President Protocol: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया बंगाल दौरे के दौरान, स्वागत और सुरक्षा प्रोटोकॉल में हुई चूक को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है. केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट रविवार शाम पांच बजे तक भेजने का निर्देश दिया.
दार्जिलिंग सम्मेलन और व्यवस्थाओं की जांच
पत्र में दार्जिलिंग जिले में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के आयोजन स्थल में बदलाव और अन्य व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी भी मांगी गई है. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति के दौरे में सुरक्षा, स्वागत और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कोई कमी न रहे.
इसे भी पढ़ें-राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर ममता बनर्जी के बयान से सियासत गरम, पीएम मोदी ने एक्स पर जताई नाराजगी
राष्ट्रपति के दौरे में क्या होता है प्रोटोकॉल?
भारत सरकार के नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति के किसी भी सार्वजनिक दौरे पर उनका स्वागत और विदाई राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी की मौजूदगी में होना चाहिए. यदि मुख्यमंत्री उपस्थित नहीं हो सकते, तो वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को प्रतिनिधि के रूप में भेजा जाना अनिवार्य है. राजधानी से बाहर के दौरे में, जिला अधिकारी के साथ मुख्यमंत्री या उनके मनोनीत प्रतिनिधि को मौजूद रहना जरूरी है.
बंगाल दौरे में हुई चूक
हालांकि, बंगाल दौरे के दौरान राष्ट्रपति का स्वागत केवल महापौर, डीएम और सीपी ने किया. मुख्यमंत्री या किसी मंत्रिपरिषद सदस्य की उपस्थिति नहीं रही. प्रोटोकॉल के अनुसार, जिला अधिकारी निर्वाचित नेताओं की जगह नहीं ले सकते. इस चूक के कारण केंद्र सरकार ने रिपोर्ट मांगकर मामले की गंभीरता को रेखांकित किया है.
आगे की कार्रवाई
केंद्र सरकार की मांग है कि प्रोटोकॉल में हुई गड़बड़ी का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराया जाए. रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में सार्वजनिक दौरों के दौरान नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं.
इसे भी पढ़ें-मार्च में ही तपने लगा बंगाल, लू की चेतावनी जारी; अप्रैल–मई में पश्चिमी जिलों में बढ़ेगी गर्मी

