US Fighter Plane in Britain: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने पिछले नौ दिनों में पूरी क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती दी है. 7 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े पैमाने पर संभावित कार्रवाई का संकेत दिया. इसी के बाद अमेरिका के चार लड़ाकू विमान और भारी परिवहन विमान इंग्लैंड के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस पर उतरे, जिससे यह एयरबेस अंतरराष्ट्रीय रणनीति के केंद्र में आ गया.
अमेरिका के विमान और उनकी तैनाती
6 मार्च को PILE72 कॉलसाइन विमान RAF फेयरफोर्ड एयरबेस पर उतरा. उसी दिन B-1B Lancer स्ट्रैटेजिक बमवर्षक भी यहां पहुंचा, जो टेक्सास स्थित डायस एयर फोर्स बेस से उड़ान भरकर आया था. इसके अलावा बड़े परिवहन विमान C-5 Galaxy और C-17 Globemaster III भी लगातार इस एयरबेस पर उतर रहे हैं.
🚨 The skies over RAF Fairford just got a whole lot heavier! Witnesses saw a U.S. Air Force B-1B “Lancer” supersonic heavy bomber slicing through the English mist like a harbinger of doom.
— USA NEWS 🇺🇸 (@usanewshq) March 6, 2026
Capable of raining down furry from 30,000 feet above. They aren’t playing around anymore. pic.twitter.com/R48Euvmvz2
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ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिकी सेना को ब्रिटेन के ठिकानों से ईरान के मिसाइल ठिकानों पर रक्षात्मक कार्रवाई की अनुमति दी. ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन विमानों की तैनाती का मुख्य उद्देश्य ईरान को क्षेत्रीय मिसाइल हमलों से रोकना और आवश्यक स्थिति में सीमित, सटीक हमले करना है.
RAF फेयरफोर्ड की रणनीतिक भूमिका
RAF फेयरफोर्ड एयरबेस यूरोप में अमेरिकी भारी बमवर्षकों के प्रमुख ठिकानों में से एक है. यहां से B-1B Lancer, B-2 Spirit और B-52 Stratofortress जैसे विमान ऑपरेशन कर सकते हैं. अमेरिकी वायुसेना की 501st Combat Support Wing इस एयरबेस पर तैनात है और यह लंबी दूरी के रणनीतिक मिशनों और परिवहन अभियानों में अहम भूमिका निभाता है.
B-1B Lancer: क्षमताएं और युद्ध कौशल
B-1B Lancer लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाला सुपरसोनिक बमवर्षक है. यह लगभग 34,000 किलो तक हथियार ले सकता है और एक मिशन में 24 क्रूज मिसाइल या कई स्मार्ट बम गिरा सकता है. इसकी मारक दूरी 800–1500 किलोमीटर है, जिससे यह अपने लक्ष्य को दूर से सटीक निशाना बना सकता है.
चार B-1B Lancer विमानों का एक साथ मिशन पूरे क्षेत्र में रणनीतिक हमले करने की क्षमता रखता है. ऐसे हमलों का उद्देश्य पूरे देश पर हमला करना नहीं बल्कि दुश्मन के रणनीतिक ढांचे, मिसाइल लॉन्च साइटों और कमांड सेंटरों को नष्ट करना होता है.
तकनीकी विवरण और विशेषताएं
B-1B Lancer को Rockwell International ने विकसित किया और 1985 में अमेरिकी वायुसेना में शामिल किया गया.
- अधिकतम गति: Mach 1.2 (~900 मील प्रति घंटे)
- क्रू सदस्य: 4
- लंबाई: 146 फीट
- पंख फैलाव: 137 फीट (मुड़े हुए पंख के साथ 79 फीट)
- टेकऑफ क्षमता: 477,000 पाउंड
- उड़ान ऊँचाई: 30,000 फीट से अधिक
वर्तमान में इसे डिजिटल कॉकपिट, Link-16 डेटा लिंक और लंबी दूरी के आधुनिक हथियारों से लैस किया गया है. भविष्य में इसे धीरे-धीरे B-21 Raider विमान से बदलने की योजना है.
B-1B Lancer का युद्ध अनुभव
B-1B Lancer ने 1986 में ऑपरेशनल उड़ान भरी. 1998 में Operation Desert Fox के दौरान इसका पहला युद्ध प्रयोग हुआ. इसके बाद अफगानिस्तान, इराक, लीबिया और सीरिया में इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर सटीक हमलों के लिए हुआ. 1994 के हथियार नियंत्रण समझौतों के बाद इसे परमाणु मिशनों से हटाकर पारंपरिक मिशनों में इस्तेमाल किया गया.
भविष्य की रणनीति और रक्षात्मक मिशन
RAF फेयरफोर्ड से तैनात विमानों का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमताओं पर नियंत्रण रखना है. अमेरिकी और ब्रिटिश सेनाएं इन विमानों के माध्यम से सीमित, रक्षात्मक हमलों की योजना बना रही हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव को नियंत्रित किया जा सके और किसी भी अप्रत्याशित हमले से सुरक्षा सुनिश्चित हो.
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