Iran America War: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अब प्रचार युद्ध का भी रूप ले लिया है. इसी बीच ईरान के प्रमुख अखबार तेहरान टाइम्स ने एक बेहद आक्रामक विशेष संस्करण प्रकाशित किया है. इसके पहले पन्ने पर अमेरिकी सैनिकों की तस्वीर लगाई गई है और साथ में ऐसा संदेश छापा गया है, जिसे सीधे तौर पर वॉशिंगटन के लिए चुनौती माना जा रहा है. अखबार ने अपने कवर पर साफ शब्दों में संकेत दिया है कि यदि अमेरिकी फौज ईरानी जमीन पर उतरी तो उसका अंजाम बेहद घातक हो सकता है. इस प्रकाशन के बाद पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और अधिक गहरा गया है.
ट्रंप प्रशासन की नई सैन्य तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 10 हजार अतिरिक्त सैनिकों को क्षेत्र में भेजने की तैयारी चल रही है. यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार तीखा होता जा रहा है. ट्रंप ने हालिया बयान में दावा किया कि अमेरिका इस संघर्ष में बढ़त बनाए हुए है. दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी हालात अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं और वहां आवागमन बहाल करने की समयसीमा दो बार आगे बढ़ाई जा चुकी है.
Special issue of the Tehran Times
— Tehran Times (@TehranTimes79) March 27, 2026
Stay tuned for straight truth pic.twitter.com/GGXRGuFkMv
सऊदी एयरबेस पर हमले के बाद बढ़ी बेचैनी
उधर, सऊदी अरब स्थित एक सैन्य हवाई अड्डे पर हुए हमले ने अमेरिकी सुरक्षा तंत्र की चिंता और बढ़ा दी है. बीते सप्ताह ईरान की ओर से किए गए हमले में 24 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल बताए गए हैं. जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को प्रिंस सुल्तान एयरबेस को निशाना बनाकर छह बैलिस्टिक मिसाइलें और 29 ड्रोन दागे गए. इस हमले में कम से कम 15 सैनिकों के घायल होने की बात सामने आई, जिनमें पांच की हालत गंभीर बताई गई है. इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने शुरुआती आंकड़ों में 10 जवानों के घायल होने की पुष्टि की थी, जिनमें दो गंभीर रूप से जख्मी थे.
रणनीतिक ठिकाने पर हमले ने बढ़ाई चिंता
रियाद से करीब 96 किलोमीटर दूर स्थित प्रिंस सुल्तान एयरबेस सऊदी अरब के लिए बेहद अहम सैन्य केंद्र माना जाता है. इसका संचालन रॉयल सऊदी एयरफोर्स करती है, लेकिन यहां अमेरिकी सेना की भी मौजूदगी रहती है. ऐसे में इस ठिकाने पर हमला केवल क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि अमेरिका को सीधी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है. हमले के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में सुरक्षा समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं और आशंका जताई जा रही है कि यदि हालात नहीं संभले तो यह टकराव और व्यापक रूप ले सकता है.
इसे भी पढ़ें-एयर कनाडा एक्सप्रेस फ्लाइट और ग्राउंड व्हीकल की भिड़ंत, वीडियो आया सामने
इसे भी पढ़ें-होर्मुज में तनाव के बीच भारतीय LPG टैंकरों की एंट्री की तैयारी

