Iran Hangs Wrestler: ईरान में एक बार फिर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है. सरकारी मीडिया और मानवाधिकार समूहों की जानकारी के मुताबिक, 19 साल के युवा फ्रीस्टाइल पहलवान सालेह मोहम्मदी को गुरुवार को कोम शहर में दो अन्य लोगों के साथ सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई. इन तीनों को जनवरी 2026 में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दो पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था. गिरफ्तारी के बाद उन पर ‘मोहारेबेह’ यानी ईश्वर के खिलाफ दुश्मनी का आरोप लगाया गया, जिसे ईरानी कानून में बेहद गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए मौत की सजा तक का प्रावधान है. इस घटना ने न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों को लेकर नई बहस को जन्म दिया है.
🇮🇷 Iran publicly hanged 19-year-old champion wrestler Saleh Mohammadi after torturing him into a confession.
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) March 20, 2026
His crime: protesting.
Athletes represent everything a society should aspire to.
Executing them is the regime sending a bleak message.pic.twitter.com/JvFNDdkbAn https://t.co/qFoGiauRYl
कानूनी प्रक्रिया बनाम मानवाधिकारों के आरोप
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सजा से पहले सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया. उनके मुताबिक, आरोपियों को वकील उपलब्ध कराए गए और मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया, जहां से सजा को मंजूरी मिली. फांसी को सार्वजनिक रूप से अंजाम देना भी प्रशासन ने न्यायिक पारदर्शिता के तौर पर पेश किया है.
हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का दावा इससे बिल्कुल अलग है. उनका आरोप है कि आरोपियों से जबरन कबूलनामे कराए गए और ‘मोहारेबेह’ जैसे गंभीर आरोपों को स्वीकार करवाने के लिए यातना का इस्तेमाल किया गया. आलोचकों का कहना है कि इस तरह के मामलों में निष्पक्ष सुनवाई की कमी गंभीर चिंता का विषय है.
उभरते खिलाड़ी का अचानक अंत
सालेह मोहम्मदी को एक उभरते हुए फ्रीस्टाइल पहलवान के रूप में देखा जा रहा था. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी आगे बढ़ने की कोशिश में थे. लेकिन जनवरी 2026 में कोम में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनकी गिरफ्तारी ने उनके करियर और जीवन दोनों को अचानक खत्म कर दिया.
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, मोहम्मदी पर अपने दो साथियों—मेहदी गासेमी और सईद दावोदी—के साथ मिलकर प्रदर्शन के दौरान चाकू और तलवार से दो पुलिसकर्मियों की हत्या करने का आरोप था. अभियोजन पक्ष ने इसे हिंसक विद्रोह करार दिया, जबकि सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गंभीर खतरे के रूप में पेश किया.
‘मोहारेबेह’ कानून पर बढ़ती बहस
ईरानी कानून में ‘मोहारेबेह’ सबसे कठोर आरोपों में गिना जाता है. ऐतिहासिक रूप से इसका उपयोग सशस्त्र विद्रोह के मामलों में किया जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में इसे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में भी लागू किया जाने लगा है.
State media reported the executions of protesters Saleh Mohammadi, Saeed Davodi and Mehdi Ghasemi who were accused of participating in the murders of two policemen during protests in Qom on 8 January 2026. The executions were carried out “in the presence of a group of people in… pic.twitter.com/nL9LmLaclp
— Iran Human Rights (IHRNGO) (@IHRights) March 19, 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आरोप की व्यापक व्याख्या सरकार को ऐसे मामलों में सख्त सजा देने की छूट देती है, जहां राजनीतिक असहमति भी शामिल हो सकती है. इससे यह सवाल उठता है कि क्या इस कानून का इस्तेमाल केवल सुरक्षा के लिए हो रहा है या असहमति को दबाने के लिए भी किया जा रहा है.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आलोचना
इस घटना पर वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. Amnesty International और Iran Human Rights जैसे संगठनों ने इस फांसी की निंदा करते हुए कहा कि आरोपियों को निष्पक्ष न्याय नहीं मिला.
ईरानी मूल के कॉम्बैट एथलीट और मानवाधिकार कार्यकर्ता Nima Far ने इसे “स्पष्ट राजनीतिक हत्या” बताया. उनके अनुसार, यह कार्रवाई उस पैटर्न का हिस्सा है जिसमें विरोध की आवाज उठाने वालों और खिलाड़ियों को निशाना बनाया जाता है ताकि समाज में डर का माहौल बनाया जा सके. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों से हस्तक्षेप की अपील भी की.
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह घटना 2020 में ईरानी पहलवान Navid Afkari को दी गई फांसी की याद दिलाती है, जिस पर दुनिया भर में विरोध हुआ था. उस समय भी कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों, जिनमें Donald Trump शामिल थे, ने सजा रोकने की अपील की थी, लेकिन उसे लागू कर दिया गया था.
ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन बने सत्ता के लिए बड़ी चुनौती
जनवरी 2026 में ईरान के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इनका कारण आर्थिक संकट, गिरती मुद्रा और शासन के खिलाफ बढ़ता असंतोष बताया गया. ये प्रदर्शन Ali Khamenei के नेतृत्व वाली व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती के रूप में देखे गए.
रिपोर्टों के अनुसार, इन प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हाल की फांसियां उसी दमनात्मक कार्रवाई की कड़ी हैं, जो आगे भी जारी रह सकती है.
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