Earthquake : पश्चिम बंगाल में एक बार फिर धरती कांपी है. शुक्रवार सुबह दार्जिलिंग में हल्की तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जबकि दोपहर में आए तेज झटकों ने राजधानी कोलकाता तक लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया.
सुबह दार्जिलिंग में हलचल, दोपहर में तेज कंपन
जानकारी के अनुसार, सुबह करीब चार बजे दार्जिलिंग क्षेत्र में 2.5 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया. अधिकतर लोग उस समय सो रहे थे, इसलिए घबराहट की स्थिति नहीं बनी. हालांकि जो लोग जाग रहे थे, उन्होंने हल्का कंपन महसूस किया.
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दोपहर 1 बजकर 22 मिनट पर आए दूसरे झटके ज्यादा तीव्र थे. इसकी तीव्रता 5.6 मापी गई और इसका केंद्र ढाका क्षेत्र बताया जा रहा है. इस झटके का असर कोलकाता तक देखा गया. कई इलाकों में लोग एहतियातन घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए.
सिक्किम में लगातार सक्रियता से बढ़ी चिंता
पड़ोसी राज्य सिक्किम में भी भूकंपीय गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं. गुरुवार को मंगन क्षेत्र में 3.9 और 3.7 तीव्रता के साथ कुल 16 झटके दर्ज किए गए. इससे पहले फरवरी की शुरुआत में चार दिनों के भीतर 40 से अधिक छोटे-बड़े झटके महसूस किए गए थे.
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार आ रहे छोटे भूकंप क्षेत्र की भूगर्भीय हलचल का संकेत हैं. हिमालयी पट्टी पहले से ही संवेदनशील मानी जाती है. ऐसे में बार-बार दर्ज हो रही कंपन की घटनाओं ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है.
क्या बड़े भूकंप का संकेत?
भूवैज्ञानिकों का कहना है कि छोटे झटके कई बार बड़े भूकंप से पहले की गतिविधि भी हो सकते हैं, हालांकि हर बार ऐसा हो यह जरूरी नहीं. 2011 में सिक्किम में 6.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसमें व्यापक नुकसान हुआ था. उसी पृष्ठभूमि में मौजूदा घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जा रहा है.
फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन उत्तर बंगाल और सिक्किम में लगातार हो रही भूकंपीय गतिविधियों से लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है. प्रशासन हालात पर नजर रखे हुए है.
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