतिक विरासत में बराबरी से जगह मिलनी चाहिए.

उधर, तेजस्वी अपनी नेतृत्व शैली पर कायम हैं और पार्टी की कमान में अपने भरोसेमंद लोगों को रखना चाहते हैं.
इसी टकराव ने परिवार के भीतर खींचतान को बढ़ाया और चुनावी हार ने इसे और विस्फोटक बना दिया.

सवाल राजनीतिक पदों का ही नहीं, बल्कि संपत्ति और परिवार के अधिकार क्षेत्र का भी है.
इस पृष्ठभूमि में संजय और रमीज की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक था, जिनकी तुलना कुछ लोग ‘जयचंद’ जैसे ऐतिहासिक विश्वासघाती पात्र से करने लगे.

जयचंद की तुलना क्यों?

भारतीय इतिहास में जयचंद एक ऐसे राजा के रूप में प्रसिद्ध है जिसे पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ विश्वासघात करने वाला बताया गया.
हालांकि कई इतिहासकार इस कहानी को अतिरंजित मानते हैं, लेकिन लोकप्रिय संस्कृति में ‘जयचंद’ शब्द आज भी धोखे का प्रतीक है.

रोहिणी के समर्थकों का संकेत है कि संजय और रमीज ने ऐसी भूमिका निभाई जिससे परिवार में अविश्वास बढ़ा, लेकिन यह तुलना राजनीतिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया अधिक लगती है.

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