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लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर घमासान, 3 विधेयकों ने बढ़ाई सियासी गर्मी

Parliament Session : संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. लोकसभा में इन बिलों की पेशकश के बाद जोरदार हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक फैसला संभव माना जा रहा है.

Parliament Session : लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में बदलाव और परिसीमन से जुड़े तीन अहम विधेयकों की पेशकश के साथ ही संसद का माहौल बेहद गरम हो गया. सरकार इन विधेयकों को महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने इनके समय, उद्देश्य और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सदन के भीतर तीखी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला, वहीं बाहर भी इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है. विशेष सत्र के पहले ही दिन साफ हो गया कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक केंद्र बनने वाला है.

विधेयकों की पेशकश के साथ बढ़ा विवाद

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ और परिसीमन से संबंधित विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया. इसके साथ ही गृह मंत्री अमित शाह ने संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक सदन में रखा. 131वें संशोधन विधेयक को पेश करने के प्रस्ताव पर मतदान हुआ, जिसमें 251 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 185 सांसदों ने विरोध में वोट डाला.

जैसे ही परिसीमन से जुड़ा विधेयक पेश किया गया, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने इसका विरोध शुरू कर दिया. उनके विरोध के बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया. विपक्षी दलों ने इस कदम को जल्दबाजी में उठाया गया फैसला बताते हुए सरकार को घेरा.

संघीय ढांचे पर सवाल, उद्देश्य पर उठी शंका

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह विधेयक देश के संघीय ढांचे के खिलाफ है और इसके पीछे की मंशा स्पष्ट नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद पहले ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला कानून पारित कर चुकी है, तो फिर इस तरह का नया प्रावधान लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी.

उनके इस बयान के बाद विपक्ष के अन्य सदस्यों ने भी समर्थन में आवाज उठाई और सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की. विपक्ष का कहना था कि इस तरह के बड़े बदलावों को बिना व्यापक सहमति और स्पष्ट प्रक्रिया के लागू करना उचित नहीं है.

सरकार का रुख साफ, हर सवाल का जवाब देने का भरोसा

गृह मंत्री अमित शाह ने सदन को आश्वस्त किया कि विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए पूरा समय दिया जाएगा और सरकार किसी भी सवाल से पीछे नहीं हटेगी. उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान हर मुद्दे पर विस्तार से जवाब दिया जाएगा और किसी भी बिंदु को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा.

उन्होंने यह भी कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के अनुरूप नहीं है. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि 2027 की जनगणना की तैयारियां चल रही हैं और सरकार ने जाति आधारित गणना कराने का निर्णय लिया है, ताकि भविष्य की नीतियों में स्पष्टता लाई जा सके.

अखिलेश यादव का आरोप, जल्दबाजी में निर्णय

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के फैसले इतनी जल्दबाजी में नहीं किए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार जनगणना से बचने की कोशिश कर रही है.

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यदि जनगणना हो जाती है, तो उसके बाद जातिगत आरक्षण की मांग और तेज हो सकती है, जिससे सरकार बचना चाहती है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है और सच्चाई को छिपाया जा रहा है.

सपा का स्पष्ट विरोध, जनगणना से जोड़ने की मांग

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी इन तीनों विधेयकों का विरोध करती है. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन को जनगणना से अलग करने की कोशिश की जा रही है, जो सही नहीं है.

उनके अनुसार, यदि जनगणना पूरी नहीं होती है और उसके आधार पर परिसीमन नहीं किया जाता, तो यह प्रक्रिया अधूरी और असंतुलित रहेगी. इसी वजह से उनकी पार्टी इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर सकती.

राज्यसभा में कार्यवाही स्थगित, विपक्ष का बहिष्कार ऐलान

राज्यसभा में नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद और पूर्व सदस्य मोहसिना किदवई तथा पार्श्व गायिका आशा भोसले को श्रद्धांजलि दी गई. इसके बाद सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि विपक्ष राज्यसभा के उपसभापति चुनाव का बहिष्कार करेगा. इससे साफ संकेत मिला कि संसद के दोनों सदनों में यह मुद्दा टकराव का कारण बना रहेगा.

प्रधानमंत्री का संकेत, बड़े फैसले की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष सत्र को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को मजबूत बनाने के अपने संकल्प को तेजी से आगे बढ़ा रही है.

उन्होंने भरोसा जताया कि इस सत्र में लिए जाने वाले निर्णय देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे और इससे समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा.

रिजिजू की अपील, अफवाहों से दूर रहने की बात

सत्र शुरू होने से पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह दिन ऐतिहासिक है और इस पहल को लंबे समय तक याद रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि इन विधेयकों के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मार्ग प्रशस्त होगा.

उन्होंने विपक्ष से अपील की कि परिसीमन के नाम पर गलतफहमी न फैलाएं और खासकर दक्षिण भारत के लोगों को गुमराह न किया जाए. उन्होंने सभी दलों से इस मुद्दे पर सहयोग की अपेक्षा जताई.

दक्षिण भारत में विरोध, स्टालिन का तीखा रुख

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने परिसीमन विधेयक की प्रति जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव दक्षिण भारत के राज्यों के हितों के खिलाफ जा सकता है.

उनका आरोप था कि इस तरह के कदम से क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित होगा और कुछ राज्यों के साथ अन्याय की स्थिति पैदा हो सकती है. इस बयान के बाद दक्षिण भारत में भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है.

मनीष तिवारी का सुझाव, अलग किया जाए आरक्षण

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वर्तमान में 543 सीटों में से एक-तिहाई, यानी 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं.

उनके अनुसार, यदि दोनों प्रक्रियाओं को अलग-अलग रखा जाए, तो इससे ज्यादा स्पष्ट और संतुलित व्यवस्था बनाई जा सकती है. उन्होंने सरकार से इस दिशा में पुनर्विचार करने की मांग की.

तीन दिवसीय सत्र में होगा आगे का फैसला

सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें इन विधेयकों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. सरकार इन्हें पारित कराने के पक्ष में है, जबकि विपक्ष लगातार इसका विरोध कर रहा है.

विपक्ष का कहना है कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी किए बिना इस तरह का फैसला जल्दबाजी होगा. ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है.

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सोनी कुमारी
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