Bihar Road Project: राज्य में सड़क अवसंरचना को मजबूत बनाने के लिए सरकार बड़े स्तर पर काम कर रही है. इसी क्रम में पथ निर्माण विभाग के स्तर पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में निर्माण की गति, जमीन अधिग्रहण, वित्तीय प्रगति और तय समय-सीमा की समीक्षा की गई.
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि जहां भी प्रशासनिक या भू-अर्जन से जुड़ी अड़चनें हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो.
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82.4 किमी लंबा मोकामा–मुंगेर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर
करीब 4447 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा मोकामा–मुंगेर फोरलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे इस बैठक का प्रमुख केंद्र रहा. यह सड़क पटना जिले के मोकामा से शुरू होकर लखीसराय और शेखपुरा के रास्ते मुंगेर तक जाएगी.
परियोजना के कुछ हिस्सों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया धीमी बताई गई. इस पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया. माना जा रहा है कि इस मार्ग के चालू होने से औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को सीधा लाभ मिलेगा.
सीवान–मशरख मार्ग: 50.1 किमी परियोजना पर फोकस
सीवान और सारण जिलों को जोड़ने वाली इस सड़क की कुल लंबाई 50.1 किलोमीटर है, जिसमें 44.5 किलोमीटर हिस्सा सीवान में और 5.6 किलोमीटर सारण में आता है. लगभग 1399 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को समय पर पूरा करना प्राथमिकता बताया गया.
बैठक में विभागीय समन्वय मजबूत रखने और कार्य प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग करने पर जोर दिया गया.
बकरपुर–मानिकपुर: हाई स्पीड कॉरिडोर से जुड़ी कड़ी
38.81 किलोमीटर लंबी यह सड़क पटना–बेतिया हाई स्पीड कॉरिडोर का हिस्सा है. लगभग 1422 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की प्रगति को संतोषजनक बताया गया.
जिलास्तरीय प्रशासन को निर्देश दिया गया कि यदि कहीं भूमि अधिग्रहण से जुड़ी समस्या शेष है तो उसे तत्काल प्रभाव से हल किया जाए, ताकि निर्माण कार्य बिना रुकावट जारी रहे.
महेशखूंट–सहरसा–पूर्णिया: अंतिम चरण में पहुंचा निर्माण
इस परियोजना में अब तक 91 प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है. शेष कार्य को अप्रैल तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है. अधिकारियों को गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सड़क लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ बनी रहे.
विकास की दिशा में बड़ा कदम
इन चारों परियोजनाओं के पूर्ण होने से उत्तर और पूर्वी बिहार के कई जिलों के बीच आवागमन सुगम होगा. यात्रा समय में कमी आएगी और व्यापार, परिवहन तथा क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी.
राज्य सरकार का फोकस स्पष्ट है — सड़क नेटवर्क को आधुनिक और सुदृढ़ बनाकर विकास की रफ्तार को तेज करना.
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