US Iran 45-day Ceasefire: ईरान में जारी सैन्य तनाव को थामने के लिए अब 45 दिनों के संभावित संघर्षविराम को लेकर नई हलचल तेज हो गई है. अमेरिका, ईरान और कुछ क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है. खाड़ी क्षेत्र में हालात लगातार नाजुक बने हुए हैं और आशंका जताई जा रही है कि अगर यह टकराव नहीं थमा, तो यह और बड़े युद्ध में बदल सकता है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी गई सख्त चेतावनियों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बैकचैनल संपर्कों के जरिए किसी अस्थायी समझौते की जमीन तैयार करने की कोशिश हो रही है.
पर्दे के पीछे कई स्तरों पर चल रही बात
एक रिपोर्ट के अनुसार, संभावित समझौते को लेकर अमेरिका, इजरायल और क्षेत्रीय पक्षों के बीच कई चैनलों से बातचीत जारी है. इसमें पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों की मध्यस्थ भूमिका भी बताई गई है. साथ ही ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और अब्बास अराघची के बीच टेक्स्ट संदेशों के जरिए संपर्क होने की बात भी सामने आई है.
बताया गया है कि प्रस्तावित ढांचे को दो हिस्सों में तैयार किया गया है. पहले चरण में 45 दिनों का संघर्षविराम लागू करने की योजना है, ताकि इस दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत आगे बढ़ सके. जरूरत पड़ने पर इस अस्थायी अवधि को आगे बढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है. दूसरे चरण में पूरे क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए व्यापक समझौते की कोशिश की जाएगी.
होर्मुज और यूरेनियम पर फंसी असली बात
सूत्रों के मुताबिक, अंतिम समझौते की दिशा दो सबसे बड़े मुद्दों पर निर्भर करती दिख रही है. पहला मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने का है, जबकि दूसरा ईरान के यूरेनियम भंडार का भविष्य है. इसमें या तो भंडार को कम करने या फिर देश से बाहर ले जाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.
हालांकि, इन दोनों मामलों पर सहमति बनाना आसान नहीं दिख रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के दिनों में ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान को कई प्रस्ताव दिए गए, लेकिन उन्हें अब तक स्वीकार नहीं किया गया है. इससे साफ है कि वार्ता आगे बढ़ने के बावजूद भरोसे और शर्तों का संकट अभी भी बना हुआ है.
45 दिन के बदले ईरान नहीं छोड़ेगा अपनी ताकत
रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य और यूरेनियम भंडार ईरान के लिए सिर्फ तकनीकी या आर्थिक मुद्दे नहीं, बल्कि उसकी बड़ी रणनीतिक ताकत माने जाते हैं. यही कारण है कि तेहरान केवल 45 दिनों के संघर्षविराम के बदले इन दोनों पर पूरी तरह झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है.
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे ऐसी स्थिति में नहीं फंसना चाहते, जहां कागज पर युद्धविराम हो लेकिन बाद में फिर से हमले शुरू हो जाएं. इसी वजह से ईरान किसी ऐसे समझौते को लेकर सतर्क है, जिसमें आगे की सुरक्षा और स्थायित्व को लेकर स्पष्ट भरोसा न हो.
ट्रंप की चेतावनी से और बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया और समझौते की दिशा में प्रगति नहीं हुई, तो ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है.
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, वॉशिंगटन की ओर से हाल के दिनों में कई प्रस्ताव आगे बढ़ाए गए, लेकिन ईरान ने किसी पर भी हामी नहीं भरी. ऐसे में ट्रंप की चेतावनी को सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि दबाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. इसी वजह से आने वाले घंटे इस पूरे संकट में बेहद अहम माने जा रहे हैं.
अगले 48 घंटे को माना जा रहा निर्णायक
हालात को देखते हुए अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं, हालांकि फिलहाल किसी आंशिक समझौते की संभावना कमजोर मानी जा रही है. ट्रंप ने पहले ईरान के लिए सोमवार शाम तक की समय-सीमा तय की थी, लेकिन बाद में इसे 20 घंटे और बढ़ा दिया गया.
उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है और समझौते की उम्मीद अब भी बाकी है, लेकिन यदि वार्ता विफल होती है तो व्यापक सैन्य कार्रवाई की जा सकती है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की नई समय-सीमा भारतीय समयानुसार मंगलवार शाम तक है.
पावर प्लांट और पुलों को लेकर ट्रंप का कड़ा बयान
रविवार को ट्रंप ने ईरान को लेकर और भी तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि अगर सहयोग नहीं हुआ और रास्ते बंद ही रखे गए, तो ईरान अपने पावर प्लांट और अन्य अहम ढांचे खो सकता है. इस बयान ने पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया.
एक अन्य बयान में उन्होंने बड़े स्तर पर विनाश की धमकी भी दी. एक्सियोस को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि समझौते की संभावना अभी भी है, लेकिन अगर कोई डील नहीं हुई, तो वहां बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा सकती है और तेल पर नियंत्रण को लेकर भी आक्रामक सोच अपनाई जा सकती है.
ईरान ने भी दिखाया सख्त रुख
अमेरिका की धमकियों के बीच ईरान की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है. रविवार रात रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना इकाई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अब पहले जैसी कभी नहीं रहने वाली, खासकर अमेरिका और इजरायल के लिए.
इस बयान ने यह संकेत दिया कि तेहरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं है. ऐसे माहौल में जहां दोनों पक्षों की बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है, वहीं 45 दिनों के संभावित संघर्षविराम को लेकर बातचीत अब भी जारी है. लेकिन जमीन पर हालात बता रहे हैं कि किसी भी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा.
बातचीत टूटी तो खाड़ी क्षेत्र में बढ़ सकता है संकट
राजनयिक हलकों में माना जा रहा है कि यह शायद आखिरी ऐसा मौका हो सकता है, जब बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव को रोका जा सके. अगर यह बातचीत विफल होती है, तो इसके असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र को झटका लग सकता है.
एक ओर अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर बड़े हमले की आशंका जताई जा रही है, तो दूसरी ओर जवाबी कार्रवाई में ईरान खाड़ी देशों के ऊर्जा और जल संयंत्रों को निशाना बना सकता है. इसी वजह से दुनिया की नजरें अब इस संभावित समझौते पर टिकी हुई हैं.
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