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अब पहले गूंजेगा वन्दे मातरम्; जन-गण-मन से पहले 6 अंतरे अनिवार्य, गृह मंत्रालय का आदेश

MHA Guidelines: सरकारी कार्यक्रमों में नेशनल सॉन्ग और एंथम का नया प्रोटोकॉल तय हुआ. अब वन्दे मातरम् पहले और जन-गण-मन बाद में गाया जाएगा. मंत्रालय ने समय, तरीका और मौके भी तय किए.

MHA Guidelines: सरकारी आयोजनों में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के प्रस्तुतीकरण को लेकर अब स्पष्ट और एकसमान व्यवस्था लागू होने जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नया निर्देश जारी कर बताया है कि आधिकारिक कार्यक्रमों में नेशनल सॉन्ग और नेशनल एंथम किस क्रम और तरीके से गाए जाएंगे. मकसद यह है कि देशभर में एक जैसा प्रोटोकॉल अपनाया जाए और गरिमा बनी रहे.

पहले वन्दे मातरम्, फिर जन-गण-मन

मंत्रालय के आदेश के अनुसार यदि किसी कार्यक्रम में वन्दे मातरम् और जन-गण-मन दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो शुरुआत वन्दे मातरम् से होगी. उसके बाद राष्ट्रगान गाया जाएगा. यानी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत को प्राथमिक क्रम दिया गया है.

इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहां दोनों रचनाएं शामिल हों, वहां कोई भ्रम या अलग-अलग परंपरा न रहे.

वन्दे मातरम् के पूरे अंतरे गाना अनिवार्य

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखे गए ‘वन्दे मातरम्’ को लेकर प्रोटोकॉल अब काफी स्ट्रिक्ट हो गया है. मंत्रालय के निर्देश के अनुसार:

  • नेशनल सॉन्ग के सभी 6 स्टैंजा (अंतरे) गाना अनिवार्य होगा.
  • इस पूरे गाने की ड्यूरेशन (समय) 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है.
  • जब नेशनल सॉन्ग गाया जाएगा, तो वहां मौजूद सभी लोगों को सावधान की मुद्रा (Attention) में खड़ा होना होगा.

किन मौकों पर लागू होगा यह प्रोटोकॉल?

गृह मंत्रालय के इस आदेश के अनुसार, यह प्रोटोकॉल खास तौर पर आधिकारिक यानी सरकारी कार्यक्रमों के लिए है. जैसे:

  • राष्ट्रपति (प्रेसिडेंट) का आगमन होने पर.
  • तिरंगा फहराने के समय.
  • राज्यपालों (गवर्नर्स) के भाषण के दौरान.
  • मंत्रियों की मौजूदगी वाले महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी इसे गाना बेहतर माना जाएगा.
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों (परेड को छोड़कर) में इसका आधिकारिक वर्जन ही बजेगा.

सिनेमाघरों में छूट, स्कूलों में प्रोत्साहन

मंत्रालय ने साफ किया है कि यदि किसी फिल्म, न्यूज रील या डॉक्यूमेंट्री में वन्दे मातरम् का उपयोग होता है, तो दर्शकों के लिए खड़ा होना जरूरी नहीं होगा. यह व्यवस्था इसलिए रखी गई है ताकि सिनेमाघरों में अव्यवस्था या बाधा की स्थिति न बने.

दूसरी तरफ स्कूलों को सलाह दी गई है कि दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत गाकर की जाए. इसका उद्देश्य छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जुड़ाव बढ़ाना है.

साउंड सिस्टम और लिरिक्स पर भी जोर

निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जहां भी वन्दे मातरम् गाया जाए, वहां अच्छी गुणवत्ता का साउंड सिस्टम होना चाहिए ताकि लोग एक साथ सही सुर में गा सकें. जरूरत पड़ने पर गीत के बोल लिखित रूप में उपलब्ध कराए जा सकते हैं, जिससे गलत उच्चारण या भ्रम की स्थिति न बने.

150 वर्ष पूरे होने से जुड़ा फैसला

इन बदलावों के पीछे एक खास अवसर भी है. वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के मद्देनजर सरकार इसे नए सिरे से सम्मानजनक ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में काम कर रही है. मंत्रालय का कहना है कि सम्मान और मर्यादा के साथ गाया गया वन्दे मातरम् हर स्थिति में स्वीकार्य है.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
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