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भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार का ताला खुला! अब होगा अकूत संपत्ति का आकलन

Puri Jagannath Temple: पुरी जगन्नाथ के रत्न भंडार का ताला खुद गया है. खजाने के रहस्य से पर्दा उठ गया है अब अकूत संपत्ति का आकलन होगा. आखिरी बार 1978 में रत्न भंडार का ताला खुला था. तब राजाओं के मुकुट से लेकर खजानों से भरी तिजोरियां देखने को मिली थीं.

भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार का ताला खुला! अब होगा अकूत संपत्ति का आकलन BHAGWAN JAGANNATH
फाइल फोटो.

Jagannath Temple : मंदिर परिसर में बाहर की ओर तैनात सुरक्षा घेरे के बीच रत्न भंडार का ताला खोलने के लिए नियुक्त किए तमाम कर्मचारी और अधिकारी धीरे-धीरे अंदर दाखिल हुए और फिर खबर आई कि रत्न भंडार के ताले को खोल दिया गया है. अधिकारियों के अनुसार रत्न भंडार को खोलते समय 11 लोग मौजूद थे, जिसमें ओडिशा हाई कोर्ट के पूर्व जज विश्वनाथ रथ, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीक्षक डीबी गड़नायक और पुरी के राजा ‘गजपति महाराजा’ के एक प्रतिनिधि शामिल थे. इनमें चार सेवक भी थे जिन्होंने अनुष्ठानों का ध्यान रखा. वे शाम करीब 5.20 बजे रत्न भंडार से बाहर आये, जिसमें एक आंतरिक और एक बाहरी कक्ष है. ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया के जरिए रत्न भंडार खुलने की जानकारी दी.

साल 2018 : ओडिशा हाईकोर्ट ने ताला खोलने का दिया था आदेश

लंबे वक्त से मांग उठ रही थी कि भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार का ताला खुलना चाहिए. रत्न भंडार से रहस्य से पर्दा उठना चाहिए. केस कोर्ट तक गया और आदेश भी आया लेकिन ताला नहीं खुला. आदेश के बाद जब ताला खोलने की बारी आई तो पता चला खजाने की चाबी खो चुकी है.

रत्न भंडार पर लगे ताले को तोड़ना पड़ा

चाबी की खोज शुरू हुई लेकिन 6 साल बीतने के बाद भी चाबी नहीं मिली. अब चाबी वाकई गुम हो गई या फिर जानबूझकर छिपा दी गई ये रहस्य अब तक बना हुआ है. यही वजह है कि 46 साल बाद रत्न भंडार का ताला खोला गया तो जो चाबी ले जाई गई वो काम नही आई. नतीजा रत्न भंडार पर लगे ताले को तोड़ना पड़ा.

दरवाजों के पीछे खजाने का अदृश्य संसार

जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में बाहरी और भीतरी दो हिस्से हैं. रत्न भंडार का भीतरी हिस्सा लंबे वक्त से बंद था. बताया जाता है कि इस हिस्से में 7 दरवाजे हैं और इन्हीं दरवाजों के पीछे है करोड़ो-अरबों का अदृश्य संसार.

जगन्नाथ मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ. कलिंग वास्तुकला के आधार बने इस मंदिर में उस वक्त एक रत्न भंडार भी बनाया गया. इसी रत्न भंडार में जगन्नाथ मंदिर के तीनों देवताओं जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के गहने रखे गए जो कई राजाओं और भक्तों की ओर से भेंट किए गए.  माना जाता है कि वक्त के साथ ये खजाना बढ़ता गया लेकिन मौजूदा वक्त में खजाने का आकार कितना बड़ा है खजाने में जमा दौलत कितनी बढ़ चुकी है किस्से और कहानियों से परे रत्न भंडार में कितना सोना, आभूषण और कीमती बर्तन जमा हैं? इन तमाम सवालों के जवाब के लिए कोर्ट के निर्देश पर बनाई गई कमेटी की देखरेख में आकलन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. हालांकि खजाने के रहस्य से पर्दा कब तक उठेगा इस पर सस्पेंस अभी बाकी है.

दौलत का संसार मंदिर के अंदर है

साल 2018 में विधानसभा में पूर्व कानून मंत्री प्रताप जेना ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि आखिरी बार यानी 1978 में रत्न भंडार को खोलने के समय करीब साढ़े 12 हजार भरी सोने के गहने थे. जबकि 22 हजार भरी से कुछ ज्यादा चांदी के बर्तन थे.

एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर होती है. यानि मंदिर का रत्न भंडार दौलत का वो संसार है जिसका आकलन एक या दो दिन में मुमकिन नहीं. इधर एक अपडेट ये है कि अगले एक या दो दिन तक रत्न भंडार के अदृश्य संसार से पर्दा उठने की उम्मीद कम है. बताया जा रहा है कि रत्न भंडार को खोलने से लेकर संपत्ति के आकलन के लिए गठित कमेटी अगले दो-तीन दिन तक किसी और कार्य में व्यस्त रहेगी. इसके बाद ही रत्न भंडार के आकलन की प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा.

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