IRCTC Scam Case : आईआरसीटीसी घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव द्वारा दायर याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किया है. अदालत ने जांच एजेंसी से इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है. अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी.
इस प्रकरण की सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष हुई. अदालत ने स्पष्ट किया कि सीबीआई को तेजस्वी यादव की याचिका में उठाए गए सभी कानूनी बिंदुओं पर अपना जवाब दाखिल करना होगा. इसी तारीख को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर भी सुनवाई निर्धारित की गई है.
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख
तेजस्वी यादव ने निचली अदालत के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसके तहत उनके खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत आरोप तय किए गए थे. याचिका में कहा गया है कि आरोप तय करने का आदेश बिना ठोस आधार के पारित किया गया और यह कानून की स्थापित कसौटियों पर खरा नहीं उतरता.
तेजस्वी यादव की ओर से यह भी आग्रह किया गया है कि जब तक हाईकोर्ट इस मामले में अंतिम निर्णय न ले, तब तक निचली अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए. अदालत ने इस मांग पर सीबीआई से जवाब मांगा है.
अक्टूबर 2025 का आदेश बना विवाद की जड़
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2025 को निचली अदालत ने इस मामले में अहम आदेश पारित किया था. अदालत ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित कुल 11 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आरोप तय किए थे.
निचली अदालत का मत था कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि रेलवे मंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग किया गया और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निजी हितों को लाभ पहुंचाने के लिए हुआ. अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया आपराधिक कदाचार का मामला माना था.
बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
किन धाराओं में तय हुए थे आरोप
निचली अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत भी आरोप तय करने के निर्देश दिए थे. इसके अंतर्गत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप शामिल हैं.
इस आदेश के दायरे में लालू प्रसाद यादव के अलावा प्रदीप कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र कुमार अग्रवाल, राकेश कुमार गोगिया और विनोद कुमार अस्थाना को भी आरोपी बनाया गया था.
क्या है आईआरसीटीसी होटल आवंटन विवाद
यह मामला भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के अंतर्गत आने वाले दो होटलों के संचालन से जुड़ा हुआ है. जांच एजेंसी का आरोप है कि रेलवे मंत्रालय के तत्कालीन कार्यकाल में इन होटलों का संचालन नियमों को दरकिनार कर एक निजी कंपनी को सौंपा गया.
सीबीआई के अनुसार, इस निर्णय से संबंधित निजी पक्षों को आर्थिक लाभ पहुंचा और सरकारी हितों को नुकसान हुआ. एजेंसी का दावा है कि पूरा घटनाक्रम पूर्व नियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया.
कई नाम शामिल, ट्रायल पर टिकी निगाहें
निचली अदालत ने अपने आदेश में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव के साथ-साथ मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ भी धोखाधड़ी के आरोप तय करने के निर्देश दिए थे.
14 जनवरी की सुनवाई से तय होगी आगे की राह
अब यह मामला 14 जनवरी की सुनवाई पर आ टिका है. इस दिन दिल्ली हाईकोर्ट यह तय कर सकता है कि निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों पर रोक लगाई जाए या नहीं. साथ ही, लालू प्रसाद यादव की याचिका पर होने वाली सुनवाई भी इस पूरे प्रकरण की दिशा को प्रभावित कर सकती है.
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाईकोर्ट का अगला आदेश यह तय करेगा कि आईआरसीटीसी मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी और आरोपियों को कितनी कानूनी राहत मिल सकती है.
इसे भी पढ़ें-दिल्ली में लालू और यूरोप ट्रिप पर तेजस्वी; तेज प्रताप यादव पहुंचे राबड़ी आवास, क्या रही वजह?
इसे भी पढ़ें-बिहार में अब घर खरीदना सुरक्षित, रेरा दिखाएगा भरोसेमंद बिल्डर
इसे भी पढ़ें-नये साल में महंगी बिजली का लग सकता है झटका, 1 अप्रैल से बढ़ सकती हैं बिहार में दरें

