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Vidyapati Smriti Parv: रांची के हरमू मैदान में झारखंड मैथिली मंच की ओर से चल रहे त्रिदिवसीय ‘विद्यापति स्मृति पर्व’ के दूसरे दिन कार्यक्रम ने सांस्कृतिक और बौद्धिक दोनों ही स्तरों पर खास छाप छोड़ी. आयोजन के दौरान एक ओर जहां पारंपरिक प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत किया, वहीं दूसरी ओर मैथिली भाषा और समाज से जुड़े मुद्दों पर गंभीर विमर्श भी हुआ.
पारंपरिक विधि से कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत Vidyapati के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई. इसके बाद भगवती वंदना और राष्ट्रगान के बीच दीप प्रज्वलन कर आयोजन का विधिवत उद्घाटन हुआ. मंच के अध्यक्ष बिनय कुमार झा ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि महासचिव जयंत कुमार झा ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए मंच की गतिविधियों और मैथिली समाज से जुड़ी प्रमुख मांगों को सामने रखा.
सांस्कृतिक संध्या में बिखरा संगीत का रंग
दूसरे सत्र में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिल्ली की गायिका कुमकुम मिश्र और सौम्या मिश्र ने अपने मैथिली गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. दरभंगा के राजनीति रंजन मिश्र, मधुबनी के सोनू हिमांशु और जमशेदपुर के मिथिलेश कुमार मिश्र की प्रस्तुतियों ने भी माहौल को जीवंत बनाए रखा. इसके साथ ही डॉ. उज्वल राय के शास्त्रीय और सुगम संगीत ने पूरे आयोजन को खास ऊंचाई दी.
भाषा और परंपरा को आगे बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम का संचालन भारतेंदु कुमार झा ने किया, जबकि समापन के मौके पर प्रेम चंद्र झा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया. पूरे आयोजन के दौरान मैथिली संस्कृति की झलक पाग और चादर के साथ स्पष्ट रूप से देखने को मिली. बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और मैथिल परिवार इस आयोजन में शामिल हुए और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति एकजुटता का संदेश दिया.
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