Padma Shree: बिहार के तीन बड़े हस्तियों को पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा गया. इस सूची में शामिल हैं भोजपुरी लोकगायक भरत सिंह भारती, लोक नृत्य के पुरोधा विश्व बंधु (मरणोपरांत) और कृषि विज्ञान के क्षेत्र में योगदान देने वाले गोपाल जी त्रिवेदी. ये सभी अपनी-अपनी कला, संस्कृति और विज्ञान के क्षेत्र में जड़ों से जुड़े रहकर असाधारण योगदान देने के लिए जाने जाते हैं.
भरत सिंह भारती: भोजपुरी संगीत के चमकते सितारे
भोजपुरी लोकगायक भरत सिंह भारती को लंबे समय से भोजपुरी गीतों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया. 1962 से वे आकाशवाणी पटना से जुड़े हुए हैं और भिखारी ठाकुर व महेंद्र मिसिर की गायकी को जीवित रखने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है.
उनके लोकप्रिय गीतों में पंजवार में लागल भोजपुरिया बाजार और पानी के पियासल हिरना शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें हर घर में पहचान दिलाई. उनकी सरल और भावपूर्ण गायकी ग्रामीण जीवन की असली भावनाओं को सामने लाती है. भरत सिंह भारती ने भोजपुरी लोकगीतों की इस विरासत को संरक्षित करने और उसे विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है.
विश्व बंधु: लोक नृत्य के संरक्षक
लोक नृत्य के क्षेत्र के प्रख्यात नाम विश्व बंधु का जन्म 23 नवंबर 1930, पटना में हुआ. उन्होंने नृत्य की शिक्षा गुरु उदय शंकर से ली और जीवनभर इसे समर्पित किया. उन्होंने डोमकच जैसे पुराने नृत्यों को बचाया और सुरांगन नामक संस्था बनाकर गरीब बच्चों को नृत्य सिखाने का काम किया.
विश्व बंधु नृत्य के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाने में भी आगे रहे, चाहे वह दहेज प्रथा हो या शिक्षा का महत्व. कला के प्रति उनका जुनून इतना गहरा था कि उन्होंने सरकारी शिक्षक की नौकरी तक छोड़ दी थी.
गोपाल जी त्रिवेदी: किसानों के लिए नई तकनीकें
कृषि विज्ञान में योगदान के लिए सम्मानित डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी ने बिहार में किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने आधुनिक तकनीकों और प्रयोगों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाया, जिससे पैदावार बढ़ी और खेती से जुड़ी आमदनी में सुधार हुआ. उनके प्रयासों से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के दरवाजे खुले.
पद्म श्री सम्मान: किसे और क्यों मिलता है
पद्म श्री पुरस्कार कला, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन में असाधारण योगदान देने वालों को दिया जाता है. इस पुरस्कार के साथ विजेताओं को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर वाला प्रमाण-पत्र और कांसे का पदक प्रदान किया जाता है. औपचारिक आयोजनों में पहनने के लिए पदक की छोटी प्रतिकृति भी दी जाती है. ध्यान दें कि इस सम्मान के साथ कोई नकद राशि, पेंशन या मुफ्त यात्रा जैसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं.
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