Bihar News : भागलपुर और मुंगेर में शनिवार को आधारभूत संरचना से जुड़ी गतिविधियां अचानक तेज नजर आईं. एक तरफ मुंगेर-सुलतानगंज-भागलपुर गंगा पथ (मरीन ड्राइव) परियोजना का उच्चस्तरीय हवाई सर्वेक्षण पूरा किया गया, वहीं दूसरी ओर भागलपुर में विक्रमशिला सेतु की वास्तविक स्थिति की पड़ताल के दौरान कई तकनीकी खामियां सामने आईं. इसी क्रम में पुराने सेतु के समानांतर बन रहे फोरलेन पुल के निर्माण में हो रही देरी पर पथ निर्माण विभाग ने सख्त रुख अपनाया और एजेंसी को स्पष्ट चेतावनी दे दी.
आसमान से हुई मरीन ड्राइव की मैपिंग, फाइनल ब्लूप्रिंट की तैयारी
मुंगेर में पथ निर्माण विभाग के शीर्ष अधिकारियों की टीम ने हेलीकॉप्टर के माध्यम से प्रस्तावित गंगा पथ के एलाइनमेंट का विस्तृत सर्वेक्षण किया. इस टीम में विभागीय सचिव, निगम के वरीय अधिकारी और जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी शामिल रहे. लगभग 80 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट को क्षेत्र की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में माना जा रहा है, जिसकी लागत करीब 10 हजार करोड़ रुपये के आसपास आंकी गई है.
बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
सफियाबाद हवाई अड्डे से शुरू हुए इस सर्वे में गंगा किनारे प्रस्तावित पूरे कॉरिडोर का बारीकी से निरीक्षण किया गया. विशेष रूप से हेरूदियारा से सुल्तानगंज के बीच के हिस्से पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां भू-स्थिति, जलधारा और आबादी के दबाव को देखते हुए तकनीकी पहलुओं का आकलन किया गया.
सिर्फ सड़क नहीं, पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी का प्लान
इस हवाई सर्वे को सिर्फ मरीन ड्राइव तक सीमित नहीं रखा गया. इसी दौरान मुंगेर-मिर्जाचौकी, मुंगेर-मोकामा और रक्सौल-हल्दिया फोरलेन जैसी महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की भी स्थिति का जायजा लिया गया. अधिकारियों ने इन सभी परियोजनाओं को एक व्यापक कनेक्टिविटी प्लान के रूप में देखा, ताकि आने वाले समय में यह इलाका सड़क नेटवर्क के लिहाज से पूरी तरह मजबूत हो सके.
एलिवेटेड कॉरिडोर पर जोर, जमीन अधिग्रहण कम करने की रणनीति
सर्वे के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि मरीन ड्राइव का कुछ हिस्सा जमीन के बजाय एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा सकता है. इसका मकसद साफ है—घनी आबादी वाले इलाकों को बचाना और भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं को कम करना. अगर यह योजना लागू होती है, तो परियोजना के क्रियान्वयन में आने वाली कई बड़ी बाधाएं स्वतः खत्म हो सकती हैं.
दो चरणों में बनेगा गंगा पथ, लागत भी भारी
इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी है. पहले चरण में मुंगेर से सुल्तानगंज तक सड़क का निर्माण किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में इसे भागलपुर होते हुए सबौर तक विस्तारित किया जाएगा. दोनों चरणों में हजारों करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिससे यह प्रोजेक्ट राज्य की बड़ी योजनाओं में शामिल हो गया है.
विक्रमशिला सेतु की हालत ने बढ़ाई चिंता
उधर भागलपुर में गंगा नदी पर बने पुराने विक्रमशिला सेतु का निरीक्षण भी कम गंभीर नहीं रहा. निरीक्षण के दौरान पुल के कई पीलरों में तकनीकी गड़बड़ी पाई गई. खासकर बॉल बेयरिंग की स्थिति को लेकर अधिकारियों ने चिंता जताई, क्योंकि यह सेतु की स्थिरता और सुरक्षा से सीधे जुड़ा मामला है.
संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से मरम्मत और बॉल बेयरिंग बदलने के निर्देश दिए गए, ताकि भविष्य में किसी बड़े खतरे की आशंका को टाला जा सके.
फोरलेन पुल निर्माण पर फूटा गुस्सा
पुराने सेतु के समानांतर बन रहे नए फोरलेन पुल की प्रगति रिपोर्ट ने विभागीय सचिव को संतुष्ट नहीं किया. समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि निर्माण कार्य अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है. इस पर उन्होंने एजेंसी को कड़े शब्दों में चेताया.
साफ कहा गया कि मई 2027 तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ, तो एजेंसी को अतिरिक्त जिम्मेदारियां उठानी पड़ेंगी, जिसमें पुराने सेतु का मेंटेनेंस भी शामिल हो सकता है. जब एजेंसी ने अपनी दिक्कतें बताने की कोशिश की, तो उन्हें दो टूक जवाब मिला—“बहाने नहीं, परिणाम चाहिए.”
जवाब देने से बचते रहे अधिकारी
निरीक्षण के बाद जब मीडिया ने सवाल उठाए, तो अधिकारी ज्यादा खुलकर सामने नहीं आए. उन्होंने विस्तृत जानकारी देने से परहेज किया और आधिकारिक बयान जारी होने की बात कही. इससे यह संकेत मिला कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही स्थिति को सार्वजनिक किया जाएगा.
दौरे के दौरान हलचल, छोटी घटना बनी चर्चा
दिनभर चले इस व्यस्त दौरे के बीच एक छोटी लेकिन दिलचस्प घटना भी सामने आई. वापसी के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी अपना टैब जिलाधिकारी आवास पर ही भूल गए, जिसके कारण उन्हें हवाई अड्डे पर कुछ देर रुकना पड़ा. हालांकि बाद में टैब मंगाकर वे पटना रवाना हुए.
विकास को लेकर सख्त संदेश
पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि भागलपुर और मुंगेर में चल रही बड़ी परियोजनाओं को लेकर प्रशासन अब सख्त और सतर्क रुख में है. समयसीमा, गुणवत्ता और निगरानी—तीनों पर एक साथ जोर दिया जा रहा है. आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं की रफ्तार और जमीन पर दिखने वाले असर पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी.
इसे भी पढ़ें-भागलपुर में वॉलीबॉल प्रतिभाओं की तलाश, एकलव्य आवासीय केंद्र के लिए हुआ चयन ट्रायल
इसे भी पढ़ें-निगरानी शिकंजे में आए भागलपुर के 2 कर्मचारी निलंबित, 15 दिन में चार्जशीट का निर्देश
इसे भी पढ़ें-सीएम आवास से नये पते पर सामान शिफ्ट, 7 सर्कुलर रोड होगा नीतीश कुमार का अगला ठिकाना

