Bihar Road : बिहार में सड़क निर्माण और निगरानी का तरीका अब पूरी तरह बदल चुका है. पहले किसी सड़क का एलाइनमेंट तय करने के लिए इंजीनियरों को कई दिनों तक संबंधित इलाके का लगातार दौरा करना पड़ता था और जमीन की स्थिति को समझने में काफी समय लगता था. अब डिजिटल तकनीकों के आने से यह प्रक्रिया तेज, सटीक और कम खर्चीली हो गई है. हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में आईटी कंपनियां अपने आधुनिक सॉल्यूशंस के साथ राज्य में सक्रिय हुई हैं. इन कंपनियों की भागीदारी से सड़क और पुल निर्माण के साथ-साथ उनके रखरखाव में भी तकनीकी सुधार देखने को मिल रहा है और परियोजनाओं की गुणवत्ता पहले की तुलना में बेहतर हो रही है.
एआई और सेंसर से बदल रही निगरानी व्यवस्था
सड़क और पुल निर्माण में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का बड़े स्तर पर उपयोग होने लगा है. कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन पुल जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए सेंसर आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे पुल की मजबूती और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकती है. किसी भी तरह की तकनीकी गड़बड़ी या कमजोरी का समय रहते पता लगाना अब संभव हो गया है, जिससे बड़े हादसों की आशंका को कम किया जा सकता है.
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ड्रोन और एआई कैमरों से हो रही सटीक पहचान
बिहार में पुलों के स्ट्रक्चरल सर्वे के लिए ड्रोन आधारित तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. इससे सर्वेक्षण का समय कम हुआ है और परिणाम अधिक सटीक मिल रहे हैं. वहीं सड़कों पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, जिन्हें ब्लैक स्पॉट कहा जाता है, उनकी पहचान के लिए एआई आधारित कैमरों का उपयोग किया जा रहा है. यह तकनीक ट्रैफिक पैटर्न और सड़क की स्थिति का विश्लेषण कर खतरनाक स्थानों को चिन्हित करती है, जिससे प्रशासन को समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलती है.
इनोवेशन के जरिए सड़क रखरखाव में सुधार
सड़क रखरखाव के क्षेत्र में भी निजी कंपनियां अपने नए-नए इनोवेशन के साथ सामने आ रही हैं. कई कंपनियां ऐसी तकनीक विकसित कर रही हैं, जिनके जरिए सड़कों को समय से पहले जर्जर होने से बचाया जा सकता है. एक कंपनी ने सरकार से संपर्क कर अपने समाधान की पेशकश की है, जिसमें सड़क की सतह को मजबूत बनाए रखने और छोटे-छोटे नुकसान को समय रहते ठीक करने की व्यवस्था शामिल है. इससे मरम्मत पर होने वाला खर्च कम होगा और सड़कें लंबे समय तक बेहतर स्थिति में बनी रहेंगी.
एलआईडीएआर और थ्रीडी मैपिंग से तय हो रहा एलाइनमेंट
सड़क एलाइनमेंट तय करने में अब एलआईडीएआर और थ्रीडी मैपिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. आमस-दरभंगा सड़क परियोजना में इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जहां हेलीकॉप्टर की मदद से लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग सर्वे किया गया. इस प्रक्रिया से इलाके का बेहद सटीक डेटा प्राप्त होता है, जिससे सड़क का मार्ग तय करने में आसानी होती है. इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
सेंसर तकनीक से सड़कों की हालत पर नजर
सड़कों की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए भी आधुनिक सेंसर तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. ये सेंसर सड़क की सतह पर मौजूद छोटे गड्ढों, दरारों और अन्य खामियों को पहचान लेते हैं. इससे समय रहते मरम्मत का काम शुरू किया जा सकता है और सड़कों की गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है. यह तकनीक विशेष रूप से व्यस्त सड़कों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है.
अतिक्रमण पर रीयल टाइम मॉनिटरिंग
सड़क किनारे अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों की निगरानी के लिए भी आईटी आधारित सॉल्यूशंस का इस्तेमाल किया जा रहा है. ड्रोन और सैटेलाइट डेटा के जरिए रीयल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे अवैध निर्माण की पहचान तुरंत हो जाती है. इससे प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलती है और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त रखने में आसानी होती है.
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