Sim Binding Rule: सरकार ने डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से OTT मैसेजिंग ऐप्स पर नए SIM-बाइंडिंग नियम को लागू करने का ऐलान कर दिया है. टेलीकॉम मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि इस नियम की डेडलाइन अब आगे नहीं बढ़ाई जाएगी. यानी 1 मार्च 2026 से WhatsApp, Telegram और Signal जैसे ऐप तभी सही ढंग से काम करेंगे, जब उनका अकाउंट किसी सक्रिय और वैध SIM कार्ड से जुड़ा होगा. अगर SIM बंद, इनएक्टिव या बदल दी जाती है, तो ऐप का इस्तेमाल सीमित या असंभव हो सकता है.
नियम लागू करने की वजह
मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह कदम देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड और विदेश से जुड़े डिजिटल स्कैम पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है. उनका कहना है कि मार्च 2026 से सभी मैसेजिंग ऐप्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर अकाउंट हमेशा एक्टिव SIM से लिंक रहे.
सिंधिया ने कहा कि SIM-बाइंडिंग नियम का उद्देश्य न केवल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा बढ़ाना है, बल्कि डिजिटल लेनदेन और आर्थिक अपराधों पर भी नियंत्रण रखना है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि नए नियमों से मैसेजिंग ऐप्स के वेब वर्जन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को भी बदलाव का सामना करना होगा. अब वेब लॉग-इन के बाद कम से कम हर छह घंटे में ऑटोमैटिक लॉग-आउट होगा, हालांकि QR कोड स्कैन करके यूजर आसानी से दोबारा लॉग-इन कर पाएंगे.
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SIM-biding नियम क्या कहता है
दूरसंचार विभाग (DoT) ने नवंबर 2025 में नए SIM-biding नियम जारी किए थे. इन नियमों के अनुसार:
- OTT मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर का अकाउंट एक एक्टिव SIM कार्ड से जुड़ा रहे.
- अगर SIM बदल जाती है, निष्क्रिय हो जाती है या बंद हो जाती है, तो ऐप को यूजर को सक्रिय करने की प्रक्रिया अपनानी होगी.
- सरकार ने प्लेटफॉर्म्स को नियम लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया था, जिसकी डेडलाइन 28 फरवरी 2026 को समाप्त हो रही है.
- सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कोई ऐप नियमों का पालन नहीं करता, तो उस पर टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी.
वर्तमान में कैसे काम करते हैं मैसेजिंग ऐप्स
अभी ज्यादातर मैसेजिंग ऐप्स मोबाइल नंबर पर OTP वेरिफिकेशन के बाद यूजर को एक्टिवेट करते हैं. इसके बाद ऐप तब भी चलता रहता है, भले ही SIM निकाल दी जाए, बदल दी जाए या बंद हो जाए. नए नियम इसी सिस्टम को बदलने के लिए लाए गए हैं.
हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर आपका SIM फोन में एक्टिव है और आप रोमिंग में हैं, तो इन नियमों का कोई नकारात्मक असर नहीं होगा.
विशेषज्ञों का विश्लेषण
क्रिप्टो और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि SIM-biding नियम से डिजिटल फ्रॉड और अकाउंट हाइजैकिंग के मामले काफी हद तक कम हो सकते हैं. इसके अलावा, यह कदम मैसेजिंग ऐप्स के उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और पहचान को मजबूत करेगा.
लेकिन तकनीकी विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि पुराने यूजर्स के लिए इसे अपनाने में कुछ परेशानी और तकनीकी कठिनाइयाँ हो सकती हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास एक से अधिक डिवाइस हैं.
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