Ekchari-Mahagama four lane : भागलपुर–झारखंड कनेक्टिविटी मजबूत करने के मकसद से प्रस्तावित एकचारी–महगामा फोरलेन सड़क परियोजना अनिश्चितता में फंस गई है. यह सड़क क्षेत्रीय व्यापार, माल ढुलाई और अंतरराज्यीय आवागमन के लिहाज से अहम मानी जा रही थी. लेकिन जमीन अधिग्रहण के मसले ने इसकी रफ्तार थाम दी है. मंत्रालय स्तर पर फाइल लंबित रहने से आगे की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है.
पिछले वर्ष इस परियोजना के लिए टेंडर जारी किया गया था, जिसे तकनीकी कारणों से रद्द करना पड़ा. इसके बाद दोबारा निविदा आने की उम्मीद जताई गई, मगर करीब नौ महीने बीत जाने के बाद भी नई टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी. इससे परियोजना की टाइमलाइन लगातार पीछे खिसकती जा रही है.
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जमीन अधिग्रहण बना मुख्य रोड़ा
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के मुताबिक सबसे बड़ी बाधा जमीन अधिग्रहण है. जब तक यह मामला स्थायी रूप से सुलझ नहीं जाता, तब तक परियोजना मंत्रालय में विचाराधीन ही रहेगी.
फोरलेन के लिए भागलपुर जिले में बड़े पैमाने पर जमीन चिह्नित की गई थी. कहलगांव क्षेत्र के धनौरा, रामपुर बरहरा, रसूलपुर, एकचारी और सनोखर इलाकों में कुल 176 स्थानों की जमीन अधिग्रहित की जानी थी. इनमें कुछ सरकारी तो अधिकतर निजी जमीन शामिल है. निजी भूखंडों में धनहर और भीठ श्रेणी की जमीन की हिस्सेदारी ज्यादा बताई जा रही है.
भूमि अधिग्रहण के लिए गजट प्रकाशन भी किया गया और भूस्वामियों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया. इसके बावजूद आपत्तियों, मुआवजे और स्वामित्व संबंधी उलझनों के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी.
डिजाइन में पहले भी हो चुका बदलाव
परियोजना के शुरुआती स्वरूप में एक एयर स्ट्रिप बनाने का प्रावधान भी था, जिसे बाद में हटा दिया गया. अधिकारियों का मानना है कि डिजाइन में बदलाव और अधिग्रहण विवादों ने मिलकर परियोजना को धीमा कर दिया.
क्षेत्रीय विकास से जुड़ी उम्मीदें
यह फोरलेन सड़क बनने से बिहार–झारखंड के बीच यात्रा समय घटने, व्यापारिक आवाजाही बढ़ने और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद थी. स्थानीय लोगों और व्यापारिक संगठनों ने कई बार इस सड़क को जल्द शुरू कराने की मांग भी उठाई है. फिलहाल देरी से लोगों में निराशा बढ़ रही है.
एक नजर में परियोजना
- कुल लंबाई: 27.25 किमी
- बिहार हिस्से में: 14.30 किमी
- झारखंड हिस्से में: 12.95 किमी
- माइनर ब्रिज: 3
- कल्वर्ट: 71
- एलीवेटेड रोड: 1 स्थान
- इंटरचेंज: 1
- व्हीकल अंडरपास: 5
- एलएमवी अंडरपास: 3
- छोटे वाहनों के अंडरपास: 3
- बस-ट्रक ओवरपास: 20
- कुल लागत: ₹1006 करोड़
- भूमि अधिग्रहण: ₹603 करोड़
- निर्माण: ₹403 करोड़
एनएचएआइ, साहिबगंज के प्रोजेक्ट डायरेक्टर शरद कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा है कि जमीन अधिग्रहण का समाधान होने के बाद ही नई निविदा निकाली जा सकेगी. अभी परियोजना पूरी तरह रुकी हुई है और आगे का फैसला मंत्रालय स्तर पर होना है.
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