Railway Pension Fraud : एक शांत मंगलवार की दोपहर 68 वर्षीय सेवानिवृत्त वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर श्री दास के लिए अचानक तनाव और भय में बदल गई, जब एक संदिग्ध फोन कॉल ने उनकी पेंशन पर संकट का खतरा खड़ा कर दिया. कॉल करने वाले ने खुद को रेलवे लेखा विभाग का अधिकारी बताते हुए तुरंत ओटीपी साझा करने का दबाव बनाया. अपनी नियमित आय को लेकर चिंतित श्री दास कुछ पल के लिए असमंजस में पड़ गए, लेकिन उनकी सूझबूझ और सतर्कता ने उन्हें एक बड़े साइबर ठगी के जाल में फंसने से बचा लिया. यह घटना अब अन्य पेंशनभोगियों के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आई है.
पेशेवर अंदाज में रचा गया ठगी का जाल
फोन करने वाले की आवाज़ पूरी तरह पेशेवर और अधिकारपूर्ण थी, जिससे उसकी बातों पर आसानी से भरोसा किया जा सकता था. उसने श्री दास को बताया कि उनके पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) का विवरण पुराना हो गया है और यदि वे तुरंत उनके मोबाइल पर भेजा गया ओटीपी साझा नहीं करते हैं, तो उनकी पेंशन अगले ही दिन से रोक दी जाएगी. इस तरह की भाषा और तात्कालिकता का दबाव बनाकर जालसाज अक्सर लोगों को घबराहट में गलत निर्णय लेने पर मजबूर करते हैं.
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मानसिक दबाव बनाकर जानकारी हासिल करने की कोशिश
जालसाज ने बातचीत के दौरान लगातार जल्दी करने का दबाव बनाया और खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए डर का माहौल तैयार किया. श्री दास अपनी मासिक पेंशन पर निर्भर होने के कारण चिंतित हो गए और लगभग ओटीपी साझा करने ही वाले थे. लेकिन जैसे ही कॉल करने वाला आक्रामक और असहज तरीके से बात करने लगा, उन्हें शक हुआ और उन्होंने तुरंत फोन काट दिया. यह एक ऐसा क्षण था जिसने उन्हें संभावित आर्थिक नुकसान से बचा लिया.
सूझबूझ और सत्यापन से टला बड़ा नुकसान
फोन काटने के बाद श्री दास ने बिना देर किए अपने पूर्व रेलवे कार्यालय से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी. वहां से स्पष्ट कर दिया गया कि इस तरह का कोई सत्यापन कॉल नहीं किया जाता और यह पूरी तरह से साइबर ठगी का प्रयास था. समय रहते की गई इस पुष्टि ने उन्हें न केवल सुरक्षित रखा, बल्कि यह भी साबित किया कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय सत्यापन करना कितना जरूरी है.
बढ़ रहे हैं ऐसे साइबर ठगी के मामले
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में इस तरह के फर्जी कॉल्स के मामलों में तेजी आई है, जहां जालसाज खुद को रेलवे, बैंक या सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर पेंशनभोगियों और आम लोगों को निशाना बना रहे हैं. वे विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को टारगेट करते हैं, क्योंकि वे तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर अधिक चिंतित और संवेदनशील होते हैं.
पूर्व रेलवे की अपील: सतर्क रहें पेंशनभोगी
पूर्व रेलवे ने अपने सभी पेंशनभोगियों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी कॉल से सतर्क रहें, जिसमें व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी मांगा जाए. विभाग ने साफ किया है कि न तो रेलवे और न ही कोई बैंक कभी भी फोन पर ओटीपी मांगता है. किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने से पहले संबंधित कार्यालय से सत्यापन करना अनिवार्य है.
जरूरी सावधानियां जो हर पेंशनभोगी को अपनानी चाहिए
पेंशनभोगियों को अपने पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) को सुरक्षित रखना चाहिए और उसकी जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए. इसके अलावा, अपने वर्तमान मोबाइल नंबर को लेखा कार्यालय के पेंशन अनुभाग में अपडेट रखना भी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी आधिकारिक सूचना का सही तरीके से आदान-प्रदान हो सके.
हर वर्ष नवंबर माह में जीवन प्रमाण पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होता है. यदि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की कठिनाई आती है, तो पेंशनभोगियों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा करने के बजाय अपने बैंक या संबंधित कार्यालय में जाकर सहायता लें.
अधिकारियों की चेतावनी और संदेश
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शिबराम माझि ने कहा कि पेंशनभोगियों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक देश की सेवा की है, उनकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने सभी से आग्रह किया कि अनचाहे फोन कॉल्स से सावधान रहें और किसी भी स्थिति में अपनी वित्तीय जानकारी, ओटीपी या बैंक संबंधी विवरण साझा न करें.
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि किसी को इस तरह के कॉल्स प्राप्त होते हैं, तो वे तुरंत इसकी सूचना अपने नजदीकी रेलवे कार्यालय या साइबर क्राइम हेल्पलाइन को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और अन्य लोगों को भी ऐसे जाल से बचाया जा सके.
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