Bihar Agriculture Update : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में बुधवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई जिसमें बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव शामिल हुए. इस मुलाकात के दौरान राज्य के कृषि मंत्री ने बिहार में कृषि क्षेत्र के समग्र विकास एवं किसानों की आय वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता प्रदान करने का पुरजोर अनुरोध किया है. उन्होंने बिहार में खेती-किसानी से संबंधित प्रमुख मांगों को लेकर एक विस्तृत अनुरोध पत्र भी केंद्रीय मंत्री को सौंपा ताकि राज्य के किसानों को राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं का सीधा लाभ मिल सके.
कृषि मंत्री ने बिहार में पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मसूर की खरीद को स्वीकृति प्रदान करने के लिए केंद्रीय मंत्री का विशेष आभार व्यक्त किया और इसे राज्य के दलहन उत्पादकों के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार होने की प्रबल संभावना है.
दलहन और तेलहन उत्पादन में बिहार को प्राथमिकता देने की उठी मांग
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि बिहार में चना, सरसों एवं अन्य प्रमुख तेलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद जल्द शुरू की जाए. उन्होंने विशेष रूप से बिहार को दलहन एवं तेलहन उत्पादन के लिए देश के प्राथमिक राज्यों की श्रेणी में शामिल करने और केंद्रीय योजनाओं के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने की मांग रखी है.
मंत्री ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तथा दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत बिहार के लिए अतिरिक्त बजटीय प्रावधान करने का आग्रह किया ताकि सिंचाई और उन्नत बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके. जवाब में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत सरकार बिहार में कृषि के चहुंमुखी विकास के लिए पूरी तरह तत्पर है.
उन्होंने राज्य की भौगोलिक विशिष्टताओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बिहार के लिए एक विशेष कृषि विकास पैकेज देने का ठोस आश्वासन दिया है जिससे कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी.
मिशन मोड में फार्मर आईडी निर्माण और डिजिटल रजिस्ट्री का कार्य तेज
राज्य में किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि अब तक 47 लाख से अधिक किसानों का डिजिटल फार्मर आईडी बनाया जा चुका है. बिहार में वर्तमान में मिशन मोड में कृषि विभाग के समन्वयक, किसान सलाहकार और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के कर्मचारियों द्वारा कैंप लगाकर फार्मर रजिस्ट्री का कार्य संपन्न किया जा रहा है.
इस डिजिटल डेटाबेस के तैयार होने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में बिना किसी बिचौलिए के प्राप्त होगा. सरकार का लक्ष्य प्रत्येक बटाईदार और भूमिधारी किसान को इस डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है ताकि आपदा राहत और अन्य इनपुट सब्सिडी का वितरण पारदर्शी तरीके से हो सके.
रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं जिससे किसानों को प्रखंड कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनकी सभी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा.
राज्य में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता और सतत आपूर्ति की व्यवस्था
कृषि मंत्री ने राज्य में खाद की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि 01 अप्रैल 2026 तक बिहार में यूरिया 2.77 लाख मीट्रिक टन और डीएपी 1.46 लाख मीट्रिक टन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. इसके अलावा एनपीके 2.11 लाख मीट्रिक टन, एमओपी 0.43 लाख मीट्रिक टन एवं एसएसपी 1.02 लाख मीट्रिक टन गोदामों में सुरक्षित है.
उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की सतत आपूर्ति हर जिले और प्रखंड में सुनिश्चित की जा रही है ताकि बुवाई के समय किसी प्रकार की किल्लत न हो. विभाग उर्वरक की कालाबाजारी रोकने के लिए भी कड़े कदम उठा रहा है और जिला स्तर पर निगरानी टीमें तैनात की गई हैं. मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से उर्वरक का रैक मूवमेंट तेज किया गया है जिससे सीमावर्ती जिलों में भी खाद की उपलब्धता बनी हुई है.
किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल अपनी जरूरत के अनुसार ही खाद की खरीदारी करें क्योंकि राज्य के पास आने वाले खरीफ सीजन के लिए भी पर्याप्त भंडार मौजूद है.
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए नई तकनीक और बाजार लिंकेज पर जोर
बिहार सरकार और केंद्र के बीच हुई इस उच्च स्तरीय वार्ता में किसानों को बाजार से जोड़ने और नई तकनीक के समावेश पर भी व्यापक चर्चा की गई. राम कृपाल यादव ने कहा कि बिहार में मखाना, लीची और आम जैसे बागवानी उत्पादों के निर्यात के लिए विशेष हब विकसित करने की आवश्यकता है.
उन्होंने केंद्र से इन उत्पादों की ब्रांडिंग और प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए तकनीकी सहायता की मांग की जिससे किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके. केंद्रीय मंत्री ने इन प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि पीएम-किसान और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में बिहार अग्रणी भूमिका निभा रहा है.
राज्य में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए भी अतिरिक्त सब्सिडी देने पर विचार किया जा रहा है जिससे छोटे किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी. आगामी बजट में बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए बड़े आवंटन की उम्मीद है जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे.
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