Bihar News: बिहार के प्रमुख मंदिरों और आस्था केंद्रों तक पहुंचना अब पहले से ज्यादा सुविधाजनक होने जा रहा है. राज्य के परिवहन विभाग ने श्रद्धालुओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक योजना तैयार की है, जिसके तहत 60 से अधिक धार्मिक स्थलों को नियमित बस सेवा से जोड़ा जाएगा.
इस पहल से उन यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो अब तक सीधी बस सेवा के अभाव में निजी वाहनों या महंगे साधनों पर निर्भर रहने को मजबूर थे. नई व्यवस्था के तहत आधुनिक सुविधाओं से लैस इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसें चलाई जाएंगी, जिससे यात्रा आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल होगी.
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इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों से होगा संचालन
परिवहन विभाग की योजना के अनुसार, इन रूटों पर चलने वाली बसें अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित होंगी. यात्रियों को जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, ऑनलाइन टिकट बुकिंग और समयबद्ध परिचालन जैसी सुविधाएं मिलेंगी.
अगर आप बाबा धाम, गया जी या सीतामढ़ी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो आने वाले समय में वहां तक सीधी और सुविधाजनक बस सेवा उपलब्ध होगी.
पहले चरण में एक दर्जन जिलों से शुरुआत
योजना के प्रारंभिक चरण में पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर समेत करीब एक दर्जन जिलों से बसों का परिचालन शुरू करने की तैयारी है. विभाग ने पहले ही जिलों से उन मार्गों की सूची मंगाई थी जहां श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक है लेकिन सार्वजनिक परिवहन की कमी बनी हुई है.
इन चयनित रूटों पर इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के संचालन से न केवल सुविधा बढ़ेगी, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी. शांत और स्वच्छ यात्रा का अनुभव तीर्थ यात्रियों के लिए खास आकर्षण होगा.
15 मार्च के बाद आवेदन प्रक्रिया
अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर लागू किया जाएगा. 15 मार्च के बाद इच्छुक ऑपरेटरों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है. संभावना है कि मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल की शुरुआत तक कुछ रूटों पर ट्रायल रन भी शुरू हो जाए.
इन जिलों को मिली प्राथमिकता
प्रारंभिक चरण में जिन जिलों को प्राथमिकता सूची में रखा गया है, उनमें पटना, गया, बांका, वैशाली, सीतामढ़ी, दरभंगा और भोजपुर शामिल हैं. इन जिलों के प्रमुख मंदिरों और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए विशेष रूट मैप तैयार किए गए हैं.
दूसरे चरण में राज्य के अन्य छोटे धार्मिक केंद्रों को भी इस नेटवर्क में शामिल किया जाएगा. सरकार का मानना है कि यह पहल धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगी और बिहार के पर्यटन मानचित्र को व्यापक रूप से बदल सकती है.
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