Bhagalpur News : भागलपुर के GI टैग प्राप्त उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है. इसी कड़ी में मंगलवार को समीक्षा भवन में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें कतरनी चावल, जर्दालू आम, तसर सिल्क और मंजूषा पेंटिंग के विकास और प्रचार-प्रसार पर विस्तृत चर्चा हुई.
किसानों, बुनकरों और कलाकारों के साथ हुआ विचार-विमर्श
बैठक में संबंधित विभागों के पदाधिकारियों के अलावा किसान, बुनकर, व्यापारी और मंजूषा कलाकार शामिल हुए. सभी हितधारकों से GI टैग्ड उत्पादों के उत्पादन, गुणवत्ता, विपणन और ब्रांडिंग को लेकर सुझाव लिए गए और कई महत्वपूर्ण निर्णय भी किए गए.
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GI टैग को बताया जिले के लिए बड़ी उपलब्धि
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि भागलपुर जिले के लिए यह गर्व की बात है कि कतरनी चावल, जर्दालू आम, तसर सिल्क और मंजूषा पेंटिंग को GI टैग मिला है. उन्होंने कहा कि अब चुनौती इन उत्पादों के उत्पादन को बढ़ाने, बेहतर पैकेजिंग और प्रोसेसिंग के जरिए उत्पादकों को अधिक लाभ दिलाने की है.
जिला और राज्य स्तर पर समाधान की रणनीति
जिलाधिकारी ने बताया कि बैठक के दौरान सामने आए बिंदुओं को गंभीरता से नोट किया गया है. जिन समस्याओं का समाधान जिला स्तर पर संभव है, उन्हें स्थानीय स्तर पर ही हल किया जाएगा, जबकि राज्य स्तर से जुड़े विषयों के लिए प्रस्ताव भेजकर नियमित फॉलोअप किया जाएगा.
कतरनी चावल और सिल्क पर रहेगा विशेष फोकस
उन्होंने कहा कि फिलहाल जिला प्रशासन ने दो उत्पादों—कतरनी चावल और तसर सिल्क—को प्राथमिकता में रखा है. इन दोनों के प्रमोशन और एक्सपोर्ट की संभावनाओं पर विशेष रूप से काम किया जा रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे.
गुणवत्ता, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर काम
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सबसे पहले उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा. इसके बाद आधुनिक पैकेजिंग और प्रोसेसिंग पर ध्यान दिया जाएगा और फिर इन्हें बाजार से जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों, बुनकरों और कलाकारों को सीधा लाभ मिल सके.
‘मेड इन भागलपुर’ से बनेगी अलग पहचान
उन्होंने बताया कि इन GI टैग्ड उत्पादों की ब्रांडिंग “मेड इन भागलपुर” नाम से की जाएगी. इससे न केवल स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी, बल्कि भागलपुर जिले को भी एक विशिष्ट ब्रांड के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी.
जिला प्रशासन का मानना है कि इस पहल से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पारंपरिक उत्पादों से जुड़े लोगों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
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