Israel and Iraq War: 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में तनाव को खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है. क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक स्तर पर हलचल तेज कर दी है और इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति तथा अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
हजारों किलोमीटर दूर चल रहे इस टकराव का असर भारत के आम उपभोक्ता तक कैसे पहुंचेगा, यह सवाल अब आर्थिक बहस के केंद्र में है.
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हॉर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा
सबसे बड़ी चिंता हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है. ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के ऊर्जा व्यापार की धुरी माना जाता है. वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी इसी रास्ते से गुजरती है.
भारत की निर्भरता:
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. इराक, सऊदी अरब और यूएई जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता इसी समुद्री मार्ग के जरिये भारत तक तेल पहुंचाते हैं.
संभावित जोखिम:
यदि इस मार्ग पर अवरोध उत्पन्न होता है, जहाजों की आवाजाही बाधित होती है या सुरक्षा खतरा बढ़ता है, तो भारत की तेल आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर दबाव पड़ सकता है.
तेल की कीमतों में उछाल और बढ़ता आयात बिल
अर्थशास्त्रियों का आकलन है कि कच्चे तेल के दाम में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि भारत के आयात व्यय में लगभग 13–14 अरब डॉलर (करीब 1.15 लाख करोड़ रुपये) का अतिरिक्त बोझ डाल सकती है.
रुपये पर दबाव:
तेल आयात के लिए डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया कमजोर हो सकता है, जिससे आयातित वस्तुएं और महंगी होंगी.
ढुलाई लागत में वृद्धि:
डीजल की कीमतें बढ़ने पर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ेगा. इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं—सब्जी, फल, अनाज—की कीमतों पर दिखाई दे सकता है.
एलपीजी और घरेलू बजट पर असर
भारत रसोई गैस का भी बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है. एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बेंचमार्क से जुड़ी होती हैं. ऐसे में तेल महंगा होने पर सरकार पर सब्सिडी का दबाव बढ़ सकता है.
संकेत दिए गए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को तत्काल झटका न लगे, इसकी कोशिश की जाएगी. हालांकि, यदि संघर्ष लंबा चलता है तो कीमतों को स्थिर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
कृषि निर्यात पर मंडराता संकट
यह तनाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि व्यापार पर भी असर डाल सकता है.
बासमती चावल:
भारत के कुल बासमती निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा ईरान को जाता है. भुगतान में अड़चन या शिपिंग बाधित होने की स्थिति में किसानों और निर्यातकों की बड़ी राशि अटक सकती है.
चाय व्यापार:
चाय उद्योग भी निर्यात पर निर्भर है. बंदरगाहों पर सुस्ती या भुगतान जोखिम से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं.
सरकार की तैयारियां और रणनीतिक भंडार
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक बुलाई है.
सामरिक भंडार का मूल्यांकन:
आपात स्थिति के लिए बनाए गए रणनीतिक तेल भंडार की समीक्षा की जा रही है.
वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत:
रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से अतिरिक्त आपूर्ति के विकल्पों पर विचार जारी है.
प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा:
खाड़ी देशों में रह रहे करीब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा भी प्राथमिकता सूची में है.
आगे की राह
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है. ऊर्जा आपूर्ति, महंगाई, निर्यात और मुद्रा विनिमय दर—सभी पर इसके प्रभाव की आशंका है. आने वाले दिनों में घटनाक्रम की दिशा तय करेगी कि यह संकट सीमित रहेगा या व्यापक आर्थिक दबाव में बदल जाएगा.
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