Middle East War: वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच संसद में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि भारत के पास इस समय 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है, जिसे बढ़ाकर करीब 65 लाख मीट्रिक टन करने की दिशा में काम जारी है. इसके अलावा, सार्वजनिक और निजी तेल कंपनियों के पास उपलब्ध अतिरिक्त स्टॉक अलग है, जो आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है.
#WATCH | On the West Asia conflict, Prime Minister Narendra Modi says, "… In the last 11 years, India has diversified its energy imports. Earlier, for energy needs like crude oil, LNG and LPG, imports were made from 27 countries, but today India imports energy from 41… pic.twitter.com/ElXZOR6b1C
— ANI (@ANI) March 23, 2026
इथेनॉल और विद्युतीकरण से आयात में बड़ी बचत
प्रधानमंत्री ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के कारण भारत हर साल लगभग 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल के आयात से बचत कर रहा है. इसके साथ ही रेलवे के तेजी से हुए विद्युतीकरण का भी बड़ा फायदा सामने आया है. उन्होंने बताया कि अगर रेलवे नेटवर्क का यह विस्तार नहीं हुआ होता, तो देश को हर साल करीब 180 करोड़ लीटर अतिरिक्त डीजल की जरूरत पड़ती.
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उन्होंने शहरी परिवहन में सुधार का जिक्र करते हुए कहा कि मेट्रो नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है. वर्ष 2014 में जहां यह नेटवर्क 250 किलोमीटर से भी कम था, वहीं अब यह बढ़कर 1100 किलोमीटर से अधिक हो चुका है, जिससे ऊर्जा खपत के वैकल्पिक साधन मजबूत हुए हैं.
ऊर्जा आयात के स्रोतों में आई विविधता
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों को भी व्यापक बनाया है. पहले देश 27 देशों से कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी आयात करता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है. इससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है और आपूर्ति अधिक सुरक्षित हुई है.
होर्मुज क्षेत्र से फंसे जहाज लौटे, सरकार सतर्क
प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भारत लगातार अपने वैश्विक साझेदारों के संपर्क में है. इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे कई भारतीय जहाज हाल ही में सुरक्षित देश लौट आए हैं.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खाड़ी क्षेत्र और आसपास के महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स पर सरकार की लगातार नजर बनी हुई है, ताकि तेल, गैस और उर्वरक जैसी जरूरी आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए.
आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार सक्रिय
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार विभिन्न देशों के आपूर्तिकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि जहां से संभव हो, वहां से ऊर्जा आपूर्ति जारी रखी जा सके. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश की रिफाइनिंग क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे आयातित कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता मजबूत हुई है.
अंतर-मंत्रालयी समूह कर रहा रोजाना समीक्षा
मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है, जो प्रतिदिन बैठक कर हालात की समीक्षा करता है. इस समूह के जरिए सभी जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है और तत्काल समाधान पर काम किया जाता है.
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि सरकार और उद्योग जगत के समन्वित प्रयासों से देश इस वैश्विक चुनौती का प्रभावी तरीके से सामना करेगा.
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