Bhagalpur Rail News : आज भागलपुर में ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन (ERMU) की शाखा द्वारा All India Railwaymen’s Federation (AIRF) एवं ERMU के आह्वान पर आयोजित “रेल बचाओ – देश बचाओ” देशव्यापी अभियान के अंतर्गत कोचिंग डिपो में मानव श्रृंखला बनाकर रैली और प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के रेलकर्मियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपनी एकता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया.
शाखा सचिव ने मजदूर विरोधी नीतियों पर उठाए सवाल
सभा को संबोधित करते हुए ERMU शाखा के सचिव चंदन कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से रेलवे और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के प्रति सरकार की नीतियाँ निराशाजनक रही हैं और ये मजदूर-विरोधी साबित हो रही हैं. उन्होंने विशेष रूप से निजीकरण, आउटसोर्सिंग और श्रम कानूनों में हुए संशोधनों पर चिंता जताई. चंदन कुमार ने कहा कि नई चार श्रम संहिताएँ – वेतन संहिता (2019), औद्योगिक संबंध संहिता (2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य-परिस्थिति संहिता (2020) – श्रमिक हितों के खिलाफ हैं.
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उन्होंने बताया कि इन संहिताओं के माध्यम से हड़ताल के अधिकार को सीमित किया गया है, छंटनी और ठेका प्रथा को आसान बनाया गया है तथा ट्रेड यूनियनों की मान्यता के लिए 51% वोट की अनिवार्यता लागू की गई है, जिससे श्रमिक संगठनों की ताकत कमजोर हो रही है.
पेंशन, वेतन और भत्तों पर प्रमुख मांगें
शाखा सचिव ने नई पेंशन योजना (UPS) में सुधार कर पुरानी गारंटीकृत पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग की. इसके अलावा उन्होंने 8वें वेतन आयोग के शीघ्र गठन, 18 माह के लंबित महंगाई भत्ता (डी.ए.) का भुगतान और उत्पादन आधारित बोनस पर लगी सीलिंग हटाकर वास्तविक वेतन के आधार पर भुगतान सुनिश्चित करने की भी मांग रखी.
इस अवसर पर उन्होंने किलोमीटर भत्ते में 25% वृद्धि, GDCE का अविलंब आयोजन, रेलवे में रिक्त सभी स्वीकृत पदों पर नियमित बहाली, नए कार्यों के अनुरूप नए पदों का सृजन और गोद्दा यूनिट के लिए नए स्टाफ पदों के सृजन की भी मांग की.
पदाधिकारी और रेलकर्मी उपस्थित
कार्यक्रम में कार्यकारिणी अध्यक्ष प्रबल कुमार, सहायक सचिव आर. के. पोद्दार, संगठन सचिव अमृतेश झा एवं एस. के. सिंह, कोषाध्यक्ष शिरोमणि कुमार, अजय सिंह, रोहित कुमार, अजीत सिंह, मो. आशर, जितेन्द्र कुमार, उमेश कुमार सहित अन्य कई पदाधिकारी और रेलकर्मी उपस्थित थे.
यूनियन की चेतावनी
अंत में यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार श्रमिक हितों की अनदेखी करती रही तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
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