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तेल संकट में फंसा अमेरिका? भारत समेत दुनिया से गिड़गिड़ा रहा; ईरानी विदेश मंत्री का ट्रंप प्रशासन पर तंज

Iran FM Taunts US on Russian Oil: ईरान के विदेश मंत्री ने रूस के तेल को लेकर अमेरिका की नीति पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जिन देशों को पहले रूसी तेल खरीदने से रोका गया, अब उन्हीं से खरीदने को कहा जा रहा है. पश्चिम एशिया में तनाव के बीच यह बयान वैश्विक ऊर्जा राजनीति को लेकर नई चर्चा पैदा कर रहा है.

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Iran FM Taunts US on Russian Oil: पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और तेल आपूर्ति पर असर के बीच ईरान ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है. ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि जिन देशों पर पहले रूस से तेल आयात रोकने का दबाव बनाया गया था, अब उन्हीं देशों से रूसी कच्चा तेल खरीदने की अपील की जा रही है.

तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ती कीमतों के बीच यह बयान सामने आया है, जिसने वैश्विक ऊर्जा राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

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ईरान के विदेश मंत्री का अमेरिका पर निशाना

Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका ने लंबे समय तक भारत समेत कई देशों पर रूस से तेल खरीदना बंद करने के लिए दबाव डाला था. लेकिन मौजूदा हालात में वही अमेरिका दुनिया से रूसी कच्चा तेल खरीदने की बात कर रहा है.

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव के कारण वॉशिंगटन का रुख बदलता दिखाई दे रहा है. उनके अनुसार अब वही देश, जिन्हें पहले चेतावनी दी जा रही थी, उनसे रूसी तेल खरीदने की अपील की जा रही है.

यूरोप की भूमिका पर भी उठाए सवाल

ईरानी विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों को भी निशाने पर लिया. उनका कहना था कि यूरोप ने ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष में अमेरिका का समर्थन इस उम्मीद में किया कि इससे रूस के खिलाफ उन्हें अतिरिक्त सहयोग मिलेगा.

उन्होंने इसे बेहद निराशाजनक और शर्मनाक करार दिया. अराघची ने अपने बयान के साथ Financial Times की एक रिपोर्ट का हवाला भी साझा किया, जिसमें बताया गया था कि मौजूदा परिस्थितियों में रूस को तेल कारोबार से अतिरिक्त फायदा हो रहा है.

तेल संकट के बीच रूस को फायदा

रिपोर्ट के अनुसार तेल कीमतों में तेजी के कारण रूस को निर्यात से बड़ी अतिरिक्त आमदनी हो रही है. अनुमान है कि मौजूदा हालात में रूस को रोजाना करीब 150 मिलियन डॉलर तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है.

बताया गया कि संघर्ष शुरू होने के शुरुआती दिनों में ही रूस ने तेल निर्यात से अरबों डॉलर की अतिरिक्त आय दर्ज की. अगर कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो महीने के अंत तक यह कमाई और बढ़ सकती है.

अमेरिका ने सीमित राहत क्यों दी

इस बीच Scott Bessent ने कहा कि अमेरिका ने कुछ परिस्थितियों में सीमित अवधि के लिए रूसी तेल से जुड़े कार्गो को खरीदने की अनुमति दी है. यह अनुमति सिर्फ उन कार्गो के लिए है जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं.

उनके अनुसार यह कदम अस्थायी है और इसका उद्देश्य बाजार में अचानक पैदा हुए दबाव को कम करना है. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इससे रूस को बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिलने दिया जाएगा.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से बढ़ी चिंता

स्थिति उस समय और जटिल हो गई जब ईरान ने Strait of Hormuz को लेकर सख्त रुख दिखाया. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन रास्तों में गिना जाता है.

वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. यहां तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं.

भारतीय जहाजों को मिली राहत

तनाव के बीच भारत के लिए कुछ राहत की खबर भी सामने आई है. रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है.

समाचार एजेंसी Reuters ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर चल रहा एक टैंकर भी इसी मार्ग से गुजरने के बाद भारत पहुंचने की उम्मीद है.

भारत को सुरक्षित मार्ग देने का भरोसा

भारत में ईरान के राजदूत Mohammad Fathali ने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध हैं. इसी वजह से भारत की ओर जाने वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की कोशिश की जाएगी.

उन्होंने कहा कि ईरान भारत के साथ अपने रिश्तों को अहम मानता है और भविष्य में भी दोनों देशों के साझा हितों को ध्यान में रखकर फैसले किए जाएंगे.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. सरल भाषा और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पहचान मानी जाती है. डिजिटल पत्रकारिता में समाचार लेखन और कंटेंट प्रेजेंटेशन का अच्छा अनुभव है. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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