Patna NEET Student Death Case: पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले में जांच अब और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केस में पोक्सो अधिनियम की धारा 4 और 6 को शामिल करते हुए आरोपों को और कड़ा कर दिया है. साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 64 समेत अन्य प्रासंगिक धाराएं भी जोड़ी गई हैं.
यह कार्रवाई दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 के तहत की गई है, जिसके बाद दिल्ली पुलिस के अधिकृत अधिकारी बिहार समेत अन्य संबंधित स्थानों पर अपनी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे.
जमानत याचिका पर 11 मार्च को होगी अगली सुनवाई
शंभू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर 2 मार्च को विस्तृत सुनवाई हुई. करीब डेढ़ घंटे चली बहस के बाद अदालत ने तत्काल कोई आदेश पारित नहीं किया और अगली तारीख 11 मार्च निर्धारित की.
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सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने प्रारंभिक जांच में लापरवाही का आरोप दोहराया. उनका कहना था कि मामले की शुरुआत से ही तथ्यों को गंभीरता से नहीं लिया गया. दूसरी ओर, CBI ने अदालत को लिखित रूप से अवगत कराया कि फिलहाल उन्हें मनीष रंजन की कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता नहीं है.
अदालत के तीखे सवालों के बाद बढ़ीं धाराएं
28 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में अदालत ने जांच एजेंसी से सीधे सवाल किए थे. न्यायालय ने पूछा था कि आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य क्या हैं और अब तक कौन-कौन से प्रमाण जुटाए गए हैं. साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि प्रारंभ में पोक्सो अधिनियम क्यों नहीं लगाया गया.
CBI ने शुरुआत में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया था. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी पर इतने गंभीर आरोप हैं, तो हिरासत की आवश्यकता पर स्पष्ट रुख क्यों नहीं अपनाया गया.
जांच का दायरा हुआ व्यापक
अब पोक्सो अधिनियम की धाराएं जोड़ने से केस की प्रकृति और गंभीर हो गई है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने और अभियोजन की दिशा अधिक स्पष्ट होगी.
दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के प्रावधान लागू होने के बाद जांच एजेंसी को राज्य की सीमाओं से परे भी कार्रवाई करने का अधिकार मिल गया है. इससे संभावित डिजिटल, फोरेंसिक और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल तेज होने की उम्मीद है.
11 मार्च पर टिकीं सबकी नजरें
अब इस मामले में अगली सुनवाई 11 मार्च को CBI के मजिस्ट्रेट कोर्ट में होगी. उस दिन अदालत जमानत याचिका पर फैसला देने के साथ-साथ जांच में हुए ताजा बदलावों पर भी विचार कर सकती है.
इस संवेदनशील मामले में जनमानस की निगाहें जांच की पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्रवाई पर टिकी हैं.
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