Budget 2026 : केंद्रीय बजट 2026 की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे आम करदाताओं की उम्मीदें भी बढ़ती जा रही हैं. खासतौर पर वेतनभोगी और मध्यम वर्ग सरकार से ऐसी राहत की आस लगाए बैठे हैं, जिससे उनकी बचत पर टैक्स का बोझ कुछ हल्का हो सके. इसी कड़ी में अमेरिकन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स इन इंडिया (AMCHAM) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक अहम प्रस्ताव सौंपा है, जो देश के करोड़ों टैक्सपेयर को सीधे प्रभावित कर सकता है.
बचत के तरीकों में आया है बड़ा बदलाव
वर्तमान टैक्स नियमों के अनुसार आयकर अधिनियम 2025 की धारा 153 के तहत बचत खाते से मिलने वाले ब्याज पर केवल ₹10,000 तक की कर छूट मिलती है. लेकिन AMCHAM का कहना है कि आज के समय में सिर्फ सेविंग अकाउंट पर निर्भर रहना व्यावहारिक नहीं रह गया है. कम ब्याज दरों के कारण लोग अपनी बचत को फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और अन्य टर्म डिपॉजिट में लगाना ज्यादा बेहतर मानते हैं, जहां अपेक्षाकृत सुरक्षित और बेहतर रिटर्न मिलता है.
प्री-बजट सुझावों में क्या कहा AMCHAM ने?
AMCHAM ने सरकार के सामने दो अहम सुझाव रखे हैं—
पहला—
ब्याज आय पर मिलने वाली कर छूट की सीमा को मौजूदा ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 किया जाए, ताकि महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप टैक्स नियमों को अपडेट किया जा सके.
दूसरा—
कर छूट का दायरा केवल सेविंग अकाउंट तक सीमित न रखते हुए इसे सभी प्रकार के बैंक डिपॉजिट, विशेषकर फिक्स्ड डिपॉजिट और टर्म डिपॉजिट तक बढ़ाया जाए.
संस्था का मानना है कि यह उम्मीद करना कि वेतनभोगी वर्ग अपनी पूरी जमा राशि केवल बचत खाते में रखेगा, मौजूदा दौर में अवास्तविक है. बेहतर रिटर्न की चाह में लोग स्वाभाविक रूप से एफडी जैसे विकल्प चुनते हैं, ऐसे में टैक्स नियमों को भी इसी हकीकत के अनुरूप ढाला जाना चाहिए.
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क्यों जरूरी है टैक्स नियमों में सुधार?
ध्यान देने वाली बात यह है कि आयकर अधिनियम की यह व्यवस्था करीब एक दशक पहले लागू की गई थी. तब से लेकर अब तक महंगाई दर, निवेश के साधन और लोगों की वित्तीय प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है. विशेषज्ञों का कहना है कि—
- ₹10,000 की सीमा आज के समय में प्रभावी राहत नहीं दे पाती.
- एफडी और टर्म डिपॉजिट पर टैक्स छूट मिलने से बैंकिंग सेक्टर में जमा राशि बढ़ेगी.
- वरिष्ठ नागरिकों को पहले से अलग लाभ मिलते हैं, लेकिन सामान्य टैक्सपेयर को भी समान रूप से राहत की जरूरत है.
क्या बजट 2026 में बदलेगा नियम?
अब सभी की निगाहें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी. अगर सरकार AMCHAM के इन सुझावों को स्वीकार करती है, तो यह मिडिल क्लास के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है. इससे न सिर्फ टैक्स बोझ कम होगा, बल्कि देश में बचत और निवेश की आदतों को भी नई मजबूती मिल सकती है.
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