Kolkata Railway : पूर्व रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपने कारखानों और रोलिंग स्टॉक रखरखाव व्यवस्था में उल्लेखनीय प्रदर्शन दर्ज किया है. लिलुआ, कांचरापाड़ा और जमालपुर कारखानों ने न केवल अपने-अपने वार्षिक लक्ष्य पूरे किए, बल्कि कई क्षेत्रों में तय लक्ष्य से बेहतर उत्पादन और ओवरहॉलिंग का आंकड़ा भी हासिल किया. कोच, वैगन और इलेक्ट्रिक इंजनों की आवधिक ओवरहॉलिंग से लेकर नए वैगनों के निर्माण और आधुनिक रेक परिवर्तन तक, पूर्व रेलवे ने बीते वित्त वर्ष में कई अहम उपलब्धियां अपने नाम की हैं. रेलवे प्रशासन का कहना है कि इन उपलब्धियों से यात्रियों की सुरक्षा, यात्रा सुविधा और रेलवे परिचालन की विश्वसनीयता को मजबूती मिली है.
लिलुआ, कांचरापाड़ा और जमालपुर कारखानों का दमदार प्रदर्शन
पूर्व रेलवे के लिलुआ कारखाने ने वित्त वर्ष 2025-26 में कोचों की आवधिक ओवरहॉलिंग में शानदार प्रदर्शन किया. यहां ICF और LHB रेक सहित कोचों की POH का वार्षिक लक्ष्य 1860 रखा गया था, जबकि वास्तविक उपलब्धि 2020 रही. इस तरह लिलुआ कारखाने ने तय लक्ष्य से आगे निकलकर अपनी कार्यक्षमता साबित की.
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कांचरापाड़ा कारखाने ने भी कई श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया. यहां इलेक्ट्रिक इंजनों की आवधिक ओवरहॉलिंग का लक्ष्य 77 था, जबकि 81 इंजनों की ओवरहॉलिंग की गई. इसी तरह ICF कोचों की POH 420 के लक्ष्य के मुकाबले 431 रही. वहीं EMU और MEMU कोचों की ओवरहॉलिंग का लक्ष्य 1892 था, जिसके विरुद्ध 1902 कोचों का कार्य पूरा किया गया.
जमालपुर कारखाने ने भी वित्त वर्ष 2025-26 में 140 टन क्षमता वाले 12 क्रेन का निर्माण कर अपना वार्षिक लक्ष्य हासिल किया. इसके अलावा इस कारखाने ने माल वैगन निर्माण के क्षेत्र में भी नई उपलब्धियां दर्ज कीं.
नए वैगन निर्माण और आधुनिक रेक पर जोर
जमालपुर कारखाने ने 2025-26 में पहली बार BTPNM1 वैगनों का निर्माण भी किया. सितंबर 2025 और दिसंबर 2025 में यहां से क्रमशः 50 और 51 वैगनों वाले दो पूर्ण रेक रवाना किए गए. इसके अलावा नवंबर 2025 में इस कारखाने ने पहली बार फ्लैट बहुउद्देश्यीय वैगन का निर्माण किया. फरवरी 2026 में गार्ड वैन के साथ 46 फ्लैट बहुउद्देश्यीय वैगनों का पहला पूर्ण रेक सफलतापूर्वक भेजा गया.
पूर्व रेलवे ने इस दौरान 16 ट्रेनों के 22 रेक को ICF से LHB रेक में सफलतापूर्वक परिवर्तित किया. रेलवे के अनुसार, LHB रेक यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिहाज से बेहतर माने जाते हैं. इनमें अधिक आवास क्षमता, आधुनिक फिटिंग और बेहतर एर्गोनोमिक डिजाइन उपलब्ध होता है, जिससे यात्रा अनुभव अधिक आरामदायक बनता है.
वंदे भारत, एसी ईएमयू और ऊर्जा दक्षता पर भी फोकस
पूर्व रेलवे पर पहले से कई वंदे भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं. इसी को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने लिलुआ कारखाने को वंदे भारत ट्रेन सेटों की ओवरहॉलिंग के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. यह जिम्मेदारी केवल पूर्व रेलवे तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण पूर्व रेलवे, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और उत्तर पूर्व सीमांत रेलवे के वंदे भारत रेक की ओवरहॉलिंग भी यहां की जाएगी.
पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में भी पूर्व रेलवे ने उल्लेखनीय कदम उठाए हैं. रेलवे ने 23 थ्री-फेज ईएमयू रेक और 3 थ्री-फेज मेमु रेक को सफलतापूर्वक चालू किया है. इसके साथ ही सियालदह मंडल में 2 एसी ईएमयू रेक भी शुरू किए गए हैं, जिनके माध्यम से 8 एसी ईएमयू सेवाएं दी जा रही हैं. यात्रियों के बीच इन सेवाओं को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है.
महाप्रबंधक ने कर्मचारियों की सराहना की
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर ने कारखाना और रोलिंग स्टॉक विंग के अधिकारियों तथा कर्मचारियों को उनके बेहतर प्रदर्शन के लिए बधाई दी है. उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों से न केवल ब्रेकडाउन समय में कमी आई है, बल्कि पूर्व रेलवे को एक अधिक आधुनिक, सक्षम और यात्री-केंद्रित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के रूप में विकसित करने में भी मदद मिली है.
रेलवे प्रशासन का मानना है कि बीते वित्त वर्ष की उपलब्धियां आने वाले समय में पूर्व रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान को और मजबूती देंगी.
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