इस खबर में क्या है?
Harivansh Singh: राज्यसभा में एक अहम संवैधानिक पद पर एक बार फिर हरिवंश नारायण सिंह की वापसी हुई है. उन्हें लगातार तीसरी बार उच्च सदन का उपसभापति चुना गया है. इस बार उनका चुनाव बिना किसी मुकाबले के संपन्न हुआ, क्योंकि विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा गया. शुक्रवार को इस चयन की औपचारिक घोषणा कर दी गई, जिसके साथ ही उनका नया कार्यकाल शुरू हो गया.
हरिवंश नारायण सिंह का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था, जिसके बाद यह पद रिक्त हो गया था. इसके लिए चुनाव की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार शुरू की गई. राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने प्रक्रिया के तहत चुनाव की तारीख तय की थी. प्रस्ताव दाखिल करने की अंतिम समय-सीमा गुरुवार दोपहर तक निर्धारित थी, जिसके भीतर उनके समर्थन में कई प्रस्ताव प्राप्त हुए.
विपक्ष ने नहीं उतारा उम्मीदवार
इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि विपक्ष ने इसमें भाग नहीं लेने का फैसला किया. किसी भी दल ने अपने उम्मीदवार का नामांकन दाखिल नहीं किया, जिसके चलते हरिवंश का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया. सूत्रों के मुताबिक उनके समर्थन में पांच प्रस्ताव दाखिल किए गए थे, जबकि विपक्ष की ओर से एक भी नाम सामने नहीं आया.
विपक्ष का यह रुख एक तरह का विरोध माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि यह निर्णय केंद्र सरकार के उस रुख के खिलाफ लिया गया है, जिसमें लंबे समय से लोकसभा में उपाध्यक्ष पद को खाली रखा गया है. इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने इस चुनाव से दूरी बनाई.
संसदीय इतिहास में खास उपलब्धि
हरिवंश नारायण सिंह का यह चुनाव कई मायनों में विशेष माना जा रहा है. उन्हें एक मनोनीत सदस्य के रूप में इस पद के लिए चुना गया है, जो अपने आप में एक अलग स्थिति बनाता है. लगातार तीसरी बार इस जिम्मेदारी को संभालना भी उनके प्रति सदन के विश्वास को दर्शाता है.
उनके कार्यकाल के दौरान सदन की कार्यवाही के संचालन में संतुलन और संयम को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है. इसी वजह से उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी सौंपी गई है.
प्रधानमंत्री ने जताया भरोसा
राज्यसभा में इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश के चयन पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना इस बात का संकेत है कि सदन को उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा है.
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनके अनुभव और कार्यशैली ने सदन की कार्यवाही को बेहतर बनाने में योगदान दिया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी हरिवंश इसी संतुलन और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे और सदन की गरिमा को और ऊंचाई तक ले जाएंगे.
आगे की भूमिका पर नजर
हरिवंश नारायण सिंह के सामने अब फिर से वही जिम्मेदारी है कि वे सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाएं और विभिन्न दलों के बीच समन्वय बनाए रखें. मौजूदा राजनीतिक माहौल में यह भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
उनके तीसरे कार्यकाल की शुरुआत ऐसे समय में हुई है, जब संसद में कई अहम मुद्दों पर चर्चा और बहस होने की संभावना है. ऐसे में उनकी भूमिका सदन को संतुलित और प्रभावी ढंग से संचालित करने में अहम मानी जा रही है.
इसे भी पढ़ें-दिल्ली IGI एयरपोर्ट पर टली बड़ी दुर्घटना, टकराए 2 विमान, विंग में हुआ नुकसान
इसे भी पढ़ें-पीएम मोदी बोले, महिला अधिकारों का विरोध करने वालों को महिलाओं ने नहीं किया माफ
इसे भी पढ़ें-लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर घमासान, 3 विधेयकों ने बढ़ाई सियासी गर्मी
इसे भी पढ़ें-तमिलनाडु के सीएम स्टालिन का तीखा विरोध, प्रस्तावित कानून की कॉपी जलाकर जताया आक्रोश
इसे भी पढ़ें-दिल्ली में दर्दनाक आग हादसा, रोहिणी में एक परिवार के 3 लोगों की मौत
इसे भी पढ़ें-दिल्ली में दर्दनाक आग हादसा, रोहिणी में एक परिवार के 3 लोगों की मौत
इसे भी पढ़ें-छत्तीसगढ़ के वेदांता प्लांट में बड़ा हादसा, बॉयलर ब्लास्ट से 10 श्रमिकों की मौत
इसे भी पढ़ें-Video : नोएडा में मजदूरों का उग्र प्रदर्शन, सैलरी बढ़ाने की मांग पर भड़का गुस्सा, पत्थरबाजी और तोड़फोड़

