24 February 2026, Tuesday
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Bihar Elections 2025: सीट बंटवारे पर फंसा महागठबंधन, 8 सीटों पर ‘दोस्ताना जंग’ के आसार

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की रैली आज
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की रैली आज.

Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार महागठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान ने सियासी गर्मी बढ़ा दी है. पहले चरण की 121 सीटों पर नामांकन की मियाद खत्म हो चुकी है, लेकिन गठबंधन के घटक दल अब तक सभी सीटों पर तालमेल नहीं बना सके हैं. नतीजतन, कई जगहों पर ‘दोस्ताना मुकाबले’ की स्थिति बन गई है, जहां सहयोगी दल आमने-सामने नजर आ सकते हैं.

राजद और कांग्रेस आमने-सामने

महागठबंधन के भीतर सबसे बड़ा टकराव राजद और कांग्रेस के बीच देखने को मिल रहा है. लालगंज, कुटुंबा और सिकंदरा जैसी सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवारों ने मोर्चा संभाल लिया है. कुटुंबा में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को चुनौती देने के लिए राजद ने सुरेश पासवान को मैदान में उतारा है.

वारसलीगंज सीट पर भी तालमेल न बन पाने से राजद ने अनिता देवी को जबकि कांग्रेस ने सतीश कुमार सिंह को प्रत्याशी घोषित किया है. सूत्रों के मुताबिक, ऐसी करीब आठ विधानसभा सीटें हैं जहां गठबंधन के भीतर ही सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा.

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राजद की सूची पर सस्पेंस बरकरार

दूसरे चरण की नामांकन प्रक्रिया तेज हो चुकी है, मगर राजद ने अब तक अपने उम्मीदवारों की पूरी सूची जारी नहीं की है. अंदरखाने में टिकट वितरण जारी है और कई नेता चुपचाप नामांकन दाखिल भी कर रहे हैं. इस गोपनीय रणनीति से सहयोगी दलों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

महागठबंधन में असंतोष और अलग राह पर झामुमो

राजद, कांग्रेस, वीआईपी और वामपंथी दलों के इस गठबंधन से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है. सीट बंटवारे में हिस्सेदारी न मिलने पर झामुमो ने बिहार में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान करते हुए छह सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं.

6 और 11 नवंबर को वोटिंग, 14 को नतीजे

इस बार बिहार की सियासत में सीधा मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच माना जा रहा है. एनडीए में भाजपा और जदयू के नेतृत्व में चुनावी जंग लड़ी जा रही है, जबकि दूसरी ओर महागठबंधन की कमान तेजस्वी यादव संभाले हुए हैं. पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर और दूसरे चरण की 11 नवंबर को होगी, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी.

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Bihar Election 2025: सीमावर्ती इलाकों के बूथों पर रहेगी कड़ी निगरानी, नदी किनारे नाव से होगी पेट्रोलिंग

सीमावर्ती इलाकों के बूथों पर रहेगी कड़ी निगरानी
सीमावर्ती इलाकों के बूथों पर रहेगी कड़ी निगरानी

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम शुरू हो गए हैं. गोपालगंज समेत राज्य के उन हिस्सों में, जो उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हैं, प्रशासन ने विशेष चौकसी बरतने के निर्देश दिए हैं. चिन्हित सीमावर्ती इलाकों के 260 मतदान केंद्रों पर अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी.

सीमा से सटे बूथों पर कड़ी चौकसी

जिला प्रशासन ने मतदान से पहले सीमावर्ती इलाकों में गहन निगरानी की योजना बनाई है. मतदान से 48 घंटे पूर्व ही पेट्रोलिंग शुरू कर दी जाएगी. विशेष रूप से गंडक नदी के किनारे स्थित मतदान केंद्रों पर नाव से लगातार गश्ती की व्यवस्था की जा रही है. इसके साथ ही आसपास के गांवों में भी पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से पहले सतर्कता बरती जा सके.

गोपालगंज से सटी सात जिलों की सीमा पर विशेष सतर्कता

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गोपालगंज की सीमा बिहार और उत्तर प्रदेश के सात जिलों से जुड़ी है. इनमें यूपी के देवरिया और कुशीनगर के अलावा बिहार के पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सारण और सिवान जिले शामिल हैं. इन सभी सीमावर्ती इलाकों के मतदान केंद्रों को प्रशासन ने हाई-सेंसिटिव कैटेगरी में रखा है.

देवरिया और कुशीनगर सीमा पर बढ़े सुरक्षा इंतजाम

भोरे सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र के 40 मतदान केंद्र देवरिया जिले की सीमा से सटे हैं. वहीं कुशीनगर की सीमा पर पंचदेवरी और कुचायकोट प्रखंड के 42 मतदान केंद्र स्थित हैं. दोनों सीमावर्ती जिलों में मतदान से पहले सुरक्षा रणनीति तय करने के लिए उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें होंगी. इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा.

गंडक नदी किनारे पेट्रोलिंग के लिए बनेगा रूट चार्ट

गंडक नदी के आसपास स्थित इलाकों में नाव से सघन पेट्रोलिंग की तैयारी चल रही है. इसके लिए रूट चार्ट तैयार किया जा रहा है, ताकि किसी भी मतदान केंद्र तक तुरंत पहुंचा जा सके. पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, सारण तथा आसपास के क्षेत्रों में पेट्रोलिंग के साथ घुड़सवार पुलिस बल भी तैनात किया जाएगा. प्रशासन का कहना है कि यह कदम मतदान के दौरान शांति और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उठाया गया है.

प्रखंडवार सीमावर्ती इलाकों के मतदान केंद्र

प्रखंड का नाममतदान केंद्रों की संख्या
बरौली54
बैकुंठपुर33
सिधवलिया15
मांझा11
गोपालगंज22
थावे08
पंचदेवरी06
कुचायकोट30
कटेया13
भोरे10
विजयीपुर25
उचकागांव04
हथुआ29
कुल260

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दिवाली-छठ के मौके पर रेलवे और बस यातायात में भीड़, किराया पांच गुना तक बढ़ा, रेलवे ने किया बड़ा इंतजाम

दीवाली-छठ के मौके पर रेलवे और बस यातायात में भीड़
दीवाली-छठ के मौके पर रेलवे और बस यातायात में भीड़

Diwali-Chhath rush : त्योहारी सीजन शुरू होने से देशभर के रेलवे स्टेशन और बस अड्डे यात्रियों से भर गए हैं. टिकट लेने के लिए लोग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, वहीं बसों के किराए कई शहरों में पांच गुना तक बढ़ गए हैं. भीड़ और महंगे किराए के बावजूद यात्री अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. दिल्ली, मुंबई, सूरत, भोपाल और पटना जैसे प्रमुख शहरों में लंबी कतारें आम दृश्य बन गई हैं, जिससे यात्रियों को कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है. रेल प्रशासन ने इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए कई राहत भरे कदम उठाए हैं.

रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल पर शनिवार को अकेले ही 1 लाख 75 हजार यात्री पहुंचे. इनमें 75 हजार नॉन-रिजर्व टिकटधारी शामिल थे. दिल्ली, मुंबई, भोपाल, सूरत और अन्य शहरों के रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को 12 घंटे तक लाइन में खड़े रहना पड़ा. बसों की कीमतें बढ़ने और टिकट उपलब्धता सीमित होने के कारण यात्रियों को सफर में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.

स्पेशल ट्रेनों का ऐलान

सेंट्रल रेलवे ने त्योहार से पहले 1,702 स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है. ये ट्रेनें छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, पुणे, कोल्हापुर और नागपुर से शुरू होंगी. उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 800 से अधिक ट्रेनें विशेष रूप से चलाई जाएंगी. इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों को जोड़ने वाली ट्रेनें भी यात्रियों की सुविधा के लिए उपलब्ध रहेंगी. रेलवे प्रशासन के अनुसार यह कदम लाखों यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.

यात्रियों की सुविधा के लिए इंतजाम

सेंट्रल रेलवे ने प्रमुख स्टेशनों पर 3,000 से अधिक यात्रियों की क्षमता वाले होल्डिंग एरिया बनाए हैं. इन क्षेत्रों में भोजन, पानी, शौचालय, पंखे और आराम की अन्य सुविधाएँ उपलब्ध हैं. टिकट बुकिंग को आसान बनाने के लिए मोबाइल यूटीएस सर्विस चालू की गई है और अतिरिक्त टिकट काउंटर खोले गए हैं, ताकि यात्रियों को लंबी कतारों में प्रतीक्षा न करनी पड़े. रेलवे का कहना है कि इन उपायों का मकसद त्योहारी सीजन में यात्रियों की यात्रा को सहज और सुरक्षित बनाना है.

सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो पर कार्रवाई

रेलवे प्रशासन ने सोशल मीडिया पर पुराने या भ्रामक वीडियो शेयर करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है. प्रशासन ने बताया कि कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स स्टेशनों पर भीड़ या अन्य घटनाओं के पुराने वीडियो साझा कर भ्रम फैला रहे हैं. 20 से अधिक ऐसे हैंडल्स की पहचान की गई है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. रेलवे ने 24×7 सोशल मीडिया मॉनिटरिंग लागू कर दी है और यात्रियों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक हैंडल्स (@RailMinIndia) पर भरोसा करें और बिना तथ्य जांचे वीडियो शेयर न करें.

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राजद नेता का राबड़ी आवास पर हाई वोल्टेज प्रदर्शन
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Bihar Election News: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच मोतिहारी की मधुबन सीट से राजद नेता मदन प्रसाद शाह ने राबड़ी आवास के बाहर हंगामा कर सियासी सुर्खियां बटोरीं. टिकट नहीं मिलने के गुस्से में वे कुर्ता फाड़कर सड़क पर लेट गए और कई घंटे तक विरोध प्रदर्शन करते रहे. इस दौरान आवास के बाहर हाई वोल्टेज माहौल बना रहा और उनके समर्थन में कुछ लोग भी जमा हुए.

टिकट के लिए बड़ी रकम की डिमांड का आरोप

मदन शाह ने दावा किया कि टिकट पाने के लिए उनसे 2 करोड़ रुपये से अधिक की मांग की गई थी, जिसे उन्होंने देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि लालू यादव ने उन्हें टिकट देने का आश्वासन दिया था, लेकिन रात 1 बजे से सुबह 3 बजे तक भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके अलावा, उन्होंने संजय यादव पर आरोप लगाया कि उन्होंने परिवार में मतभेद पैदा कर भाई-बहन को अलग करवा दिया.

राजद ने डॉक्टर संतोष कुशवाहा को किया मैदान में उतारा

मधुबन विधानसभा सीट से भाजपा के राणा रणधीर सिंह चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि राजद ने डॉक्टर संतोष कुशवाहा को उम्मीदवार घोषित किया है. इससे मदन शाह वंचित रह गए हैं. गौरतलब है कि 2020 के चुनाव में भी वे राजद के टिकट पर चुनाव लड़े थे और सिर्फ 2700 वोटों से हार गए थे. इस बार टिकट न मिलने पर उनका प्रदर्शन और आरोप चुनावी चर्चाओं का केंद्र बन गया है.

राजनीतिक माहौल पर असर

राजद के इस सीट पर नए उम्मीदवार और मदन शाह का विरोध प्रदर्शन पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति खड़ी कर रहा है. राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि मधुबन विधानसभा में यह विवाद मतदाताओं की रणनीति और टिकट वितरण पर सवाल उठा सकता है.

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Muzaffarpur News : चुनाव के मद्देनजर वोटरों की आधार सुधार में भीड़, डाकघर और सेवा केंद्रों में लगी लंबी कतारें

Muzaffarpur News
मुजफ्फरपुर में होटल उद्घाटन के दौरान रंगदारी का प्रयास.

Muzaffarpur News: चुनाव नज़दीक आते ही मुजफ्फरपुर में मतदाता अपने आधार कार्ड में हुई त्रुटियों को सुधारने में जुट गए हैं. शहर के प्रधान डाकघर और अन्य आधार सेवा केंद्रों पर रोजाना हजारों लोग आधार अपडेट या संशोधन के लिए पहुंच रहे हैं. सुबह-सुबह से ही काउंटरों पर लंबी कतारें लग जाती हैं और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. मतदाताओं का कहना है कि आधार कार्ड न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में जरूरी है, बल्कि चुनाव में वोटिंग के समय भी यह अहम दस्तावेज होता है.

बच्चों और राशन कार्ड धारकों की भीड़

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जिन बच्चों की उम्र पाँच वर्ष से अधिक हो गई है, उनके बायोमेट्रिक अपडेट के लिए भी अभिभावक बड़ी संख्या में केंद्रों पर आ रहे हैं. साथ ही, राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी प्रक्रिया भी जारी है, जिससे डाकघर में भीड़ और बढ़ गई है. सुबह सात बजे से ही लोग डाकघर पहुंचकर टोकन लेने लगते हैं और कई बार जरूरी काम करने में देरी हो रही है.

कतारों में असंतोष

कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पहचान वाले व्यक्तियों के आधार पहले अपडेट कर दिए जाते हैं, जबकि आम मतदाताओं को घंटों लाइन में लगना पड़ता है. डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 800-900 आवेदन लिए जा रहे हैं और सभी को टोकन नंबर जारी किया जाता है. अधिकारियों ने कहा कि भीड़ अधिक होने के कारण काम में विलंब हो रहा है, लेकिन सभी की प्रक्रिया पूर्ण रूप से पूरी की जा रही है.

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Bihar News: दिवाली-छठ पर नहीं मिलेगी छुट्टी, डॉक्टर 24 घंटे रहेंगे ड्यूटी पर, परेशानी होने पर यहां करें संपर्क

दिवाली-छठ पर नहीं मिलेगी छुट्टी
दिवाली-छठ पर नहीं मिलेगी छुट्टी.

Bihar News: राज्य में दिवाली और छठ पर्व के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है. पटना समेत सभी जिलों में चिकित्सा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है. पटाखों और आग से जुड़ी संभावित घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सभी सरकारी अस्पतालों को 24 घंटे इमरजेंसी मोड पर काम करने का निर्देश दिया गया है. किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं.

तैनात होगी क्विक रिस्पांस टीम

स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक जिले में क्विक रिस्पांस टीम (QRT) का गठन किया है, जो किसी भी आपात सूचना पर तुरंत कार्रवाई करेगी. टीम को निर्देश दिया गया है कि दिवाली या छठ के दौरान आग, जलने या विस्फोट जैसी घटनाओं में त्वरित हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जाए. अधिकारियों ने कहा है कि त्योहारों के दौरान एंबुलेंस सेवा और नियंत्रण कक्ष को भी 24 घंटे सक्रिय रखा जाएगा.

सभी बड़े अस्पताल हाई अलर्ट पर

पटना के पीएमसीएच, आइजीआईएमएस, एनएमसीएच, एम्स पटना, गार्डिनर रोड अस्पताल और एलएनजेपी अस्पताल सहित सभी प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को अलर्ट मोड पर रखा गया है. इसके अलावा जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी इमरजेंसी वार्ड और बर्न यूनिट को सक्रिय कर दिया गया है.

अधिकारियों के मुताबिक, पटाखों या आग से झुलसने वाले मरीजों को तत्काल इलाज की प्राथमिकता दी जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर अतिरिक्त दवा और प्लाज्मा की उपलब्धता भी सुनिश्चित की है, ताकि किसी मरीज को इंतजार न करना पड़े.

यहां करें संपर्क

  • पीएमसीएच कंट्रोल रूम: 0612-2300080
  • पीएमसीएच अधीक्षक: 9470003549
  • पीएमसीएच प्रिंसिपल: 9470003552
  • आईजीआइएमएस: 9473191807 / 0612-2297099
  • पटना एम्स: 9470702184 / 0612-2451070
  • गार्डिनर रोड अस्पताल: 8521861020
  • राजवंशी नगर एलएनजेपी अस्पताल: 9431022000
  • सिविल सर्जन कार्यालय: 9470003600

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Bihar Election 2025: कांग्रेस ने जदयू से निकाले गए नेता पर लगाया दांव, जानें पूर्णिया में किस तरह मचा सियासी तूफान

Pappu Yadav
सांसद पप्पू यादव को मिला इनकम टैक्स का नोटिस

Bihar Election 2025: सीमांचल की सियासत में पूर्णिया विधानसभा सीट इस बार सबसे गर्म हो गई है. कांग्रेस ने अपनी दूसरी सूची में पूर्व जदयू नेता जितेंद्र यादव को उम्मीदवार बनाकर सबको चौंका दिया है. कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद माने जाने वाले यादव अब कांग्रेस की नई उम्मीद हैं. उनके टिकट की घोषणा के साथ ही बीजेपी, जदयू और पप्पू यादव खेमे में हलचल बढ़ गई है.

कांग्रेस की चाल से बदला पूरा समीकरण

पूर्णिया में जितेंद्र यादव की एंट्री कांग्रेस की रणनीति को एकदम नया मोड़ देती है. यादव समाज में पकड़, पत्नी विभा कुमारी का मेयर होना और पप्पू यादव से पुराने संबंध — ये तीनों फैक्टर उन्हें बाकी उम्मीदवारों से अलग पहचान देते हैं. कांग्रेस का इरादा साफ है — वह सीमांचल में नए समीकरणों के सहारे मैदान बदलना चाहती है.

जदयू से निष्कासित होने के बाद बदली दिशा

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जितेंद्र यादव कभी जदयू के प्रदेश महासचिव थे और संतोष कुशवाहा के करीबी माने जाते थे. 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगा — कहा गया कि उन्होंने एनडीए प्रत्याशी के बजाय पप्पू यादव को फायदा पहुंचाया. इसी आरोप के बाद जदयू ने उन्हें निष्कासित कर दिया.

लंबे अंतराल के बाद जुलाई 2025 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा. तब से ही वे सीमांचल क्षेत्र से टिकट की रेस में आगे चल रहे थे. कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर यह संकेत दे दिया कि वह अब “पुराने चेहरे” नहीं, “नए समीकरणों” पर भरोसा कर रही है.

बीजेपी का गढ़, लेकिन इस बार मुकाबला अलग

पूर्णिया सीट पर पिछले पंद्रह साल से बीजेपी का कब्जा कायम है. 2010 में राज किशोर केसरी की जीत से शुरू हुआ सिलसिला अब तक टूटा नहीं. केसरी की हत्या के बाद उनकी पत्नी किरण देवी ने उपचुनाव जीता, फिर 2015 और 2020 में विजय कुमार खेमका ने कांग्रेस की इंदु सिन्हा को हराया.

मगर इस बार समीकरण पुराने नहीं रहे. कांग्रेस ने इंदु सिन्हा को हटाकर नया चेहरा उतारा है, वहीं खेमका लगातार तीसरी बार मैदान में हैं. यादव समाज के वोट और नगर निगम नेटवर्क के कारण जितेंद्र यादव स्थानीय स्तर पर मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं.

पप्पू यादव का अप्रत्यक्ष असर

पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भले इस सीट से उम्मीदवार न हों, लेकिन उनका प्रभाव अब भी गहराई तक बना हुआ है. सूत्र बताते हैं कि उन्होंने अपने समर्थक दिवाकर यादव को टिकट दिलाने की कोशिश की थी, पर पार्टी ने अंततः जितेंद्र यादव पर भरोसा जताया. अब यही “यादव फैक्टर” मुकाबले को और दिलचस्प बना रहा है.

मुकाबला अब साख और समीकरणों का

पूर्णिया में इस बार सिर्फ पार्टी नहीं, बल्कि “साख और समीकरण” दोनों दांव पर हैं. बीजेपी अपने गढ़ को बचाने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस सीमांचल में जमीन तलाश रही है. वहीं, पप्पू यादव का अप्रत्यक्ष प्रभाव इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना सकता है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस ने जितेंद्र यादव को उतारकर एक बड़ा संदेश दिया है — पार्टी अब सीमांचल में जातीय संतुलन और स्थानीय असर पर फोकस कर रही है, न कि केवल पुराने नामों पर.

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Bihar Election 2025: टिकट को लेकर भड़कीं RJD नेता रितु जायसवाल, फेसबुक पर फूटा गुस्सा—कहा, ‘परिहार छोड़ना आत्मा को मंजूर नहीं’

RJD नेता रितु जायसवाल
RJD नेता रितु जायसवाल

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद के भीतर भी नाराजगी के सुर तेज होने लगे हैं. पार्टी की तेजतर्रार महिला नेता रितु जायसवाल ने टिकट नहीं मिलने पर सोशल मीडिया के जरिये अपनी भड़ास निकाली है. परिहार सीट से उम्मीद लगाए बैठीं रितु को जब बेलसंड से टिकट दिए जाने की चर्चा पता चली, तो उन्होंने फेसबुक पर खुला संदेश लिखकर पार्टी नेतृत्व पर नाराजगी जताई और राजद नेता पर गद्दारी तक का आरोप लगा दिया.

‘परिहार की जनता से मेरा रिश्ता आत्मीय, न छोड़ूंगी यह मिट्टी’

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रितु जायसवाल ने अपने फेसबुक पोस्ट की शुरुआत “परिहार की जनता के नाम संदेश” से की. उन्होंने लिखा कि जैसे ही लोगों को यह खबर मिली कि उन्हें परिहार से टिकट न देकर बेलसंड भेजा जा सकता है, हजारों कॉल और संदेश आने लगे. सबका एक ही आग्रह था—“मैडम, परिहार को मत छोड़िए.” उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की मिट्टी, लोगों के सुख-दुख और संघर्ष से उनका जुड़ाव पांच सालों की मेहनत और विश्वास पर टिका है.

‘गद्दारी का इनाम मिला, टिकट उन्हीं के घर में गया’

पोस्ट में रितु ने यह भी लिखा कि परिहार की बदहाली के लिए सिर्फ वर्तमान बीजेपी विधायक गायत्री देवी नहीं, बल्कि पूर्व राजद विधायक डॉ. रामचंद्र पूर्वे भी समान रूप से जिम्मेदार हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चुनाव में डॉ. पूर्वे ने पार्टी के साथ गद्दारी की थी, जिसके कारण उन्हें मामूली अंतर से हार झेलनी पड़ी थी. अब जब पार्टी ने पूर्वे की बहू, डॉ. स्मिता पूर्वे, को परिहार से टिकट दे दिया है, तो यह उनकी गद्दारी का पुरस्कार जैसा लग रहा है.

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‘स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में लड़ूंगी चुनाव’

रितु जायसवाल ने स्पष्ट किया कि वे किसी अन्य सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगी. उन्होंने लिखा—“परिहार को छोड़ना मेरी आत्मा को स्वीकार नहीं. अगर पार्टी अपना फैसला नहीं बदलती, तो मैं परिहार से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरूंगी.” उन्होंने कहा कि यह निर्णय आसान नहीं, लेकिन यह उनके मन की आवाज और परिहार की जनता की भावना का सम्मान है.

राजद ने स्मिता पूर्वे पर जताया भरोसा

गौरतलब है कि सीतामढ़ी जिले की परिहार विधानसभा सीट से राजद ने इस बार पूर्व मंत्री डॉ. रामचंद्र पूर्वे की बहू, डॉ. स्मिता पूर्वे को उम्मीदवार बनाया है. वहीं, रितु जायसवाल कई वर्षों से इसी क्षेत्र में सक्रिय हैं और लगातार सोशल मीडिया के जरिये जनता से जुड़ी रही हैं. अब टिकट न मिलने से उनकी नाराजगी ने राजद की अंदरूनी राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है.

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Bihar Election 2025: टिकट बंटवारे पर कांग्रेस में बगावत, नेताओं का फूटा गुस्सा—प्रभारी पर ‘गद्दारी’ का आरोप

टिकट बंटवारे पर कांग्रेस में बगावत
टिकट बंटवारे पर कांग्रेस में बगावत

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सतह पर आ गई है. टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर ऐसा असंतोष पनपा है कि अब यह सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस तक पहुंच गया है. शनिवार को पटना में कांग्रेस के कई मौजूदा और पूर्व विधायकों ने एक साथ प्रेस के सामने आकर प्रदेश प्रभारी, अध्यक्ष और विधायक दल के नेता पर ‘धोखेबाजी’ और ‘पक्षपात’ के आरोप जड़ दिए.

बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि टिकट वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह गुप्त और मनमानी तरीके से चलाई गई. किसी से राय नहीं ली गई और न ही पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का सम्मान किया गया. इस माहौल में कांग्रेस चुनावी मैदान में दस सीटें भी नहीं जीत पाएगी — यह बात पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता और रिसर्च विभाग के चेयरमैन आनंद माधव ने कही, जिन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही अपने सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया.

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राहुल गांधी को गुमराह करने का आरोप

खगड़िया के विधायक छत्रपति यादव ने प्रदेश प्रभारी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने पिछले छह महीनों में “गंदी राजनीति” की और राहुल गांधी को लगातार गलत सूचनाएं दीं. उनके मुताबिक, इस बार टिकट बंटवारे की प्रक्रिया इतनी उलझी हुई रही कि पहले चुनाव चिन्ह बांटे गए और बाद में प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी गई — जो कांग्रेस के इतिहास में पहली बार हुआ.

एकजुटता पर संकट, असंतोष सड़कों तक पहुंचा

बिहार कांग्रेस में उठी यह बगावत अब केवल संगठन के भीतर तक सीमित नहीं रही. नाराज नेताओं ने प्रेस के जरिए अपने विरोध को सार्वजनिक कर दिया है. इनका कहना है कि टिकट बंटवारे ने न सिर्फ पार्टी की साख को नुकसान पहुंचाया है बल्कि राहुल गांधी तक को भ्रमित कर दिया गया है. इससे कांग्रेस की एकजुटता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है और चुनाव से ठीक पहले संगठन में अविश्वास की दीवार खड़ी हो गई है.

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Video: अश्विनी चौबे के बेटे दूसरों की गोटी काटने चले थे, अपनी चाल बिगाड़ बैठे, भाजपा के आगे झुके — किसने बदला खेल?

Arjit Shashwat Chaubey
Arjit Shashwat Chaubey

Bhagalpur Election 2025 : पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत चौबे ने शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया. वे सीएमएस स्कूल से समर्थकों की भारी भीड़ के साथ ढोल-नगाड़ों के बीच नामांकन के लिए निकले थे. समर्थक “अर्जित चौबे जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए एसडीओ कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे. माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा था. लेकिन कार्यालय के गेट पर पहुंचते ही परिदृश्य अचानक बदल गया.

अर्जित को पिता अश्विनी चौबे का फोन आया, जिसमें उन्हें नामांकन से मना कर दिया गया. कुछ क्षण की बातचीत के बाद अर्जित ने बिना नामांकन किए ही वापसी का फैसला ले लिया. समर्थक हैरान रह गए, लेकिन उन्होंने पिता के आदेश को सर्वोपरि बताते हुए चुप्पी साध ली.

नामांकन जुलूस में दिखा जोर, लेकिन अंत में लौटे खाली हाथ

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शनिवार की दोपहर से ही अर्जित शाश्वत का जुलूस शहर की चर्चा बना हुआ था. समर्थक झंडा-बैनर लेकर सीएमएस स्कूल से एसडीओ कार्यालय तक मार्च कर रहे थे. भारी भीड़ में महिलाएं भी शामिल थीं. पूरा माहौल शक्ति प्रदर्शन जैसा लग रहा था. कयास लगाया जा रहा था कि अर्जित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरेंगे, जिससे भाजपा को नुकसान हो सकता है. लेकिन गेट पर पहुंचे ही पिता के आदेश ने सारी दिशा बदल दी. फोन कटते ही अर्जित ने समर्थकों से कहा कि अब वे नामांकन नहीं करेंगे.

‘संघ और भाजपा के सच्चे सिपाही हैं अर्जित’

नामांकन रद्द करने के बाद अर्जित शाश्वत चौबे ने मीडिया से कहा कि वे भाजपा और संघ के अनुशासित कार्यकर्ता हैं. उन्होंने कहा, “माता-पिता और पार्टी नेतृत्व के आदेश पर मैंने नामांकन नहीं कराया है. मेरा कर्तव्य है संगठन की मर्यादा का पालन करना. अब मैं भागलपुर में एनडीए प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने में जुट जाऊंगा.” अर्जित ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि कमल खिलाना है. उन्होंने इसे परिवार और संगठन दोनों की भावनाओं का सम्मान बताया.

पिता अश्विनी चौबे ने दिया सख्त संदेश

सूत्रों के अनुसार, अर्जित जब नामांकन के लिए निकले थे, तभी दिल्ली और पटना में भाजपा नेतृत्व की नजर उन पर थी. अश्विनी चौबे से सीधे संपर्क किया गया और उन्होंने बेटे को सख्त निर्देश दिया कि वे पार्टी लाइन से बाहर जाकर कोई कदम न उठाएं. बताया जाता है कि यही वह फोन कॉल था जिसने पूरे घटनाक्रम को मोड़ दिया. भाजपा के अंदर इसे अनुशासन की जीत माना जा रहा है.

पहले से बने हुए थे संकेत, जब पांडेय को मिला टिकट

भागलपुर सीट से भाजपा ने रोहित पांडेय को टिकट दिया था. पांडेय टिकट लेने के बाद सबसे पहले अश्विनी चौबे से मिले और उनका आशीर्वाद लिया था. उसी समय चौबे ने भरोसा दिया था कि वे उनके प्रचार में शामिल होंगे. इसके बाद भाजपा ने उन्हें स्टार प्रचारकों की सूची में डाल दिया. राजनीतिक गलियारों में तभी यह अटकल तेज हो गई थी कि अर्जित को नामांकन से रोका जा सकता है. आखिरकार, शनिवार को वही हुआ — पिता और पार्टी दोनों के आदेश के आगे अर्जित झुक गए.

राजनीतिक संदेश: अनुशासन पर भाजपा की मोहर

अर्जित का यह कदम भाजपा के लिए राहत की खबर माना जा रहा है. निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उनके मैदान में उतरने से पार्टी को नुकसान की आशंका थी. लेकिन नामांकन से इनकार कर उन्होंने यह संदेश दिया कि संगठन उनके लिए सर्वोपरि है. स्थानीय स्तर पर उनके समर्थक भले निराश हैं, लेकिन भाजपा खेमे में इसे “बागी से वापसी” के रूप में देखा जा रहा है.

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