Bhagalpur News : भागलपुर जिले में शिक्षक नियोजन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड की अब व्यापक स्तर पर पड़ताल होने जा रही है. शिक्षा विभाग ने 5064 शिक्षकों से संबंधित फोल्डरों की जांच की रूपरेखा तैयार कर ली है, जिसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी, कागजात में विसंगति या पहचान संबंधी संदेह जैसे मामलों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कवायद न्यायिक निर्देशों के बाद तेज हुई है और अब इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी पूरी की जा रही है. इससे लंबे समय से लंबित सत्यापन प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है.
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अधिकारियों की बैठक में बनी जांच की रणनीति
इस विषय को लेकर बुधवार को जिला शिक्षा कार्यालय में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी राजकुमार शर्मा की अध्यक्षता में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और निगरानी से जुड़े अधिकारी शामिल हुए. चर्चा का केंद्र यह रहा कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया किस तरह पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए.
अधिकारियों ने यह भी तय किया कि जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि हर फोल्डर की बारीकी से समीक्षा हो. इसलिए संबंधित पदाधिकारियों को पहले से आवश्यक दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और रिपोर्ट तैयार रखने का निर्देश दिया गया है. विभाग चाहता है कि किसी भी स्तर पर तथ्यात्मक चूक न हो, ताकि बाद में विवाद की गुंजाइश कम रहे.
अप्रैल से ब्लॉक स्तर पर शुरू होगी पड़ताल
विभागीय योजना के अनुसार, अप्रैल महीने से यह सत्यापन कार्य नगर निगम क्षेत्र के ब्लॉक रिसोर्स सेंटर से शुरू किया जाएगा. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग प्रखंडों के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी. रोजाना दो प्रखंडों के फोल्डरों की जांच करने की रूपरेखा बनाई गई है, ताकि पूरी प्रक्रिया अनावश्यक देरी का शिकार न हो.
बताया जा रहा है कि पहले जिन सेवा अभिलेखों को ऑफलाइन माध्यम से पटना भेजा गया था, अब उन्हीं फाइलों के आधार पर स्थानीय स्तर पर आगे की जांच को अंतिम रूप दिया जाएगा. इस बार विभाग सिर्फ नाममात्र की पुष्टि पर नहीं रुकेगा, बल्कि मूल दस्तावेजों, सेवा अभिलेखों और जमा कराए गए अन्य रिकॉर्ड का तुलनात्मक परीक्षण भी किया जाएगा.
38 बिंदुओं पर होगी फाइलों की जांच
इस पूरी कवायद का सबसे अहम हिस्सा दस्तावेजों का सूक्ष्म मिलान माना जा रहा है. सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित फोल्डरों से जुड़ी सीडी और 38 बिंदुओं पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट जांच टीम के सामने प्रस्तुत करें. इन बिंदुओं में नियुक्ति, शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण, सेवा प्रविष्टि और अभिलेखीय सामंजस्य जैसे पहलुओं की समीक्षा की जाएगी.
जांच के दौरान यदि किसी फोल्डर में जानकारी और प्रस्तुत रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो उसे अलग से चिह्नित किया जाएगा. शिक्षा विभाग इस प्रक्रिया को सिर्फ प्रशासनिक अभ्यास नहीं, बल्कि नियुक्ति व्यवस्था की विश्वसनीयता से जोड़कर देख रहा है. यही कारण है कि इस बार फाइलों की स्क्रीनिंग सामान्य जांच से कहीं अधिक गहराई से किए जाने की तैयारी है.
संदिग्ध मामलों की अलग सूची तैयार होगी
सूत्रों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद उन शिक्षकों की अलग सूची बनाई जाएगी, जिनके दस्तावेजों या नियुक्ति संबंधी कागजात में गंभीर गड़बड़ी सामने आएगी. ऐसे मामलों में आगे की कार्रवाई विभागीय नियमों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी. इससे यह भी स्पष्ट होगा कि किन नियुक्तियों पर लंबे समय से उठ रहे सवाल सही थे और किन मामलों में भ्रम की स्थिति थी.
अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक रूप से योग्य व वैध नियुक्ति वाले शिक्षकों का रिकॉर्ड साफ-सुथरा तरीके से सामने आ सकेगा. वहीं, यदि कोई व्यक्ति गलत दस्तावेजों या अपूर्ण सत्यापन के आधार पर सेवा में बना हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई संभव है.
नौकरी छोड़ चुके शिक्षकों का रिकॉर्ड भी खंगाला जाएगा
जांच का दायरा केवल वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा. विभाग उन लोगों का रिकॉर्ड भी अलग से तैयार कर रहा है, जिन्होंने पहले ही सेवा छोड़ दी है या किन्हीं कारणों से अब सिस्टम का हिस्सा नहीं हैं. इसका उद्देश्य यह समझना है कि क्या ऐसे मामलों में भी कोई गड़बड़ी या विवादित नियुक्ति रही थी.
इस पहलू को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई बार जांच की आहट मिलते ही लोग सेवा से अलग हो जाते हैं. ऐसे में विभाग पुराने रिकॉर्ड को भी खंगालकर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई मामला सिर्फ कागजी रूप से बंद न हो जाए. आने वाले हफ्तों में यह जांच जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अहम प्रशासनिक परीक्षा साबित हो सकती है.
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