IES Mridupani Nambi Success Story: यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती से भी मिलती है. IES अधिकारी मृदुपाणि नंबी की कहानी इसी सोच को मजबूत करती है. पहले प्रयास में मिली असफलता ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि खुद को बेहतर बनाने की दिशा दी. उन्होंने यह साबित किया कि एक छोटा सा अंतर भी बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकता है.
कहां से शुरू हुआ सफर?
मृदुपाणि नंबी हैदराबाद की रहने वाली हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई वहीं से हुई, जहां से उनके अनुशासन और पढ़ाई के प्रति गंभीरता की नींव पड़ी. स्कूल के दिनों से ही वह अकादमिक रूप से मजबूत रहीं और कठिन विषयों से घबराने के बजाय उन्हें समझने की कोशिश करती रहीं.
विज्ञान और गणित में रुचि के चलते मृदुपाणि ने बहुत पहले तय कर लिया था कि वह इंजीनियरिंग को ही अपना करियर बनाएंगी. 12वीं के बाद उन्होंने तकनीकी पढ़ाई की दिशा में कदम बढ़ाया और इंजीनियर बनने के सपने को साकार करने में जुट गईं.
भविष्य को लेकर भी गंभीरता से सोचने लगीं
मृदुपाणि ने जी नारायण इंस्टीट्यूट से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की. कॉलेज के समय में उन्होंने न केवल पाठ्यक्रम पर ध्यान दिया, बल्कि अपने भविष्य को लेकर भी गंभीरता से सोचने लगीं.
इंजीनियरिंग के दौरान ही उन्हें UPSC द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं की जानकारी मिली. IAS और IPS के साथ-साथ इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस (IES) ने उनका खास ध्यान खींचा. यहीं से उन्होंने तय किया कि वह IES परीक्षा की तैयारी करेंगी.
पहला प्रयास और निराशा लगी हाथ
साल 2020 में मृदुपाणि ने IES परीक्षा का पहला प्रयास किया, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा. प्रीलिम्स में वह सिर्फ एक अंक से आगे नहीं बढ़ सकीं. यह अनुभव भावनात्मक रूप से कठिन था, लेकिन उन्होंने इसे अंत नहीं माना.
असफलता के बाद मृदुपाणि ने खुद का विश्लेषण किया. उन्होंने समझा कि तैयारी में मेहनत के साथ-साथ एकाग्रता भी जरूरी है. इसी सोच ने उन्हें अपनी दिनचर्या में बदलाव करने के लिए प्रेरित किया.
मोबाइल से दूरी का फैसला ने दिलायी सफलता
मृदुपाणि ने तय किया कि वह मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाएंगी. यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने ध्यान भटकाने वाली चीजों को पूरी तरह छोड़ दिया. इस कदम से उनका फोकस पढ़ाई पर पूरी तरह टिक गया.
डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से दूर रहने के बाद उनकी पढ़ाई की गुणवत्ता में साफ सुधार दिखने लगा. नियमित रिवीजन, सीमित संसाधन और अनुशासन उनकी तैयारी का आधार बने. उन्होंने कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देना शुरू किया.
मेहनत का मिला फल, युवाओं के लिए सीख
लगातार प्रयास और बदली रणनीति का नतीजा अगले प्रयास में सामने आया. मृदुपाणि नंबी ने UPSC IES परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 21 हासिल की और 2022 बैच की IES अधिकारी बनीं.
मृदुपाणि नंबी की कहानी यह संदेश देती है कि असफलता स्थायी नहीं होती. सही फैसले, आत्मअनुशासन और धैर्य के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
इसे भी पढ़ें-बिहार के इस जिले में निःशुल्क शिक्षा व आवासन के लिए आवेदन शुरू, 1 मार्च को परीक्षा
इसे भी पढ़ें-यहां नौकरी मिलते ही बदल जाएगी किस्मत, सैलरी 1 लाख से ऊपर, तुरंत करें आवेदन

