8th Pay Commission : 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर जहां केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं राज्य कर्मचारियों में भी वेतन और पेंशन संशोधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. सबसे अहम सवाल यही है कि क्या राज्यों में भी केंद्र की तरह वेतन बढ़ेगा और अगर बढ़ा तो एरियर कब से मिलेगा.
कब से लागू हो सकती हैं 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?
केंद्र सरकार की वेतन आयोग परंपरा के अनुसार हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू किया जाता है. इसी क्रम में संकेत दिए गए हैं कि 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा सकती हैं.
भले ही औपचारिक अधिसूचना बाद में जारी हो, लेकिन वेतन और पेंशन की गणना इसी तारीख से किए जाने की संभावना रहती है.
क्या राज्यों पर केंद्र की सिफारिशें लागू करना जरूरी होता है?
राज्य सरकारों के लिए केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें मानना बाध्यकारी नहीं होता. वेतन मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, कई राज्य केंद्र के फैसले को आधार बनाते जरूर हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अपने वित्तीय हालात को देखकर लेते हैं.
अक्सर राज्य सरकारें अलग से राज्य वेतन आयोग बनाती हैं, जो राजस्व, खर्च और आर्थिक बोझ का आकलन करने के बाद रिपोर्ट सौंपता है. इसी वजह से कई बार राज्यों में वेतन संशोधन में 1 से 3 साल तक की देरी हो जाती है.
उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों को कब मिल सकता है एरियर?
उत्तर प्रदेश में 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रही है. ऐसे में अगर राज्य सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें अपनाती है, तो 1 जनवरी 2026 से एरियर बनने की संभावना बन सकती है.
नियम के अनुसार, वेतन या पेंशन लागू होने में जितनी देरी होती है, उतनी अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिया जाता है.
क्या सभी राज्यों में एक जैसा वेतन बढ़ेगा?
इसका जवाब साफ तौर पर “नहीं” है. हर राज्य अपनी आर्थिक स्थिति, बजट घाटा, टैक्स आय और विकास योजनाओं को ध्यान में रखकर वेतन बढ़ोतरी तय करता है.
इसी वजह से राज्यों में वेतन आयोगों की संख्या भी अलग-अलग है.
जहां केरल में 11वां राज्य वेतन आयोग बन चुका है, वहीं कर्नाटक अभी 7वें वेतन आयोग के तहत काम कर रहा है. इससे साफ है कि केंद्र और राज्य की वेतन नीति पूरी तरह समान होना जरूरी नहीं.
फिटमेंट फैक्टर क्या है और क्यों अहम माना जाता है?
वेतन बढ़ोतरी का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना फिटमेंट फैक्टर होता है.
इसी के आधार पर पुरानी बेसिक सैलरी को बढ़ाकर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है.
उदाहरण के तौर पर, 7वें केंद्रीय वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था. यानी पुरानी बेसिक सैलरी को 2.57 से गुणा कर नई सैलरी तय की गई. हालांकि, उस समय महंगाई भत्ता शून्य कर दिए जाने से कर्मचारियों को वास्तविक फायदा कम महसूस हुआ.
राज्यों ने अलग-अलग फार्मूले क्यों अपनाए?
राज्यों ने अपने हिसाब से फिटमेंट फैक्टर तय किए.
उत्तर प्रदेश ने केंद्र के समान 2.57 अपनाया, जबकि पंजाब ने 2.59 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया.
इससे यह साफ होता है कि राज्यों में वेतन बढ़ोतरी केंद्र से ज्यादा या कम दोनों हो सकती है.
8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें हैं?
वेतन मामलों के जानकारों का मानना है कि मौजूदा महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को देखते हुए 8वें वेतन आयोग में 2.6 से 3.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर तय किया जा सकता है.
अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और पेंशन में बड़ा इजाफा संभव है. हालांकि, इससे केंद्र और राज्य सरकारों पर वित्तीय दबाव भी बढ़ेगा. अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी और आर्थिक हालात पर निर्भर करेगा.
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