NIA Raid: बिहार के नालंदा जिले में सोमवार की सुबह अचानक सुरक्षा एजेंसियों की हलचल तेज हो गई. बिहारशरीफ में सुबह होने से पहले ही केंद्रीय और राज्य स्तरीय जांच टीमों ने संयुक्त रूप से कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू कर दी. सबसे ज्यादा हलचल लहेरी मोहल्ले में देखी गई, जहां चर्चित पीके गन हाउस जांच का प्रमुख केंद्र बना. इसके अलावा हथियारों के अवैध कारोबार से जुड़े संदिग्धों के कई अन्य ठिकानों पर भी टीमों ने एक साथ दबिश दी. तड़के हुई इस कार्रवाई ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी और शहर में हथियार तस्करी से जुड़े नेटवर्क को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं.
सुबह होने से पहले कई इलाकों में एक साथ हलचल
कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब शहर का बड़ा हिस्सा अभी जागा भी नहीं था. बिहारशरीफ के लहेरी इलाके में जांच एजेंसियों की टीमों ने पहुंचकर इलाके को घेर लिया और संबंधित स्थानों की जांच शुरू कर दी. अचानक बढ़ी सुरक्षा गतिविधि को देखकर आसपास के लोग भी घरों से बाहर निकलने लगे और पूरे मोहल्ले में हलचल का माहौल बन गया.
इसी क्रम में नालंदा के अन्य हिस्सों में भी एक साथ छापेमारी की गई. मिर्जापुर गांव और राममूर्ति नगर जैसे क्षेत्रों में भी टीमों ने दस्तक दी. जांच के दौरान संबंधित इलाकों में सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया गया और सामान्य आवाजाही को सीमित रखा गया, ताकि कार्रवाई प्रभावित न हो.
रिकॉर्ड, लाइसेंस और हथियारों के स्टॉक की पड़ताल
इस पूरे अभियान का मुख्य फोकस हथियारों की अवैध खरीद-बिक्री और उससे जुड़े संभावित नेटवर्क की परतें खंगालना बताया जा रहा है. जांच के दौरान हथियारों के स्टॉक, उनके नंबर और लाइसेंस से जुड़े कागजात का मिलान किया जा रहा है. एजेंसियां यह जानने की कोशिश में जुटी हैं कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच कहीं कोई अंतर तो मौजूद नहीं है.
इस अभियान को अंजाम देने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और जांचकर्मी तैनात किए गए हैं. पूरी कार्रवाई को रिकॉर्ड भी किया जा रहा है, ताकि बाद की जांच में हर स्तर पर उपलब्ध तथ्यों का इस्तेमाल किया जा सके और ऑपरेशन का पूरा ब्यौरा दस्तावेजी रूप में सुरक्षित रहे.
पहले भी सामने आ चुका है हथियारों का मामला
नालंदा जिले का नाम इससे पहले भी अवैध हथियारों और कारतूस की बरामदगी को लेकर सामने आ चुका है. जून 2025 में पुलिस और एसटीएफ ने एक कार्रवाई के दौरान रॉबिन यादव और उसके पिता राजेंद्र यादव से जुड़े ठिकानों से 800 से अधिक जिंदा कारतूस बरामद किए थे. उस मामले के बाद भी जिले में सक्रिय संभावित हथियार नेटवर्क को लेकर सवाल उठे थे.
जांच एजेंसियों को आशंका है कि जिले से जुड़े कुछ तत्व बिहार के बाहर भी अवैध हथियारों की आपूर्ति से संबंध रख सकते हैं. सोमवार की यह संयुक्त कार्रवाई उसी कड़ी को समझने और उससे जुड़े नेटवर्क की परतें खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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