Bihar Government: बिहार सरकार ने राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए अहम फैसला लिया है. राज्य के 25 जिलों में नई चीनी मिलें स्थापित की जाएंगी. गन्ना उद्योग मंत्री संजय पासवान ने कहा कि सभी जिलों के डीएम को जमीन तलाशने और परियोजना की योजना बनाने के निर्देश दिए जा चुके हैं. इसका उद्देश्य न केवल किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना है, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर भी पैदा करना है.
इन जिलों में लगेगी मिलों की झड़ी
नई मिलों की योजना में शामिल जिलों में मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पटना, पूर्णिया, बेतिया और मोतिहारी जैसे बड़े जिले शामिल हैं. इसके अलावा, दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी में सहकारिता विभाग के माध्यम से काम की शुरुआत होगी. सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनाने की मंजूरी भी दे दी है. इससे यह साफ है कि यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि इसे ठोस रूप में लागू किया जाएगा.
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बंद पड़ी मिलों को फिर से चालू किया जाएगा
सरकार की योजना केवल नई मिलों तक सीमित नहीं है. उन इकाइयों पर भी ध्यान दिया जा रहा है जो लंबे समय से बंद हैं. मोतीपुर, बिहटा, मढ़ौरा और सासामूसा जैसी मिलों को फिर से चालू करने की तैयारी की जा रही है. समीक्षा बैठक में यह तय किया गया कि इन मिलों के संचालन में आने वाली बिजली की आपूर्ति और तकनीकी समस्याओं को जल्द से जल्द हल किया जाएगा, ताकि उत्पादन समय पर शुरू हो सके.
दूसरे राज्यों से मॉडल सीखकर बिहार में लागू होगा
बिहार को गन्ना उत्पादन में अग्रणी बनाने के लिए सरकार उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के मॉडल का अध्ययन करेगी. वहां की गन्ना नीतियों और तकनीक को देखकर इसे राज्य में लागू किया जाएगा. इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों को स्थानीय बाजार में अपनी फसल बेचने का अवसर मिलेगा.
रोजगार और किसान कल्याण दोनों का फायदा
नई और पुरानी मिलों के संचालन से किसानों को उचित मूल्य मिलेगा और युवाओं के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार पैदा होंगे. सरकार का यह कदम उद्योग, कृषि और रोजगार को जोड़ने का बड़ा प्रयास है. इसके जरिए बिहार का औद्योगिक और आर्थिक विकास भी मजबूत होगा और राज्य में निवेश का माहौल भी सुधरेगा.
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