US Iran Conflict : अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान छेड़ा, जिसे Operation Epic Fury और Operation Roaring Lion नाम दिया गया. इस संयुक्त कार्रवाई में ईरान के कई रणनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. रिपोर्टों के अनुसार, हमलों का फोकस सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और आईआरजीसी से जुड़े परिसरों पर भी रहा. इस ऑपरेशन की खास बात यह रही कि पारंपरिक हथियारों के साथ अत्याधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का भी इस्तेमाल किया गया.
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Last night, U.S. B-2 stealth bombers, armed with 2,000 lb. bombs, struck Iran’s hardened ballistic missile facilities. No nation should ever doubt America's resolve. pic.twitter.com/6JpG73lHYW
— U.S. Central Command (@CENTCOM) March 1, 2026
रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने अभियान के दौरान अमेरिकी एआई कंपनी Anthropic की सेवाओं का सहारा लिया. कंपनी के ‘Claude’ टूल के उपयोग की भी चर्चा है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस तकनीक की वास्तविक भूमिका क्या रही. न पेंटागन और न ही कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की है. दिलचस्प तथ्य यह है कि हाल में अमेरिका ने सप्लाई चेन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों के संदर्भ में Anthropic पर सवाल उठाए थे, लेकिन इसके बावजूद उसकी तकनीक का सैन्य कार्रवाई में प्रयोग चर्चा का विषय बन गया.
आसमान से सटीक वार, स्टील्थ बेड़े की तैनाती
हवाई हमलों में अमेरिका ने अपनी उन्नत वायु शक्ति का प्रदर्शन किया. लंबी दूरी तय कर गहरे और सुरक्षित ठिकानों पर प्रहार करने में सक्षम B-2 Spirit बॉम्बरों को सीधे अमेरिकी क्षेत्र से उड़ाया गया और ईरान के भूमिगत मिसाइल ठिकानों पर करीब 2000 पाउंड वजनी बम गिराए गए. इससे पहले जून में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले के दौरान भी इन विमानों का इस्तेमाल हुआ था.
USS Gerald R. Ford (CVN 78), the world’s largest aircraft carrier, is in the fight with U.S. forces supporting Operation Epic Fury – launching aircraft from the Eastern Mediterranean Sea. pic.twitter.com/olehL4htW4
— U.S. Central Command (@CENTCOM) March 2, 2026
इनके साथ F-35 Lightning II, F-22 Raptor, F/A-18 Super Hornet और F-16 Fighting Falcon जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भी शामिल रहे. जमीनी लक्ष्यों को ध्वस्त करने के लिए A-10 Thunderbolt II का उपयोग किया गया. वहीं दुश्मन की रडार और कम्युनिकेशन प्रणाली को बाधित करने के लिए EA-18G Growler तैनात किया गया.
ड्रोन, निगरानी और रक्षा कवच सक्रिय
हमले के दौरान निगरानी और टारगेटिंग के लिए ड्रोन नेटवर्क सक्रिय रखा गया. MQ-9 Reaper और LUCAS ड्रोन की मदद से लंबी अवधि की निगरानी और सटीक स्ट्राइक संभव हुई. खुफिया सूचनाएं जुटाने के लिए RC-135 Rivet Joint तथा समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए P-8 Poseidon तैनात रहे.
हवाई क्षेत्र की कमान संभालने के लिए E-3 Sentry (AWACS) विमानों को सक्रिय किया गया. रक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए THAAD, Patriot missile system और M142 HIMARS जैसे सिस्टम तैनात रहे.
रिपोर्टों के अनुसार, आत्मघाती ड्रोन का भी उपयोग किया गया, जो लक्ष्य से टकराकर विस्फोट करते हैं. United States Central Command ने पहली बार इस तरह के एकतरफा हमलावर ड्रोन के इस्तेमाल की पुष्टि की है.
U.S. forces are taking bold action to eliminate imminent threats posed by the Iranian regime. Strikes continue. pic.twitter.com/z1x07D7APl
— U.S. Central Command (@CENTCOM) March 2, 2026
समुद्र से मिसाइल दागने तक, नौसेना की रही सक्रियता
समुद्री मोर्चे पर अमेरिकी नौसेना ने परमाणु ऊर्जा से संचालित विमानवाहक पोत और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात किए. लंबी दूरी तक सटीक प्रहार के लिए युद्धपोतों से Tomahawk cruise missile दागी गईं. ये मिसाइलें करीब 1000 मील दूर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम हैं.
जमीन पर तैनात बलों ने HIMARS रॉकेट सिस्टम से त्वरित हमला कर अपनी स्थिति बदलने की रणनीति अपनाई. वहीं बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों को रोकने के लिए Patriot और THAAD प्रणालियों को सक्रिय रखा गया, जिससे खाड़ी क्षेत्र में हवाई सुरक्षा और मजबूत हुई.
हमले के बाद वार्ता के मिल रहे संकेत
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी सरकारी मीडिया ने पुष्टि की कि इस सैन्य कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई. दावा किया गया कि उनके परिवार के कुछ सदस्य भी हमले में मारे गए. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरानी नौसेना के नौ जहाज नष्ट कर दिए गए और उसका मुख्यालय बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है.
इसी बीच, ईरान में उभर रहा संभावित नया नेतृत्व अमेरिका से बातचीत की इच्छा जता रहा है. व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ट्रंप वार्ता के लिए तैयार हैं, हालांकि सैन्य अभियान फिलहाल जारी रहेगा. ‘The Atlantic’ को दिए इंटरव्यू में भी ट्रंप ने नए नेतृत्व से संवाद की योजना का उल्लेख किया है.
पश्चिम एशिया में इस कार्रवाई के बाद क्षेत्रीय समीकरण, सुरक्षा ढांचा और भविष्य की रणनीतिक दिशा को लेकर नई चर्चा तेज हो गई है.
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