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Bhagalpur News : भागलपुर नगर निगम में शनिवार को आयोजित सामान्य बोर्ड की बैठक सात महीने के अंतराल के बाद हुई, लेकिन शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण बना रहा. बैठक के दौरान स्थिति तब बिगड़ गई जब वार्ड संख्या 13 के पार्षद Ranjeet Mandal ने नगर आयुक्त Kislay Kushwaha के साथ कथित बदसलूकी की और मेयर पर सीधे भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. इस पर सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया. मामला इतना बढ़ गया कि उन्हें तत्काल प्रभाव से बैठक से बाहर जाने को कहा गया. हालात को देखते हुए गार्ड को भी बुलाया गया, हालांकि इससे पहले ही पार्षद स्वयं बैठक छोड़कर बाहर निकल गए. इस पूरे घटनाक्रम से सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया और तनाव चरम पर पहुंच गया.
निलंबन की कार्रवाई पर बढ़ा विवाद
घटना के बाद नगर प्रशासन और नगर सरकार की ओर से कड़ी कार्रवाई करते हुए पार्षद रंजीत मंडल को दो महीने के लिए निलंबित कर दिया गया. इस अवधि के दौरान वह न तो सशक्त स्थायी समिति की बैठकों में भाग ले सकेंगे और न ही सामान्य बोर्ड की बैठकों में शामिल हो पाएंगे. प्रशासन ने इस कदम को अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया. वहीं पार्षद ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें निलंबित करने का अधिकार किसी के पास नहीं है और इसके लिए कोई ठोस आधार भी नहीं है. बाद में मेयर की ओर से निलंबन की पुष्टि किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया.
ऐसे बढ़ा विवाद, संवाद से टकराव तक पहुंचा मामला
बैठक के दौरान पार्षद रंजीत मंडल ने सवाल उठाया कि बैठक चलती रहेगी या पहले पार्षदों के अधिकारों पर स्पष्ट जानकारी दी जाएगी. इस पर नगर आयुक्त ने कहा कि अधिकार जानने के लिए नियम पुस्तिका देखी जाए. पार्षद ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए मेयर से जवाब देने को कहा. मेयर ने भी कहा कि यहां अधिकार बताने के लिए नहीं, बल्कि कार्यवाही के लिए बैठक हो रही है और सभी जानकारी पुस्तकों में उपलब्ध है. इस बीच अन्य पार्षदों ने भी हस्तक्षेप करते हुए माहौल को और तीखा बना दिया. रंजीत मंडल ने आरोप लगाया कि उनके वार्ड के साथ भेदभाव किया जा रहा है और जरूरत पड़ी तो वह अदालत का रुख करेंगे. उन्होंने यहां तक कहा कि वह जेल जाने के लिए भी तैयार हैं. इसके बाद नगर आयुक्त ने सख्ती दिखाते हुए उन्हें बाहर करने की बात कही, जिस पर पार्षद ने खुद ही बैठक छोड़ने का निर्णय लिया.
सात महीने बाद हुई बैठक में हाथापाई की नौबत
करीब सात महीने बाद आयोजित इस बैठक में हंगामे की आशंका पहले से जताई जा रही थी, जो पूरी तरह सही साबित हुई. बैठक की शुरुआत से ही पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक होती रही. वार्ड 30 के पार्षद अभिषेक आनंद और वार्ड 42 के पार्षद सरयुग साह के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि मामला हाथापाई तक पहुंचने लगा. हालांकि अन्य पार्षदों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला और किसी बड़ी घटना को टाल दिया.
मेयर, पार्षद और नगर आयुक्त के बीच भी तीखी बहस
बैठक के दौरान बहस केवल पार्षदों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मेयर और नगर आयुक्त के साथ भी तीखी नोकझोंक हुई. वार्ड 21 के पार्षद संजय सिन्हा ने कहा कि सदन में इस तरह का माहौल पहले कभी नहीं देखा गया. उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मेयर दीपू भूवानियां और सीमा साह के कार्यकाल में भी इतनी तीखी स्थिति नहीं बनी थी. उन्होंने कुछ पार्षदों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे सदन की गरिमा प्रभावित हुई है. उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए इस मुद्दे पर नगर आयुक्त से चर्चा की जाएगी.
हंगामे के बीच भी जारी रही कार्यवाही
तनावपूर्ण माहौल के बावजूद बैठक की कार्यवाही जारी रही और कई अहम प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए. मेयर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वीकृत योजनाओं को तय समय सीमा के भीतर और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए ताकि जनता को उनका लाभ मिल सके.
ट्रेड लाइसेंस शुल्क में बदलाव, तीन नए स्लैब लागू
बैठक में ट्रेड लाइसेंस शुल्क को लेकर विस्तृत चर्चा हुई. निगम प्रशासन की ओर से पहले चार स्लैब का प्रस्ताव रखा गया था, जिस पर आपत्ति जताई गई. इसके बाद संशोधित प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें तीन नए स्लैब तय किए गए. इसके अनुसार 10 से 50 लाख रुपये तक आय वालों से 2500 रुपये, 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक आय वालों से 5000 रुपये और एक करोड़ रुपये से अधिक आय वालों से 10 हजार रुपये शुल्क लिया जाएगा. छोटे दुकानदारों को राहत देने की मांग भी बैठक में उठाई गई.
विकास योजनाओं को मंजूरी, बुनियादी सुविधाओं पर जोर
बैठक में शहर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. जल-जमाव की समस्या से निपटने के लिए सभी 51 वार्डों में कच्चे नालों और सड़कों के पक्कीकरण के लिए करोड़ों रुपये की योजनाओं को स्वीकृति दी गई. वार्ड 10, 50, 33, 34, 35, 29 और 42 सहित कई क्षेत्रों के लिए अलग-अलग पैकेज पर चर्चा हुई.
पेयजल, सौंदर्यीकरण और राजस्व बढ़ाने पर निर्णय
गर्मी को देखते हुए खराब पड़े बोरिंग की मरम्मत और नए डीप बोरिंग लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली. वार्ड 41 में हुसैनाबाद बड़ी मस्जिद के पास प्याऊ लगाने का निर्णय लिया गया. शहर के सौंदर्यीकरण के तहत प्रमुख चौक-चौराहों के रंग-रोगन को मंजूरी दी गई. साथ ही विज्ञापन विनियमावली 2026 के तहत अवैध पोस्टर और बैनर लगाने पर 10 हजार से 20 हजार रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रावधान तय किया गया. निगम की आय बढ़ाने के लिए तातारपुर, नाथनगर, दीपनगर और कंपनीबाग स्थित जमीनों के उपयोग पर भी विचार किया गया, जहां पेट्रोल पंप, मार्केट कॉम्प्लेक्स और विवाह भवन बनाने की योजना पर चर्चा हुई.
स्मार्ट सिटी और अन्य प्रस्तावों पर भी सहमति
बैठक में स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत होल्डिंग टैक्स के ऑनलाइन भुगतान के लिए तैयार सॉफ्टवेयर पर चर्चा की गई. इसके साथ ही कचरा प्रबंधन शुल्क को होल्डिंग टैक्स के साथ जोड़ने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया. इसके अलावा वार्ड कार्यालयों, सामुदायिक भवनों के निर्माण, खाली जमीनों की घेराबंदी और आउटसोर्सिंग के जरिए मानव संसाधन उपलब्ध कराने जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई.
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