Bhagalpur News: भागलपुर में नगर निगम द्वारा किराए पर दी गई आवासीय संपत्तियों को वाणिज्यिक घोषित कर होल्डिंग टैक्स लगाने के मामले ने विवाद खड़ा कर दिया है. शिकायत मिलने के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर आयुक्त से निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर मामले की जांच कर रिपोर्ट भेजी जाए. शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि केवल किराए के आधार पर संपत्ति को वाणिज्यिक घोषित करना अवैध है. राज्य निर्वाचन आयोग ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पदाधिकारी को पत्र भेजा और पक्ष रखने को कहा.
शिकायत का आधार
देवयोगी कंसल्टेंट्स के प्रतिनिधि प्रतीक झुनझुनवाला ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर बताया कि केवल किराए पर देने के कारण संपत्ति को वाणिज्यिक घोषित करना गलत है. यदि संपत्ति का वास्तविक उपयोग आवासीय है, तो इसे वाणिज्यिक नहीं माना जा सकता.
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टैक्स कानून और जीएसटी के हवाले
शिकायतकर्ता ने कई न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया. आयकर अधिनियम के अनुसार किराया हाउस प्रापर्टी की आय है. वहीं, जीएसटी में भी आवासीय संपत्ति पर किराया सामान्यतः करमुक्त रहता है.
मनमाना वर्गीकरण का आरोप
प्रतीक ने आरोप लगाया कि नगर निगम राजस्व बढ़ाने के लिए पूरे भवन को वाणिज्यिक घोषित कर रहा है, जबकि केवल व्यवसायिक उपयोग वाले हिस्से पर ही नियम लागू होना चाहिए.
नगर आयुक्त को रिपोर्ट देने के आदेश
संयुक्त सचिव संजय कुमार ने नगर आयुक्त को पत्र जारी कर सभी बिंदुओं की जांच कर बिंदुवार रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला पदाधिकारी को मामले की समीक्षा करने के लिए पत्र भेजा है.
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