Bhagalpur News : भागलपुर जिले में संचालित सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए राउंड) के तहत फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है. पहले 14 दिनों में निर्धारित लक्ष्य के लगभग 75 प्रतिशत लाभार्थियों को घर-घर जाकर दवा खिलाई जा चुकी है.
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने बताया कि 10 से 27 फरवरी तक चलने वाले इस 17 दिवसीय अभियान में कुल 32,25,216 योग्य लोगों को एलबेंडाजोल और डीईसी की खुराक देने का लक्ष्य तय किया गया है. 10 से 24 फरवरी के बीच 24,16,527 लाभार्थियों को आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मियों ने सीधे निगरानी में दवा सेवन कराया.
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मेगा कैंप और जेलों में विशेष अभियान
अभियान को गति देने के लिए 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप आयोजित किया गया, जिसमें बूथ लगाकर करीब चार लाख लोगों को दवा दी गई. इसके अलावा 17 और 18 फरवरी को केंद्रीय जेल और महिला जेल में विशेष शिविर लगाकर 3,400 कैदियों, कर्मियों और अधिकारियों को दवा खिलाई गई.
अभियान के अंतिम तीन दिन 25 से 27 फरवरी तक स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बूथ बनाकर बच्चों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों को दवा दी जा रही है.
दवा पूरी तरह सुरक्षित, दुष्प्रभाव से घबराएं नहीं
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं. उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अर्थराइटिस या अन्य सामान्य बीमारियों से ग्रसित लोग भी इनका सेवन कर सकते हैं. दवा लेने के बाद हल्की मितली या चक्कर जैसे लक्षण दिखना सामान्य है और यह संकेत है कि शरीर में मौजूद परजीवी नष्ट हो रहे हैं.
प्रशासन ने प्रत्येक प्रखंड में रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात की है, ताकि दवा सेवन के बाद किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके.
फाइलेरिया: गंभीर लेकिन रोके जाने योग्य बीमारी
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरती कुमारी ने बताया कि फाइलेरिया, जिसे हाथीपांव रोग भी कहा जाता है, संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है. World Health Organization के अनुसार यह दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है.
यह रोग लिम्फैटिक सिस्टम को प्रभावित कर शरीर के अंगों में असामान्य सूजन पैदा करता है. हाइड्रोसील, लिम्फेडेमा और काइलूरिया जैसी स्थितियां इससे जुड़ी हैं, जिनके कारण रोगियों को सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार पांच वर्षों तक नियमित दवा सेवन करने से फाइलेरिया की आशंका लगभग समाप्त हो जाती है. हालांकि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, प्रसव के करीब पहुंच चुकी महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाती है.
अभियान की सफलता के लिए जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक स्वास्थ्य विभाग की टीमों के साथ सहयोगी संस्थाएं—World Health Organization, Piramal Swasthya और Centre for Advocacy and Research—सक्रिय भूमिका निभा रही हैं.
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