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Budh Grah Dosh: ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, तर्क, संवाद क्षमता और निर्णय शक्ति का कारक माना गया है. कुंडली में जब बुध ग्रह कमजोर, पीड़ित या अशुभ स्थिति में होता है, तो इसका प्रभाव केवल मानसिक स्थिति तक सीमित नहीं रहता बल्कि व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य, व्यवहार और सामाजिक जीवन तक पर दिखाई देने लगता है. ऐसे में व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और कई बार जीवन में असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. बुध दोष को ज्योतिष में एक ऐसा दोष माना गया है जो धीरे-धीरे प्रभाव डालता है लेकिन इसका असर काफी व्यापक हो सकता है.
बुध दोष के प्रमुख प्रभाव और लक्षण
कुंडली में बुध ग्रह कमजोर होने पर व्यक्ति को कई प्रकार की मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. इसमें प्रमुख रूप से ये प्रभाव देखे जाते हैं:
- मानसिक तनाव, चिंता और बेचैनी
- किसी काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
- याददाश्त कमजोर होना और भूलने की समस्या
- निर्णय लेने में भ्रम और अस्थिरता
- बातचीत में दिक्कत या वाणी दोष जैसे हकलाना
- त्वचा से जुड़ी बीमारियां और एलर्जी
- नाक, कान और गले से संबंधित समस्याएं
- तंत्रिका तंत्र की कमजोरी और थकान
- श्वास संबंधी परेशानियां और शरीर में कमजोरी
इन लक्षणों के कारण व्यक्ति का दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है और कार्यक्षमता में भी गिरावट देखने को मिल सकती है.
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बुध ग्रह के मंत्र और जप विधि
ज्योतिष में बुध ग्रह की शांति के लिए मंत्र जप को महत्वपूर्ण उपाय माना गया है. नियमित रूप से मंत्र जप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है.
- वैदिक मंत्र: ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते सं सृजेथामयं च
- तांत्रिक मंत्र: ॐ बुं बुधाय नमः
- तांत्रिक मंत्र: ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नमः
- बीज मंत्र: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
इन मंत्रों का जप विशेष रूप से बुधवार के दिन करने की परंपरा बताई गई है.
बुध दोष के उपाय और परंपराएं
बुध ग्रह को शांत करने के लिए कई पारंपरिक उपाय बताए गए हैं जिन्हें श्रद्धा और नियमपूर्वक किया जाता है:
- बुधवार का व्रत रखना और उपवास करना
- हरे रंग के वस्त्र और हरे फूलों का उपयोग करना
- गौ सेवा करना और हरा चारा खिलाना
- पन्ना रत्न (3–4 रत्ती) धारण करना
- मूंग, हरा कपड़ा और हरे पदार्थों का दान करना
- नियमित रूप से बुध मंत्रों का जप करना
इन उपायों को ज्योतिष में बुध ग्रह को मजबूत करने में सहायक माना जाता है.
बुध ग्रह से जुड़ी ज्योतिषीय मान्यताएं
- अधिदेवता: भगवान विष्णु
- वार: बुधवार
- प्रिय रंग: हरा
- वाहन: सिंह
- दान की वस्तुएं: मूंग, हरा कपड़ा, पन्ना, सोना, कांसा
- व्रत अवधि: 27 या 108 बुधवार तक
इन मान्यताओं के अनुसार बुध ग्रह का संतुलन जीवन में बुद्धि, व्यापार और संवाद क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है.
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