Bihar Government Jobs: बिहार में उच्च शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी तैयारी शुरू हो चुकी है. राज्य के 209 नए डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों, प्राचार्यों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. इस प्रस्ताव के तहत कुल 9196 पदों पर बहाली की योजना बनाई गई है. उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में वित्त विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है. अब इस प्रस्ताव को अलग-अलग स्तरों पर मंजूरी मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया को आधिकारिक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा. माना जा रहा है कि मंजूरी मिलते ही राज्य में बड़े पैमाने पर नियुक्ति की राह साफ हो जाएगी.
209 कॉलेजों के लिए हजारों पदों पर होगी नियुक्ति
प्रस्ताव के अनुसार, इन नए डिग्री कॉलेजों के लिए कुल 9196 पद सृजित किए जाने हैं. इनमें 209 प्रिंसीपल के पद शामिल हैं. इसके अलावा 6479 सहायक प्रिंसीपल की नियुक्ति की जाएगी. वहीं 2508 पद लिपिकीय और अन्य गैर-शैक्षणिक कर्मियों के लिए निर्धारित किए गए हैं. इन सभी पदों को भरने के बाद नए कॉलेजों में शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को एक साथ खड़ा करने की योजना है.
सरकार की कोशिश है कि कॉलेज शुरू होने से पहले वहां आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली जाए. यही वजह है कि भर्ती की पूरी संरचना पहले से तैयार की जा रही है, ताकि कॉलेजों के संचालन में किसी तरह की दिक्कत न आए.
मंजूरी के बाद शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया
भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने से पहले इस प्रस्ताव को कई प्रशासनिक चरणों से गुजरना होगा. पहले इसे प्रशासनिक समिति के समक्ष रखा जाएगा. इसके बाद विधि विभाग से भी इसकी स्वीकृति ली जाएगी. इन दोनों स्तरों से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद बहाली प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की जाएगी.
शिक्षकों और प्राचार्यों की नियुक्ति बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से कराई जाएगी. वहीं लिपिकीय और तकनीकी श्रेणी के कर्मचारियों की बहाली राज्य कर्मचारी चयन आयोग और तकनीकी सेवा आयोग के जरिए की जाएगी. यानी अलग-अलग श्रेणियों के पदों के लिए अलग भर्ती एजेंसियों की भूमिका तय की गई है.
हर कॉलेज में विषयवार शिक्षकों की होगी तैनाती
सरकार ने नए कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए विषयवार शिक्षक नियुक्त करने की योजना बनाई है. हर कॉलेज में 15 विषयों के लिए दो-दो शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी. इसका मतलब यह है कि छात्रों को अलग-अलग विषयों में पर्याप्त शैक्षणिक सहयोग मिल सकेगा.
इसके अलावा प्रत्येक कॉलेज में एक प्रिंसीपल और एक व्यावसायिक विषय के शिक्षक की भी नियुक्ति होगी. केवल शिक्षकों तक ही व्यवस्था सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर कॉलेज में 12 गैर-शैक्षणिक कर्मियों की भी तैनाती की जाएगी. इनमें क्लर्क, लैब सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर और अन्य आवश्यक कर्मचारी शामिल रहेंगे. इससे कॉलेजों का शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचा एक साथ विकसित किया जा सकेगा.
उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार का मानना है कि नए डिग्री कॉलेजों के शुरू होने से बिहार में उच्च शिक्षा की पहुंच का दायरा बढ़ेगा. फिलहाल राज्य में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात करीब 17 प्रतिशत बताया जा रहा है, जो राष्ट्रीय औसत 29.5 प्रतिशत से काफी नीचे है. ऐसे में नए कॉलेजों के खुलने से इस अंतर को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
सरकार की योजना है कि 2026-30 सत्र से इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कर दी जाए. शुरुआती चरण में इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषयों की पढ़ाई शुरू होगी. बाद में जरूरत और संसाधनों के आधार पर अन्य विषयों को भी इसमें जोड़ा जाएगा. इस पहल को राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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