LPG Crisis : बिहार में अप्रैल के मध्य में खरमास खत्म होने के बाद शादी-ब्याह का सीजन शुरू होगा, लेकिन रसोई गैस (एलपीजी) की कमी ने दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवारों को चिंता में डाल दिया है. पटना और आसपास के जिलों में कई घरों में यह डर है कि समय पर सिलेंडर न मिलने पर बारातियों के स्वागत और खाने-पीने का प्रबंध प्रभावित हो सकता है. प्रशासन ने अभी तक शादी-ब्याह के आयोजनों के लिए कोई अतिरिक्त गैस कोटा जारी नहीं किया है, जिससे आयोजकों की परेशानी बढ़ गई है.
शादी आयोजकों और हॉल संचालकों की समस्याएं
शादी-ब्याह की बुकिंग पहले से पूरी हो चुकी है, लेकिन सिलेंडर की कमी ने आयोजकों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पटना के बेली रोड और दीघा आशियाना रोड के बैंक्वेट हॉल संचालक बता रहे हैं कि उन्हें जरूरत का आधा कमर्शियल सिलेंडर भी समय पर नहीं मिल रहा है. इस वजह से कई घरों में मेहमानों के लिए तैयार किए जाने वाले व्यंजन सीमित करने पड़ सकते हैं. जिन घरों में आकस्मिक आयोजन या श्राद्ध हो रहे हैं, वहां लोग सिलेंडर की तलाश में लगातार एजेंसियों के पास जा रहे हैं.
प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने एलपीजी संकट को देखते हुए अधिकारियों और गैस एजेंसियों के साथ आपात बैठक की है. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कालाबाजारी, ओवर-प्राइसिंग या अवैध गैस वितरण में शामिल किसी भी व्यक्ति या एजेंसी के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी. लापरवाही बरतने वालों के लिए एसएमए (ESMA) के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी जारी की गई है. उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जिला कंट्रोल रूम का नंबर 0612-2219810 जारी किया गया है, जहां 24 घंटे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
सिलेंडर बैकलॉग ने बढ़ाई नाराजगी
एलपीजी सिलेंडर का बैकलॉग अब 1.71 लाख तक पहुंच चुका है. लोग बुकिंग होने के बावजूद समय पर सिलेंडर नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं. कई उपभोक्ताओं ने फर्जी डिलीवरी मैसेज मिलने की शिकायत की है, जिससे नाराजगी बढ़ गई है. प्रशासन ने गैस एजेंसियों को समय पर और जिम्मेदारी से काम करने के निर्देश दिए हैं. यदि गड़बड़ी पाई जाती है, तो एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई की जा रही है.
शादी वाले घरों और परिवारों पर संकट का असर
एलपीजी संकट के कारण शादी-ब्याह और अन्य आयोजनों में परिवारों और आयोजकों को मजबूरी में मेन्यू और खाने-पीने के प्रबंध बदलने पड़ सकते हैं. कई आयोजक रोजाना सिलेंडर की तलाश में एजेंसियों के पास जा रहे हैं, जिससे उनका समय और संसाधन प्रभावित हो रहा है. पटना और आसपास के जिलों में यह समस्या परिवारों और आयोजकों दोनों के लिए तनाव का कारण बन गई है.
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