Isreal US Iran War: शनिवार को इजराइल और अमेरिका द्वारा संयुक्त हवाई हमलों के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबर ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी. ईरानी सरकारी मीडिया ने इसकी पुष्टि की. घटना के बाद भारत और कई देशों में शोक की लहर के साथ-साथ अमेरिका और इजराइल के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन भी शुरू हो गए.
विशेष रूप से भारत के कई शहरों में स्थिति तनावपूर्ण रही, जहां लोग ईरानी नेता की मौत पर शोक मनाने और विरोध व्यक्त करने के लिए सड़कों पर उतरे.
कश्मीर में व्यापक तनाव, स्कूल-कॉलेज बंद
खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर के लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगाए और अपनी नाराजगी व्यक्त की.
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#WATCH | Lucknow: Members of the Shia community gathered at the Chhota Imambara to pay tribute to Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei following reports of his death in a joint US-Israel airstrike. pic.twitter.com/ck1Hr75e0G
— ANI (@ANI) March 1, 2026
सुरक्षा के मद्देनजर कश्मीर में सोमवार और मंगलवार को स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे. घाटी में लगभग 15 लाख शिया समुदाय के लोग रहते हैं, जो इस घटना पर विशेष रूप से संवेदनशील हैं. प्रदर्शनकारियों को अपना सीना पीटते और काले कपड़े पहने हुए देखा गया.
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईरानी घटनाक्रम पर चिंता जताई और शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ईरान में मौजूद छात्रों और जम्मू-कश्मीर निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर रही है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी खामेनेई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया.
देशभर में मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया
देश के कई मुस्लिम निकायों और संगठनों ने खामेनेई की याद में शोक की घोषणा की. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़ा इमामबाड़ा मस्जिद के पास भारी संख्या में लोग जुटे. लोगों ने ईरानी नेता की तस्वीर से लिपटकर शोक व्यक्त किया और अमेरिका व इजराइल के खिलाफ नारे लगाए.
अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने सोमवार को विरोध-प्रदर्शन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पुतले फूंकने की योजना की घोषणा की. उन्होंने बताया कि शिया समुदाय ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है और इस दौरान लोग काले कपड़े पहनेंगे, अपने घरों पर काले झंडे लहराएंगे और शोक सभाएं आयोजित करेंगे.
पंजाब, बिहार, झारखंड और कर्नाटक में विरोध-प्रदर्शन
पंजाब में मुस्लिम आबादी कम होने के बावजूद लुधियाना में विरोध-प्रदर्शन हुए और पुतले फूंके गए. प्रदर्शन का नेतृत्व शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने किया. उन्होंने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय शोक की घोषणा करने की मांग की और दुनिया भर के मुसलमानों से एकजुट होने का आग्रह किया.
अजमेर में शिया समुदाय ने भी तीन दिन के शोक की घोषणा की. सैयद आसिफ अली ने शोक मनाने और इस अवधि में किसी भी जश्न से परहेज करने की अपील की. अजमेर के दोराई और तारागढ़ दरगाह में शोक सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें समुदाय के लोग इकट्ठा होकर प्रार्थना और यादगारी सभा में शामिल हुए.
बिहार, झारखंड, तेलंगाना और नई दिल्ली में भी शोक और विरोध-प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजराइली सैन्य कार्रवाइयों के खिलाफ पोस्टर और बैनर थामकर विरोध जताया.
कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में भी शिया समुदाय ने तीन दिन के मौन और शोक की घोषणा की. स्थानीय लोगों ने स्वेच्छा से दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे. ग्रामीणों ने शांति बनाए रखने के लिए सभी सार्वजनिक कार्यक्रम और समारोह निलंबित कर दिए. यह वही इलाका है जहां खामेनेई 1986 में आए थे.
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