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टाटा स्टील टिनप्लेट डिवीजन में वार्षिक शटडाउन शुरू, नए लक्ष्य से पहले मशीनों की बड़ी मरम्मत

Jamshedpur News: जमशेदपुर के टाटा स्टील टिनप्लेट डिवीजन में मशीनों की मरम्मत और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए वार्षिक शटडाउन लिया गया है. कई प्रमुख यूनिट्स को कुछ दिनों के लिए बंद कर तकनीकी सुधार और कल-पुर्जों के बदलाव का काम किया जाएगा. कंपनी ने 2026-27 के लिए 7.15 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है, जिस पर पूरा फोकस है.

Jamshedpur News: जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील के टिनप्लेट डिवीजन में मशीनों की कार्यक्षमता बेहतर करने और आगामी वित्तीय वर्ष के उत्पादन लक्ष्य को सुचारु रूप से हासिल करने के उद्देश्य से वार्षिक शटडाउन शुरू किया गया है. इस दौरान प्लांट की कई महत्वपूर्ण इकाइयों को कुछ दिनों के लिए अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा, ताकि तकनीकी निरीक्षण, मरम्मत और पुराने कल-पुर्जों के बदलाव का काम किया जा सके. कंपनी प्रबंधन का मानना है कि यह मेंटेनेंस ब्रेक आगे निर्बाध उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम है.

कई प्रमुख यूनिट्स अस्थायी रूप से रहेंगी बंद

प्रबंधन की ओर से पिकलिंग-1, पिकलिंग-2, ईसीएल यानी इलेक्ट्रोलाइटिक क्लीनिंग लाइन और 6-हाई प्लांट को तय अवधि के लिए बंद करने का फैसला लिया गया है. अलग-अलग यूनिट्स में यह शटडाउन तीन से छह दिनों तक प्रभावी रहेगा. इस दौरान इंजीनियरिंग और तकनीकी टीम मशीनों की जांच, घिसे हुए उपकरणों की अदला-बदली और जरूरी रखरखाव का काम करेगी.

कंपनी का उद्देश्य यह है कि पूरे साल लगातार परिचालन के बाद मशीनों पर पड़े दबाव को कम किया जाए और अगले संचालन चक्र से पहले उन्हें पूरी तरह तैयार स्थिति में लाया जाए.

नए वित्तीय वर्ष के लिए 7.15 लाख टन का टारगेट

टिनप्लेट डिवीजन खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली टिन आधारित सामग्री तैयार करता है, जिसका उपयोग लंबे समय तक खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने में होता है. इसी मांग को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7.15 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है.

उत्पादन लक्ष्य बड़ा होने के कारण प्रबंधन किसी भी तरह की तकनीकी बाधा से बचना चाहता है. यही वजह है कि साल की शुरुआत में ही मेंटेनेंस गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि आगे उत्पादन में रुकावट की आशंका कम हो.

प्रोपेन गैस की उपलब्धता पर लगातार नजर

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत पर आयोजित एक कार्यक्रम में प्लांट के तत्कालीन एक्जीक्यूटिव इंचार्ज उज्जवल चक्रवर्ती ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया था कि प्रोपेन गैस का भंडार सीमित जरूर है, लेकिन फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया था कि गैस की उपलब्धता को लेकर ऐसी स्थिति नहीं बनने दी जाएगी, जिससे प्लांट संचालन प्रभावित हो.

उन्होंने यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर अन्य इकाइयों से प्रोपेन की व्यवस्था की जा सकती है और वैकल्पिक आपूर्ति तंत्र पर भी काम जारी है.

वैश्विक संकट से सप्लाई चेन पर असर

प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक प्रोपेन गैस की आपूर्ति भी बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध जैसे हालात और वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है. टिनप्लेट उत्पादन प्रक्रिया में प्रोपेन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है.

इस गैस का उपयोग कोटिंग प्रक्रिया, टिन को पिघलाने, भट्टियों को गर्म रखने और मेटल फेब्रिकेशन जैसे कई औद्योगिक कार्यों में होता है. ऐसे में इसकी आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है. हालांकि, कंपनी प्रबंधन इस स्थिति से निपटने के लिए लगातार वैकल्पिक उपायों पर काम कर रहा है.

इसे भी पढ़ें-चतरा में किसान की मेहनत पर पानी, खलिहान में रखी अरहर की फसल जलकर राख

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
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