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पश्चिम बंगाल के मालदा में भारी उपद्रव: न्यायाधीशों के काफिले पर हमला, 100 गाड़ियां क्षतिग्रस्त

Bengal Election: पश्चिम बंगाल के मालदा में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में उग्र भीड़ ने न्यायाधीशों के काफिले पर हमला कर दिया. इस दौरान 100 से अधिक गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने का प्रयास हुआ. चुनाव आयोग ने इस गंभीर सुरक्षा चूक पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.

Bengal Election: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम काटे जाने पर उपजा जन आक्रोश हिंसक हो गया है. प्रदर्शनकारियों ने सात न्यायाधीशों के काफिले को निशाना बनाते हुए उन पर पथराव किया, जिसमें लगभग 100 वाहनों के शीशे टूट गए. आरोप है कि भीड़ ने न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने आधी रात को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उन्हें सुरक्षित निकाला. समाचार एजेंसी पीटीआई द्वारा जारी वीडियो में प्रदर्शनकारियों को पुलिस वाहन पर लाठियां और ईंटें फेंकते हुए देखा जा सकता है. इस हमले में जजों की गाड़ियों की सीटों पर कांच के टुकड़े बिखरे मिले हैं, जिसे देखते हुए चुनाव आयोग ने प्रशासन से तत्काल रिपोर्ट मांगी है.

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वोटर लिस्ट से नाम हटने पर भड़का गुस्सा

विवाद की जड़ चुनाव आयोग द्वारा जारी की जा रही सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट है. सूत्रों के मुताबिक, अब तक करीब 22 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं, जिसके विरोध में मालदा के कई इलाकों में बुधवार दोपहर से ही सड़कें जाम कर दी गई थीं. कालियाचक में स्थिति तब बिगड़ गई जब सात न्यायिक अधिकारी प्रदर्शनकारियों के बीच फंस गए. इस संकट की जानकारी मिलते ही उच्च न्यायालय और चुनाव आयोग सक्रिय हुए. भारी पुलिस बल ने आधी रात को घेराबंदी तोड़कर अधिकारियों को निकाला, लेकिन इसके बाद भी क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है.

अधर में लटका न्यायाधिकरण का कामकाज

चुनाव आयोग ने घोषणा की थी कि जिन लोगों के नाम सूची से गायब हैं, वे अपनी शिकायत एसआईआर ट्रिब्यूनल में दर्ज करा सकते हैं. हालांकि, गुरुवार से शुरू होने वाला यह काम अब तक ठप है. बताया जा रहा है कि आयोग और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के बीच कुछ तकनीकी सवालों पर सहमति नहीं बन पाई है, जिसके कारण ट्रिब्यूनल की बैठक स्थगित कर दी गई. इस प्रशासनिक देरी ने प्रदर्शनकारियों के गुस्से में घी डालने का काम किया है, जिससे न्यायिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप तेज

इस घटना के बाद बंगाल की सियासत गरमा गई है. भाजपा सांसद सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि न्यायाधीशों को बंधक बनाना और उन पर हमला करना तृणमूल कांग्रेस की एक गहरी साजिश है. उन्होंने महिला न्यायाधीशों के साथ दुर्व्यवहार के प्रयास की भी निंदा की. वहीं, टीएमसी नेता कुणाल घोष ने हिंसा का समर्थन न करने की बात कहते हुए सारा दोष चुनाव आयोग पर मढ़ दिया. उन्होंने कहा कि आयोग की गलत नीतियों और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की वजह से ही आम जनता का धैर्य जवाब दे गया है, इसलिए जिम्मेदारी भी आयोग को ही लेनी चाहिए.

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सोनी कुमारी
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