Bihar News : बिहार में पूरक पोषाहार योजना के तहत टेक होम राशन (टीएचआर) वितरण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया गया है. समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आईसीडीएस निदेशालय की ओर से राज्यभर के 1 लाख 15 हजार 64 आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीएचआर का वितरण किया जा रहा है. अब इस वितरण प्रणाली में चेहरा पहचान प्रणाली यानी फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) का उपयोग किया जा रहा है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार जनवरी महीने में राज्य में 45 लाख से अधिक लाभार्थियों को टेक होम राशन उपलब्ध कराया गया. यह योजना गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित की जा रही है.
53 लाख से अधिक लाभुकों का हुआ सत्यापन
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, जनवरी माह में पूरक पोषाहार योजना के तहत राज्य में कुल 54 लाख 3 हजार 766 लाभार्थी पंजीकृत थे. इनमें गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और छोटे बच्चे शामिल हैं. इन पंजीकृत लाभुकों में से 53 लाख 82 हजार 471 लोगों का फेस रिकग्निशन सिस्टम के माध्यम से सत्यापन किया जा चुका है.
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सत्यापन के बाद टीएचआर वितरण के आंकड़ों में 45 लाख 56 हजार 22 लाभुकों को राशन दिए जाने की पुष्टि हुई है. विभाग का कहना है कि तकनीक आधारित इस प्रक्रिया से वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है और वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाने में मदद मिली है.
पूर्वी चंपारण में सबसे ज्यादा लाभुक
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में सबसे अधिक टीएचआर वितरण पूर्वी चंपारण जिले में दर्ज किया गया. यहां 2 लाख 9 हजार 480 लाभुकों को फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए टेक होम राशन उपलब्ध कराया गया.
इसके बाद कटिहार में 1 लाख 88 हजार 853, पूर्णिया में 1 लाख 58 हजार 194, पश्चिम चंपारण में 1 लाख 54 हजार 14 और गया में 1 लाख 53 हजार 230 लाभुकों को टीएचआर दिया गया. इन जिलों में लाभुकों की संख्या सबसे अधिक रहने के कारण वितरण का दायरा भी बड़ा रहा.
पारदर्शिता बढ़ाने में मददगार बना FRS
आईसीडीएस निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि फेस रिकग्निशन सिस्टम लागू होने से वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है. साथ ही इससे फर्जी लाभार्थियों की पहचान करना भी आसान हुआ है. इस तकनीक की मदद से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजना का लाभ केवल पात्र और वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे.
विभाग के अनुसार, राज्य सरकार की यह पहल पोषण सेवाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से ऐसी व्यवस्थाओं को राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ावा दिया जा रहा है और बिहार का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है.
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