Bihar Land Registry : बिहार में जमीन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए आने वाले महीनों में लागत बढ़ सकती है. भू-निबंधन से जुड़े विभाग न्यूनतम मूल्य रजिस्टर (एमवीआर) में बढ़ोतरी की तैयारी कर रहे हैं. जैसे ही नई दरें लागू होंगी, रजिस्ट्री पर लगने वाला शुल्क भी ऊपर जाएगा, जिसका सीधा असर खरीदारों पर पड़ेगा.
राजस्व बढ़ाने पर सरकार का जोर
एमवीआर संशोधन को सरकार के राजस्व से भी जोड़कर देखा जा रहा है. विभागीय स्तर पर अधिकारियों को पुनरीक्षण प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं. मणीन्द्र नाथ झा द्वारा जारी पत्र के बाद अवर निबंधन कार्यालयों में कवायद बढ़ गई है. अधिकारियों ने माना है कि नई दरों पर काम चल रहा है.
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कई वर्षों से दरें स्थिर
ग्रामीण क्षेत्रों में एमवीआर का आखिरी बड़ा संशोधन 2013 में हुआ था, जबकि शहरी और आसपास के इलाकों में 2016 में बदलाव हुआ था. इस दौरान बाजार भाव तेजी से बढ़े, जिससे वास्तविक कीमत और सरकारी दरों के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया.
हर साल समीक्षा की तैयारी
नई व्यवस्था के तहत एमवीआर को नियमित रूप से अपडेट करने का प्रस्ताव है. निर्देश दिए गए हैं कि पिछले एक साल के निबंधित दस्तावेजों का विश्लेषण किया जाए. हर श्रेणी में ऊंची और कम कीमत वाले दस्तावेजों का तुलनात्मक अध्ययन होगा ताकि नई दरें तय की जा सकें.
बाजार दर जुटाने को सर्वे
स्थानीय स्तर पर सर्वे टीमें गठित होंगी, जो मौजा-वार जमीन के बाजार भाव का आकलन करेंगी. अंचल और नगर निकायों के साथ समन्वय कर आंकड़े जुटाए जाएंगे. पूर्व में जारी भूमि वर्गीकरण दिशा-निर्देशों को आधार बनाकर संशोधित एमवीआर का प्रस्ताव तैयार होगा. ऐसे में खरीदारों के सामने यह सवाल है कि वे नई दरों से पहले सौदा करें या इंतजार करें.
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